आज़ाद समाज पार्टी के प्रमुख चंद्रशेखर आज़ाद ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर ‘जनता को तबाह’ करने का आरोप लगाया है और एलान किया है कि विधानसभा चुनाव में वो गोरखपुर सीट पर मुख्यमंत्री को चुनौती देंगे. 

चंद्रशेखर आज़ाद के मुताबिक उनकी पार्टी छोटे दलों को एकजुट करते हुए 403 विधानसभाओं पर चुनाव लड़ेगी. दूसरे विपक्षी दलों को ‘ओवर कॉन्फिडेंट’ बताते हुए चंद्रशेखर आज़ाद ने कहा कि उनकी पार्टी कितनी कामयाब होगी, ये जनता तय करेगी. 

उन्होंने सिर्फ़ सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी ही नहीं बल्कि सभी विपक्षी दलों को भी कठघरे में खड़ा किया और दावा किया कि बीते पांच साल के दौरान किसी दल ने जनता के किसी मुद्दे को नहीं उठाया और न ही उनके लिए संघर्ष किया. 

चंद्रशेखर आज़ाद ने बीबीसी हिंदी से ख़ास बातचीत में कहा, “देखिए, मैंने आवेदन किया है. मैं भी पार्टी का एक कार्यकर्ता हूं, मैंने आवेदन किया है कि पार्टी जहां से लड़ाएगी. (लेकिन) मेरी इच्छा है कि गोरखपुर, जहां मुख्यमंत्री लड़ेंगे, उनके सामने लड़ूं. या फिर विपक्ष में जो सबसे ताक़तवर नेता अपने आप को समझता हो वो (वहां) जाकर लड़े.”

चंद्रशेखर आज़ाद ने आगे कहा, “भई, हम नहीं चाहते कि वर्तमान मुख्यमंत्री जिन्होंने साढ़े चार साल- पौने पांच साल उत्तर प्रदेश की जनता को तबाह कर दिया. निर्दोष लोगों पर मुकदमे लगाए. जाति देखकर बुलडोज़र चलाए. तमाम बहनों के साथ हाथरस जैसा मामला हुआ. उन्नाव, प्रयागराज जैसा मामला हुआ. तमाम गोलियां चलीं, सीएए और एनआरसी में और 20 लोगों की जान ले ली गई. ऐसे मुख्यमंत्री को, ऐसे नेता को सदन में क्यों भेजा जाए? अगर विपक्ष ये समझता है कि उन्होंने नुक़सान पहुंचाया है और (विपक्ष के नेता) उनके ख़िलाफ़ लड़ रहे हैं तो उनको रोकने का काम करें. या तो विपक्ष का कोई बड़ा नेता ख़ुद जाकर लड़े.”

चंद्रशेखर आज़ाद ने दावा किया, “मैं समझता हूं कि अगर मैं आज नहीं लड़ा तो जीवन में कभी कोई युवा धनतंत्र की राजनीति में आगे बढ़कर नहीं आएगा और ना ही लड़ पाएगा.”

उन्होंने आगे कहा, “हमने पांच साल अपने लोगों को मरते देखा लेकिन अगले पांच साल नहीं मरने देंगे. इसलिए हम चुनाव में हैं “

चंद्रशेखर आज़ाद की पार्टी कई दलों के साथ गठबंधन की कोशिश में थी. हाल में उनके और अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी के बीच गठजोड़ न हो पाने की बात सामने आई. 

चंद्रशेखर आज़ाद ने अखिलेश यादव को लेकर कहा, “मैं समझता हूं कि रिश्ते अभी भी बिगड़े नहीं हैं. मेरी उनसे कोई व्यक्तिगत दुश्मनी नहीं है. सब पार्टी अपना काम कर रही हैं. हम भी अपना काम कर रहे हैं.”

‘चैलेंज स्वीकार किया’

सपा से गठबंधन क्यों नहीं हो सका, ये जानकारी देते हुए चंद्रशेखर आज़ाद ने कहा, ” पिछले छह महीने से वार्ता चली. लास्ट टाइम तक (बातचीत) सकारात्मक थी. अचानक से कुछ बदलाव हुआ और उस प्रस्ताव को ना के बराबर कर दिया गया. मैंने उस प्रस्ताव को मना कर दिया. मैं समझता हूं कि सामाजिक न्याय “जिसकी जितनी संख्या भारी, उसकी उतनी हिस्सेदारी की” बात करता है.”

उन्होंने आगे कहा, ” अगर लोकतंत्र में आपकी भागेदारी नहीं है तो फिर आपके मुद्दों पर बात नहीं होगी. आपके क्षेत्र पर बात नहीं होगी. आपके लिए नीतियां नहीं बनेंगी और (अगर) वो समाज जो लंबे समय तक सताया गया है, उसकी राजनीतिक हिस्सेदारी सुनिश्चित नहीं होगी तो वो वहीं हाशिए पर पड़ा रहेगा. काफी चीजें हुईं. अब मैं उससे उबर चुका हूं.”

चंद्रशेखर आज़ाद ने कहा, “अब हमने तय किया है कल (मंगलवार को) कि आज़ाद समाज पार्टी अपने दम पर 403 विधानसभाओं पर चुनाव लड़ेगी.”

उन्होंने आरोप लगाया कि पहले स्थापित लोग उन्हें रोकने की कोशिश में जुटे हैं और दावा किया उन्होंने सभी की चुनौती स्वीकार कर ली है. 

चंद्रशेखर आज़ाद ने कहा, “मैं एक नौजवान हूं. कोई भी नौजवान ऐसा नहीं होगा जिसने संघर्ष न किया हो. अगर कोई ग़रीब आदमी गांव से उठकर किसी भी फील्ड में आगे बढ़ने का प्रयास करता है तो जो दूसरे लोग हैं, जो पहले से स्थापित लोग हैं उसे रोकने का प्रयास करते हैं. लेकिन ये एक चैलेंज होता है और ये चैलेंज मैंने स्वीकार किया है.”

उन्होंने कहा कि जिन सीटों पर उनकी पार्टी के सहयोगी दलों के उम्मीदवार चुनाव लड़ेंगे, उन्हें भी वो अपने ही उम्मीदवार के तौर पर देखेंगे. 

चंद्रशेखर आज़ाद ने कहा, “अब हम अपने हौसले से (और) भीम आर्मी आज़ाद समाज पार्टी की मेहनत से लड़ेंगे. 403 (सीटों) पर ही लड़ेंगे. जो सीटें मैंने छोड़ने की बात कही हैं, उन पर समझिए कि हम समर्थन कर रहे हैं तो हम ही लड़ रहे हैं. वहां भी हम विपक्ष को हराने का काम करेंगे.”

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