वर्ल्ड चैंपियन बनकर भारत का गौरव बढ़ाने वालीं निकहत जरीन भले ही हैदराबाद की रहने वाली हैं, लेकिन उन्हें हिंदी फिल्में देखना पसंद हैं। वह सलमान खान की बहुत बड़ी फैन हैं। हालांकि, यदि बात उनकी बायोपिक की आएगी तो वह पर्दे पर अपना किरदार जीने के लिए आलिया भट्ट को चुनेंगी। निकहत जरीन ने द इंडियन एक्सप्रेस से विशेष बातचीत के दौरान आलिया भट्ट को चुनने के पीछे भी खास वजह भी बताई थी। यही नहीं, निकहत जरीन ने बातचीत के दौरान मैच में महिला मुक्केबाजों के हिजाब पहनने को लेकर भी बेबाकी से अपनी राय रखी थी।

अगर आपकी बायोपिक बननी है, तो आप किस एक्ट्रेस को अपने किरदार के लिए चुनना चाहेंगी के सवाल पर, निकहत ने कहा, ‘मैंने अब तक इस पर विचार नहीं किया है। जब मुझ पर कोई फिल्म बनेगी तब पता नहीं कौन सी अभिनेत्री सूची में शीर्ष पर होगी। अभी की बात करूं तो मैं चाहतीं हूं कि आलिया भट्ट मेरा किरदार निभाएं, क्योंकि मेरी तरह उनके गालों पर भी डिंपल पड़ते हैं। मुझे लगता है कि वह मेरे किरदार को जी सकती हैं।’ बातचीत के दौरान निकहत जरीन ने इस बारे में भी बात की कि कैसे लोगों ने एक लड़की के रूप में मुक्केबाज बनने के उनके फैसले का मजाक उड़ाया था।

निकहत से पूछा गया था कि आप एक रुढ़िवादी परिवार से आती हैं। आपने हर तरह का संघर्ष देखा है। विश्व मुक्केबाजी चैंपियनशिप के दौरान रेफरी और कुछ मुक्केबाजों को हिजाब पहने देखा गया। पूरी दुनिया में इस बात को लेकर बहस चल रही है कि एथलीट्स को हिजाब पहनने की मंजूरी दी जानी चाहिए या नहीं। सामान्य जीवन में भी इसको लेकर बहस होती रहती है। आपकी इस पर क्या राय है?

इस सवाल के जवाब में निकहत जरीन ने कहा, ‘मेरे हिसाब से यह उनकी पसंद है। अगर वे सहज महसूस करती हैं, तो उन्हें इसे पहनना चाहिए। यदि वे सहज महसूस नहीं करती हैं, तो उन्हें वही पहनना चाहिए जिसमें वह खुद को सहज महसूस करती हों। यह पूरी तरह से उनकी पसंद है, इसलिए मेरी टिप्पणी की कोई आवश्यकता नहीं है। मुझे शॉर्ट्स और वेस्ट (बनियान) में बॉक्सिंग करना पसंद है। मुझे कोई भी हिजाब पहनने के लिए मजबूर नहीं कर रहा है और न ही कोई मुझे शॉर्ट्स और बनियान पहनने से रोक रहा है। यह सबकी अपनी-अपनी पसंद है और हमें इसका सम्मान करना चाहिए।’

एक समाचार चैनल से बातचीत में निकहत के शॉर्ट्स और हिजाब को लेकर कहा, ‘बॉक्सिंग एक ऐसा खेल है, जिसमें अंतरराष्ट्रीय संगठन ने हिजाब पहनकर खेलने की मंजूरी दी हुई है, इसलिए इसे पहनकर बॉक्सिंग की जा सकती है। हालांकि, खेल में कोई धर्म नहीं होता है, क्योंकि हर खिलाड़ी का लक्ष्य अपने देश के लिए पदक जीतना होता है।’

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journalist | chief of editor and founder at reportlook media network

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