रामपुर में अखिलेश के लिए बड़ी चुनौती बनेंगे आज़मवादी? अब्दुल्ला के ट्वीट गरमाई सियासत

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समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है. आजम खान के बेटे अब्दुल्ला आजम के एक ट्वीट के बाद सियासत फिर से गरमा गई है.क्या अब भी आजम खान समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव से नाराज चल रहे हैं..क्या जेल से रिहाई के बाद भी आज़म समाजवादी पार्टी से खफा हैं.. क्या दोनों नेताओं के बीच की दूरियां अभी भी मिटी नहीं हैं.. ? ये वो सवाल हैं. जो पिछले कई दिनों से यूपी की सियासत में चर्चा का विषय बने हुए हैं. वैसे तो वक्त-वक्त पर अखिलेश यादव और खुद आज़म खान (Azam Khan) ऐसी तमाम अटकलों पर विराम लगाते नजर आए हैं. लेकिन इन सबके बीच मंगलवार को आज़म खान के हवाले से किए गए बेटे अब्दुल्ला आजम के एक ट्वीट ने फिर से प्रदेश की सियासत में हलचल पैदा कर दी है.

मंगलवार को अब्दुल्ला आज़म ने पिता के हवाले से ट्वीट कर लिखा कि,’ मैं अभी जिंदा हूं.. तो जिंदा हूं.. आज़म खान साहब जी.अब्दुल्ला आजम के ट्वीट किए गए फोटो के नीचे हरे रंग के शब्दों में लिखा है.. जावेद पठान आज़मवादी.. ये आज़मवादी शब्द अपने आप में कई सवाल खड़े कर रहा हैय सवाल ये है कि क्या अखिलेश यादव की अगुवाई वाली समाजवादी पार्टी को भविष्य की राजनीति में रामपुर से सबसे बड़ी चुनौती आजमवादी देने वाले हैं. अगर ऐसा हुआ तो अखिलेश के लिए इस क्षेत्र में सबसे बड़ी चुनौती आजमवादी यानी आज़म खान से टकराना होगा. क्योंकि रामपुर में अखिलेश यादव और समाजवादी पार्टी के लिए सबसे मजबूत स्तंभ आजम खान हैं.

रामपुर में आजम परिवार का दबदबा

रामपुर के राजनीतिक इतिहास पर नजर डाली जाए तो पता चलता है कि यहां पिछले कई सालों से आजम परिवार का दबदबा रहा है. अकेले आज़म खान यहां से 10 बार विधायक चुने गए हैं तो एक बार रामपुर से चुनाव जीतकर लोकसभा का भी सफर तय कर चुके हैं. आज़म खान की पत्नी तंजीन फातिमा ने साल 2019 में आजम के लोकसभा पहुंचने के बाद खाली हुई रामपुर विधानसभा सीट पर उपचुनाव में जीत दर्ज की थी. ये आज़म खान का जलवा ही था जो तंजीन फातिमा ने 2014 में राज्यसभा तक का सफर तय किया था.

आज़मवादी गुट सपा के लिए बन सकता है चुनौती

रामपुर जिले की स्वार विधानसभा सीट पर आज़म खान के बेटे अब्दुल्ला आज़म ने लगातार दो बार यानी 2017 और 2022 में जीत दर्ज की. कुल मिलाकर रामपुर में हुए 14 चुनावों में आजम खान या उनके पारिवार का दबदबा रहा. जबकि दो बार समाजवादी पार्टी के टिकट पर लोकसभा चुनाव लड़ जयाप्रदा लोकसभा पहुंची थी, उसके पीछे भी आज़म खान की राजनीतिक ताकत और उनका समर्थन ही था. ऐसे में अगर समाजवादी पार्टी से आज़मवादी गुट अलग होता है तो इसे अखिलेश यादव के लिए रामपुर लोकसभा सीट पर होने वाले लोकसभा उपचुनाव और भविष्य के लिए सबसे बड़ी चुनौती के रूप में देखा जाएगा.

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