नई दिल्ली. निखत जरीन ने हाल ही में तुर्की में हुई वर्ल्ड बॉक्सिंग चैम्पियनशिप के फ्लाइवेट कैटेगरी में गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रचा है. इस उपलब्धि के साथ वो देश में बॉक्सिंग की नई पोस्टर गर्ल बनी हैं. हालांकि, निखत के लिए यहां तक का सफर आसान नहीं रहा है. उन्हें आज भी याद है,

जब पिता मोहम्मद जमील ने उन्हें बॉक्सिंग रिंग में उतारा तो लोग उनसे कहते थे, “तुमने बेटी को बॉक्सिंग में क्यों डाला है? यह तो मर्दों का खेल है, उससे शादी कौन करेगा?” लेकिन पिता हमेशा यही कहते थे कि बेटा तुम बॉक्सिंग पर ध्यान दो. जब बॉक्सिंग रिंग में तुम अच्छा करोगी तो यही लोग तुम्हारे साथ तस्वीरें खिंचवाने के लिए आएंगे.”

बीते 19 मई को यह बात हकीकत बन गई. जब जरीन ने महिलाओं की विश्व मुक्केबाजी चैम्पियनशिप में सोने का तमगा अपने नाम किया. इस ऐतिहासिक सफलता के बाद से ही जरीन को इतने लोगों के फोन और मैसेज आए कि वो एक रात सो नहीं पाईं.

इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में निखत जरीन ने एक रूढ़िवादी समाज में अपने संघर्षों के बारे में बात की. उन्होंने बताया कि कैसे लड़की के रूप में बॉक्सिंग को चुनने की वजह से लोगों ने उनका मजाक उड़ाया. कैसे अपने सपने को हासिल करने के लिए उन्हें रिंग के अंदर और बाहर दोनों जगह लड़ना पड़ा?

ओलंपिक गोल्ड जीतना मेरा लक्ष्य: निखत
अब निखत का अगला लक्ष्य ओलंपिक में गोल्ड मेडल जीतना है. उन्होंने कहा, “हर खिलाड़ी का एक ही सपना होता है, अपने देश के लिए ओलंपिक में गोल्ड मेडल जीता. मैं भी उसी सपने को जी रही हूं. मैं ओलंपिक में इसी के साथ उतरूंगी. उससे कम कुछ भी मंजूर नहीं. मैं इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए पूरी जान लगा दूंगी.”

‘माता-पिता हमेशा मेरे लिए खड़े रहे’
निखत ने बताया. “मैं एक रूढ़िवादी समाज से ताल्लुक रखती हैं, जहां लोग सोचते हैं कि लड़कियों को केवल घर पर रहना चाहिए, घर के काम करने चाहिए, शादी करनी चाहिए. लेकिन मेरे पिता एथलीट थे और जानते थे कि एक एथलीट किस तरह का जीवन जीता है. वह हमेशा मेरे लिए रहे और मेरा समर्थन किया.” मां परवीन सुल्ताना भी चट्टान की तरह डटी रहीं. हालांकि, एक बार उन्हें बॉक्सिंग की क्रूर दुनिया को महसूस करने का मौका मिला, जब निखत लड़के के साथ अपने पहले ट्रेनिंग सेशन के बाद खून से सने चेहरे और आंखों में चोट के साथ घर लौटीं थीं.

निखत के मुताबिक, “जब मां ने मुझे इस हाल में देखा तो वो कांपने लगी थी. वह रोने लगी और बोली, ‘मैंने तुम्हें बॉक्सिंग में इसलिए नहीं डाला. ताकि तुम्हारा चेहरा खराब हो जाए. कोई तुमसे शादी नहीं करेगा. तब मैंने उनसे कहा, चिंता न करो, नाम होगा तो दूल्हों की लाइन लग जाएगी. लेकिन, अब मां को इसकी आदत हो गई है.”

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journalist | chief of editor and founder at reportlook media network

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