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Friday, December 2, 2022
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तानाशाह रहते हुए भी सद्दाम हुसैन ने अपने इन 5 कामों के लिए बटोरी थीं तालियां और आज के दिन ही

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सद्दाम हुसैन के कार्यकाल की पांच चीजें ऐसी हैं जिन्‍हें आज तक इराक के लोग याद करते हैं. इराक से जुड़े मसलों के जानकारों की मानें तो सद्दाम ने महिलाओं को वो अधिकार दिए जिनसे उन्‍हें दूर रखा गया था.

30 दिसंबर 2006 वह तारीख है जिसने इराक और पूरी दुनिया को एक नई घटना से रूबरू करवाया था. 14 साल पहले इराक के तानाशाह या राष्‍ट्रपति सद्दाम हुसैन को फांसी दे दी गई थी. सद्दाम हुसैन जो इराक के पांचवें राष्‍ट्रपति थे.  उन्‍हें 5 नवंबर 2006 को बगदाद की एक कोर्ट ने सन् 1982 के मामले का दोषी माना था जिसमें 148 इराकी शियाओं की हत्‍या कर दी गई थी. आज भी अमेरिका के कई विशेषज्ञ मानते हैं कि तत्‍कालीन अमेरिकी राष्‍ट्रपति जॉर्ज डब्‍लू बुश, सद्दाम को फांसी पर लटकते देख महसूस कर रहे थे  कि अमेरिका जो चाहता था वह हासिल नहीं कर सका. हर बहस से परे सद्दाम हुसैन के कार्यकाल की पांच चीजें ऐसी हैं जिन्‍हें आज तक इराक के लोग याद करते हैं.

महिलाओं के अधिकार

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इराक से जुड़े मसलों के जानकारों की मानें तो सद्दाम ने महिलाओं को वो अधिकार दिए जिनसे उन्‍हें दूर रखा गया था. वो मानते हैं कि सन् 1970 में जब सद्दाम हुसैन ने इराक की सत्‍ता संभाली तो इराकी महिलाओं को मिले अधिकार न के बराबर थे. इरिन न्‍यूज की तरफ से बताया गया है कि साल 2006 में हुए एक सर्वे में यह बात सामने आई थी कि इराक में महिलाओं के जीवन स्‍तर और उनके अधिकारों के प्रति सम्‍मान बढ़ा है. यह सर्वे राजधानी बगदाद स्थित एक एनजीओ वुमेन फ्रीडम ऑर्गनाइजेशन की तरफ से कराया गया था.

इस सर्वे में यह बात सामने आई थी कि हुसैन के शासन काल में महिलाओं के मूल अधिकारों को तय किया गया था और संविधान में जो अधिकार उन्‍हें मिले थे, उनका सम्‍मान किया गया था. सर्वे के मुताबिक इराक की सरकार में महिलाओं को बड़े सरकारी पदों से नवाजा गया था और यही बात उनके सम्‍मान की गारंटी बन गई थी.

चैरिटी या समाज सेवा

साल 2003 में सीबीएस की एक न्‍यूज रिपोर्ट में कहा गया था कि हुसैन ने अमेरिका के डेट्रॉयट में स्थित एक चर्च को हजारों मिलियन डॉलर का दान दिया था. इस दान के बाद उन्‍हें इस शहर की चाबी तक सौंप दी गई थी. डेट्रॉयट के शेल्‍डन सेक्रेड हार्ट चर्च को सद्दाम ने यह दान दिया था. इस चर्च के पादरी रहे जैकब यासो ने सीबीएस न्‍यूज को बताया था, ‘वह बहुत ही दयालु इंसान थे और उनका दिल बहुत बड़ा था. वह हमेशा पश्चिमी देशों के साथ सहयोग करते थे.’

इराक की आर्थिक तरक्‍की

बतौर राष्‍ट्रपति सद्दाम ने जिस तरह से देश की अर्थव्‍यवस्‍था को संभाला, उसके लिए आज तक उन्‍हें सराहा जाता है. द इकोनॉमिस्‍ट ने लिखा था, ‘सन् 1970 के दौरान जब उन्‍होंने एक कमजोर राष्‍ट्रपति से देश का नियंत्रण अपने हाथों में लिया तो कई दर्जन प्रोजेक्‍ट्स की वजह से देश में प्रथम श्रेणी का इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर देखने को मिला, एक्‍सप्रेसवे बने, पावर लाइंस आईं और सामाजिक सेवाओं में इजाफा हुआ. पड़ोसी देशों में तेल के शोर ने उपभोग को बढ़ाया और कई अरबपतियों को जन्‍म दिया. इराकी इस बात का दावा आसानी से कर सकते थे कि उनकी राष्‍ट्रीय संपत्ति का सही प्रयोग हुआ न कि इसकी वजह से फासला बढ़ा, घर में भी इराक के मिडिल क्‍लास को फायदा हो रहा था.’ इकोनॉमिस्‍ट के मुताबिक सद्दाम हुसैन की वजह से मध्‍य पूर्व के लोग बिजनेस सेमिनार में बैठकर लोगों को सुनने के आदी हो गए थे.

अनिवार्य शिक्षा

जब सद्दाम हुसैन ने देश की सत्‍ता संभाली तो उन्‍होंने देश में शिक्षा को अनिवार्य कर दिया था. ह्यूमन राइट्स वॉच की तरफ से कहा गया था, ‘सरकार की तरफ से अनिवार्य शिक्षा कानून को पास किया गया जिसमें स्‍त्री और पुरुष दोनों के लिए स्‍कूल जाकर प्राइ‍मरी शिक्षा हासिल करना जरूरी कर दिया गया था. हालांकि मिडिल और उच्‍च वर्ग की महिलाएं सन् 1920 से ही यूनिवर्सिटीज जा रही थीं, गांवों की महिलाओं और लड़कियों को अशिक्षित ही रखा गया था.’

इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर

इराक में सद्दाम के शासन काल में इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर में हुई तरक्‍की को काफी सराहा गया. न्‍यू इंटरनेशनिल्‍स्‍ट ने कहा है, ‘स्‍कूल, सड़कें, सार्वजनिक गृह योजना और मिडिल ईस्‍ट में सर्वश्रेष्‍ठ स्‍वास्‍थ्‍य तंत्र. साधारण इराकियों की जिंदगी में असली सुधार उस काल में ही हुआ और बहुत कम समय के लिए रहा और यह सब सद्दाम के समर्थन से ही हो सका था.’

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