इस्लाम के इतिहास में सबसे चर्चित नामों में से एक नाम खालिद बिन वलीद रज़ि अल्लाहू अन्हु का है इनका लक़ब अल्लाह के रसूल ने सैफुल्लाह दिया जिसके माने अल्लाह की तलवार होता है, इनके नाम के साथ एक ऐसा कारनामा जुड़ा है जो रहती दुनिये तक याद रखा जाएगा उन्होंने अपनी पूरी ज़िंदगी में कोई जंग नही हारी मुसलमानों को गज़वा उहद में जीती हुई जंग जो फिसल गई उसमे भी इनका ही नाम आता है ।

आज उनके इंतेक़ाल की एक वाकिया आपके सामने पेश करते हैं जब हज़रत खालिद बिन वलीद रज़ि अल्लाहू अन्हु के इंतेक़ाल की खबर मदीना मुनव्वरा पहुँची तो हर घर मे कोहराम मच गया हज़रत उमर रज़ि अल्लाहू अन्हु भी बहुत रंजीदा हुए और अहले मदीना को सोग मानने की इजाज़त दे दी जब हज़रत खालिद बिन वलीद को क़बर में उतारा जा रहा था लोगों ने देखा आपका घोड़ा अश्कर जिसकी पीठ पर बैठ कर आपने तमाम जंग लड़े थे वो भी आंसू बहा रहा था ।

हज़रत खालिद बिन वलीद ने तरके में सिर्फ तलवार खंजर और नेज़े छोड़े थे इन हथियारों के अलावा उनका एक गुलाम था जो हमेशा उनके साथ रहा था अल्लाह की ये तलवार जिसने दो उस वक़्त की बड़ी सल्तनत थी ( रूम और फारस ) के चिराग बुझाए उनके वफात के वक़्त उनके पास कुछ भी नही था आप ने जो भी कमाया था सब अल्लाह के रास्ते मे खर्च कर दिया और पूरी ज़िंदगी मैदान जंग में गुज़ार दी ।

हज़राते साहाबा फरमाते हैं उनकी मौजूदगी में हम ने सीरिया और इराक में कोई ऐसा जुमा नही पढ़ा जिस से पहले हम एक शहर फतह कर चुके हों मतलब इन दो जुमों के बीच दिनों में एक शहर ज़रूर फतह होता था इनकी इन जैसे साहाबा कराम की क़ुरबानीयों की वजह से आज पूरी दुनिया में इस्लाम का परचम लहरा रहा है ।

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