केरल के कोझिकोड (Kerala Kozhikode) जिले में रविवार को 12 वर्षीय बच्चे की निपाह वायरस (Nipah Virus) संक्रमण के कारण मौत के बाद हड़कंप मच गया। CNN न्यूज 18 के मुताबिक, बच्चे की निपाह वायरस के चलते मौत होने के बाद आठ लोगों और रामबूटन फल (Rambutan Fruits) का सैंपल नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वॉयरोलॉजी पुणे (NIV Pune) जांच के लिए भेजा गया है।

केरल में निपाह संक्रमण के मामले की पुष्टि होते ही केंद्र सरकार के नेशनल सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल (एनसीडीसी) की एक टीम राज्य के स्वास्थ्य विभाग को तकनीकी सहयोग मुहैया कराने के लिए फौरन रवाना कर दी।

केरल भेजी गई केंद्रीय टीम ने वायरस से मरने वाले बच्चे के घर का दौरा किया। टीम ने पास के क्षेत्र से रामबूटन फलों के सैंपल भी लिए, क्योंकि परिवार को संदेह था कि इसी फल को खाने के बाद लड़का निपाह वायरस से संक्रमित हो गया था।

राज्य सरकार ने 251 लोगों को बच्चे के प्राइमरी कॉन्टैक्ट के तौर पर चिह्नित किया है और इन लोगों पर नजर रखी जा रही है। बच्चे के निपाह वायरस से संक्रमित पाए जाने के बाद छठमंगलम पंचायत और पास के इलाके को पूरी तरह कंटेनमेंट जोन बना दिया गया है। इसी इलाके में पीड़ित युवक वायरस से संक्रमित पाया गया था। पीड़ित परिवार के घर के तीन किलोमीटर के दायरे को कंटेनमेंट जोन घोषित कर दिया गया है।

क्या है रामबूटन फल?

पीड़ित परिवार ने दावा किया कि बच्‍चे ने रामबूटान फल खाया और उसी के बाद उसकी तबीयत खराब हुई। 27 अगस्त को कोझिकोड में बच्चे के निपाह वायरस से पीड़ित होने का पता चला था। उसे सबसे पहले एक स्थानीय क्लिनिक में भर्ती कराया गया था। बाद में उसे एक प्राइवेट अस्पताल ले जाया गया, जहां से उसे मेडिकल कॉलेज अस्पताल लाया गया। बाद में उसे एक प्राइवेट अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां रविवार को उसकी मौत हो गई।

रामबूटन फल आमतौर पर भारत में उतना चर्चित नहीं है, लेकिन दक्षिण एशियाई देशों में ये खूब पाया जाता है। लीची जैसा दिखने वाला यह फल भारत में मुख्‍यत: दक्षिणी राज्‍यों में पाया जाता है। इसे रामबूटन या रामबुतान फल कहा जाता है। ऐसा माना जा रहा है कि इस फल को चमगादड़ ने जूठा किया हो, क्योंकि जब पिछली बार केरल में निपाह फैला था तब भी ये फल और चमगादड़ दोनों चर्चा में आए थे।

मई, 2018 में केरल में सबसे पहले निपाह वायरस संक्रमण की पुष्टि हुई थी। उस दौरान इसकी वजह से 17 लोगों की जान चली गई थी। यह फल स्‍वादिष्‍ट होने के साथ-साथ बेहद पौष्टिक भी होता है। खट्टे-मीठे स्‍वाद वाला रामबूटन फल विटामिन-सी से भरपूर होता है। रामबूटन के 100 ग्राम में करीब 84 कैलोरी होती है और फैट बस 0.1 ग्राम होता है।

रिपोर्ट के मुताबिक, रोजाना 5 से 6 रामबूटान फल खाने से शरीर की विटामिन सी की डेली जरूरत का आधा हिस्‍सा पूरा किया जा सकता है। इसमें कॉपर, मैंगनीज, फॉस्‍फोरस, मैग्‍नीशियम, आयर्न और जिंक पाया जाता है। ये फल लाल रंग के बालों सी कवच वाला होता है, जिसके अंदर लीची जैसा मीठा गुदेदार फल होता है। कहा जाता है कि इस फल के पेड़ पर अक्सर चमगादड़ अपना बसेरा बना लेते हैं।

स्वास्थ्य मंत्री वीना जॉर्ज ने आगे कहा कि दक्षिण भारत में पहला निपाह वायरस रोग (NiV) केरल के कोझीकोड जिले में 19 मई 2018 को दर्ज किया गया था। राज्य में 1 जून 2018 तक 17 मरीजों की मौत हुई थी और 18 मामलों की पुष्टि हुई थी। 

जानिए क्या है निपाह वायरस

जानकारों का कहना है कि जानकारों का कहना है कि निपाह एक जूनोटिक (zoonotic) वायरस है और यह जानवरों से इंसानों में फैल सकता है। इसके साथ ही यह एक इंसान से दूसरे इंसान में भी फैलता है। पहली बार यह मलेशिया में सुअर का पालन करने वाले किसानों के बीच पहचाना गया था। यह रोग पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी में साल 2001 में सामने आया और फिर साल 2007 में सामने आया था। यह वायरस ज्यादातर एक क्षेत्र तक सीमित था। इसके संपर्क में जो भी आते हैं उन पर इस वायरस का संक्रमण फैलता है। 

निपाह के लक्षण

WHO के नोट के मुताबिक, इस वायरस से संक्रमित लोगों में शुरू में बुखार, सिरदर्द, उल्टी, गले में खराश जैसी शिकायत होती है । उसके बाद कमजोरी आना, चक्कर आना, नींद आना जैसे तमाम न्यूरोलॉजी संक्रमण आते है। ये रोगियों में encephalitis जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। कुछ लोगों में निमोनिया की शिकायत आती है और सांस लेने में दिक्कत आती है। ये लक्षण सामने आने के बाद रोगी 24- 48 घंटे में कोमा में भी जा सकते है।

निपाह वायरस का incubation period (इन्फेक्शन लगने और लक्षण के उभरने के बीच का समय) 4 से 14 दिन के बीच होता है। Who ने कहा कि कुछ मामलों में इसके संक्रमण के 45 दिन बाद सामने आए हैं।   

क्या इसकी दवा या वैक्सीन है

WHO के मुताबिक, अभी तक निपाह वायरस के लिए कोई भी खास दवा या वैक्सीन नहीं बनाई गई है। इसके चलते उत्पन्न होने वाले सांस परेशानियों और न्यूरोलॉजिकल दिक्कतों से निपनटे के लिए इंटेसिव सपोर्टिव केयर की (ICU) की जरूरत होती है। 

कैसे बचें

WHO ने सलाह दी है कि अगर किसी इलाके में निपाह का आउटब्रेक संभावित है तो जानवरों के रहने वाले एरिया को तत्काल को अलग कर देना चाहिए। संक्रमित जानवरों का मारना चाहिए और मारे गए जानवरों को सावधानी के साथ जला देना चाहिए या गहरे दफना देना चाहिए। संक्रमित स्थलों पर दूसरे जानवरों की आवाजही बंद कर देनी चाहिए। 

National Centre for Disease Control  ने कहा है कि जो लोग निपाह के संक्रमित जानवरों या इंसानों के बीच आए हों उनको साबुन और पानी से अच्छी तरह से हाथ धोना चाहिए। अधखाए फलों को खाने से बचें। सिर्फ धुले हुए फल खाएं।

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