एआईएमआईएम चीफ (AIMIM Chief) असदुद्दीन ओवैसी (Asaduddin Owaisi) की कार पर हुई फायरिंग का मामला दोनों आरोपियों की ​गिरफ्तारी के बाद भी शांत नहीं हुआ है. इस हमले ने उत्तर प्रदेश समेत 5 राज्यों में होने वाले चुनावों (UP Assembly Elections) से पहले राजनीति में हंगामा खड़ा कर दिया है. गृह मंत्रालय की ओर से दी जा रही Z सिक्योरिटी लेने से इनकार करने के बाद असदुद्दीन ओवैसी ने कहा है कि वह केंद्र सरकार से दिल्‍ली में अपने खर्च पर बुलेट प्रूफ गाड़ी रखने की इजाजत मांगेंगे. इसके साथ ही उन्‍होंने कहा कि वह अपने साथ अब खास किस्‍म का ग्लॉक हथियार (Glock Weapon) भी रखना चाहते हैं. इसके लिए वे गृह मंत्रालय को पत्र लिखेंगे.

जेड सिक्योरिटी लेने से इंकार करने के सवाल पर एआईएमआईएम चीफ ओवैसी का कहना है कि जब हमारे चारों ओर लोग हथियार लेकर चलते हैं तो हम घुटन महसूस करते हैं. उन्‍होंने कहा कि मैं गृह मंत्रालय को एक पत्र लिखने जा रहा हूं कि मुझे अपने खर्च पर एक बुलेट प्रूफ गाड़ी रखने की इजाजत दी जाए और साथ ही ग्लॉक हथियार रखने की भी इजाजत दी जाए.

ये ग्लॉक हथियार होते क्या हैं, ये कहां बनते हैं, इसकी खासियतें क्या हैं… इसकी चर्चा के साथ ही लोगों के मन में ऐसे कई सवाल हैं. आइए इस बारे में विस्तार से जानते हैं.

क्या होते हैं ग्लॉक हथियार?

ऑस्ट्रिया की एक हथियार निर्माता कंपनी है- ग्लॉक (Glock). यही कंपनी ग्लॉक हथियार (Glock Weapon) बनाती है. कंपनी वर्तमान में भारत, अमेरिका, इंग्लैंड और फ्रांस सहित 70 से अधिक देशों में सेना, पुलिस और विशेष बलों के लिए ग्लॉक हथियार बनाती है. कंपनी आम नागरिकों को भी हथियार उपलब्ध कराती है, लेकिन इसके लिए लाइसेंस जरूरी होता है. ग्लॉक पिस्टल (Pistol)के कई वेरिएंट पूरी दुनिया में फेमस हैं.

कंपनी की वेबसाइट पर हर तरह के ग्लॉक हथियारों के बारे में जानकारी दी गई है. ये हथियार दिखने में बहुत अलग तरह के नहीं होते, लेकिन कई मायनों में खास होते हैं. इसे अन्य हथियारों की तरह तैयार नहीं किया जाता, बल्कि इसे तैयार करने में पॉलीमर का इस्तेमाल किया जाता है. यही वजह है कि यह वजन में काफी हल्का होता है.

दुनिया के सबसे फेमस पिस्टल्स (Pistols) की बात करें तो ग्‍लॉक 17 पिस्टल बहुत ही खास होता है. इस छोटे से हथियार में इतने फंक्शन होते हैं कि पुलिस हो या फौजी या फिर कोई खास.. हर कोई इसे अपने पास रखना चाहता है. अब सांसद असदुद्दीन ओवैसी को ही देख लीजिए, वे भी तो ग्लॉक हथियार ही पास रखना चाहते हैं न!

कहानी शुरू होती है सेकेंड वर्ल्ड वॉर के बाद

दूसरा विश्व युद्ध ख़त्म हो चुका था. इस युद्ध के बाद हर देश को एहसास हुआ कि वे कई मायनों में पीछे चल रहे हैं और उन्हें जल्द अपने हथियारों को अपग्रेड करना होगा. ऐसा इसलिए क्योंकि जंग के दौरान बहुत सारे देशों के बड़े से बड़े हथियार बेकार पड़ गए थे. ऑस्ट्रिया की सेना के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ था. ऑस्ट्रिया भी एक बढ़िया पिस्टल की खोज में था.

इसी बीच गैस्टन ग्‍लॉक (Gaston Glock) नाम के ऑस्ट्रियाई इंजीनियर को सेना के लिए एक अच्छी पिस्टल बनाने का खयाल आया. गैस्टन ग्‍लॉक वैसे तो हथियार नहीं बनाते थे, लेकिन वे हथियारों का बिजनेस शुरू करना चाहते थे. पहले उनकी कंपनी सेना के लिए चाकू और बुलेट्स रखने वाली बेल्ट वगैरह बनाती थी. वे पिस्टल बनाने के साथ इसके बिजनेस में उतरना चाहते थे.

पॉलीमर का ज्ञान बहुत काम आया

ग्लॉक ने कुछ हथियारों के एक्सपर्ट्स को इकट्ठा किया और उनसे कहा कि वे एक ऐसी पिस्टल बनाना चाहते हैं, जो हर जगह इस्तेमाल की जा सके. चूंकि उन्हें पॉलीमर पर बहुत ज्यादा नॉलेज थी, सो उन्होंने तय कर रखा था कि वह पॉलीमर से ही अपनी बंदूक बनाएंगे. उनका यह फैसला आगे चलकर निर्णायक साबित हुआ. वर्ष था 1979, जब महज तीन महीनों के अंदर ही उनकी टीम ने 9mm वाली ग्‍लॉक पिस्टल बनाकर तैयार भी कर दी. इसके बाद इसकी टेस्टिंग की गई तो खुशी का ठिकाना नहीं था. टीम को अंदाजा नहीं था कि उन्होंने कितनी शानदार पिस्टल बना दी है. कुछ ही महीनों में ग्‍लॉक 17 पिस्टल सबकी पसंद बन गया.

ग्लॉक पिस्टल की खासियतें

जब गैस्टन ग्लॉक ने अपनी पिस्टल ऑस्ट्रिया की सेना को दी, तो वह हैरान थे. इससे पहले इनती शानदार पिस्टल उन्होंने देखी ही नहीं थी. यह अन्य पिस्टल की तरह नहीं था. इसमें फीचर्स भी आम पिस्टल जैसे ​नहीं थे. न ही इसमें एक्सटर्नल सेफ्टी थी.

इसकी खासियत थी कि इसकी एक मैगजीन में 17 गोलियां आती थी और यह एक सेमी-ऑटोमेटिक पिस्टल थी. पॉलीमर से बनने के कारण इस बंदूक को सबसे ज्यादा फायदा हुआ. इसके बाद इसके जैसी हलकी, आसानी से पकड़ी जाने वाली और गर्म से गर्म वातावरण को सहने वाली पिस्टल कोई थी ही नहीं. यह नहीं इस बंदूक का निशाना भी अचूक था. इससे चलाई गोली सीधा अपने निशाने पर जाकर लगती थी.

अब तो कंपनी कई तरह के हथियार बनाने लगी है. समय के साथ इसमें बहुत से बदलाव भी आए. अब इसमें लेजर, स्कोप, फ्लैशलाइट जैसी कई चीजें लगाईं जाती हैं. यह खराब नहीं होता. इतना मजबूत है कि हेलिकॉप्टर से गिराने के बाद भी कुछ नहीं होता. 1980 के दशक से लेकर आज तक ग्लॉक की पहचान और विश्वास कायम है. आज दुनियाभर के देशों में इसे बेझिझक इस्तेमाल किया जा रहा है. इसने पूरी दुनिया को दिखाया है कि क्यों यह सबकी पसंद बन चुका है.

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