लखनऊ. शिया वक्फ बोर्ड (Shia Waqf Board) के पूर्व चेयरमैन और हाल के ही दिनों में मुस्लिम धर्म से सनातन धर्म में अपना धर्म परिवर्तन करवाने वाले वसीम रिजवी उर्फ जितेंद्र नारायण सिंह त्यागी की हयाती कब्र को भी रद्द कर दिया गया है. शिया मुसलमानों में अपने जिंदा रहते हुए अपने लिए कब्र खरीदने की एक रवायत रही है. यानि कि शिया मुसलमान अपने जिंदा रहते ही अपनी जगह चुन कर कब्र को खरीद सकता है ताकि मरने के बाद उसे उसी कब्र में बिना किसी परेशानी के दफन कर दिया जाए.

शिया समुदाय की ऐसी ही परंपरा के चलते वसीम रिजवी ने जिंदा रहते हुए अपने लिए एक कब्र की बुकिंग की थी. इसके बाद उसे पक्का बनावा दिया गया था ताकि उस पर कोई दूसरा दफन न हो. आपको बता दें वसीम रिजवी उर्फ जितेंद्र नारायण सिंह त्यागी ने 10 जनवरी 2018 को अपने लिए हयाती कब्र खरीदी थी. इसके एवज में उन्होंने संबंधित कर्बला के मुतवल्ली को रकम भी चुकाई थी. इसके पीछे उन्होंने अपनी जान को मिल रही धमकियों को वजह बताया था.

धर्म परिवर्तन करने के बाद और वसीम रिजवी की वसीयत के मुताबिक उन्हें उनका अंतिम संस्कार हिंदू धर्म के रीति-रिवाजों के मुताबिक किए जाने की बात कही गई थी. इस वजह से कर्बला तालकटोरा के मुतावल्ली ने कर्बला तालकटोरा में स्थित उनकी कब्र के आवंटन को रद्द कर दिया है.

कर्बला तालकटोरा के मुतवल्ली फैजी ने वसीम रिजवी की कब्र के आवंटन को रद्द करने के साथ ही यह भी कहा कि वह उनकी रकम के चेक को उनके परिवार के सदस्यों को सौंप देंगे. उन्होंने कहा कि वसीम रिजवी की हरकतों की वजह से ही मुस्लिम समुदाय का नाम खराब हो रहा है.

फैजी ने कहा कि जब वसीम रिजवी अपने धर्म का परिवर्तन कर चुके हैं तो कर्बला तालकटोरा में उनकी कब्र रह जाने का कोई मामला नहीं बनता. इसी को लेकर उनके आवंटन को रद्द किया जा रहा है.

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