कटिहार में बाढ़ (Katihar Flood ) से हालात लगातार बिगड़ रहे हैं. अहमदाबाद प्रखंड के भवानीपुर खट्टी पंचायत के बबला बन्ना गांव का एक मस्जिद(Katihar Masjid Video) शुक्रवार को गंगा नदी के कटाव का भेट चढ़ गया. इससे बबला बन्ना गांव में कटाव की जद में आये परिवारों के बीच हड़कंप की स्थिति उत्पन्न हो गयी है. लोग घर बार छोड़कर सुरक्षित स्थान की ओर पलायन कर रहे हैं.

यहां के युसूफ टोला गांव के समीप भी भीषण कटाव जारी है. ज्ञात हो कि अमदाबाद प्रखंड के गंगा व महानंदा नदी से प्रत्येक वर्ष भीषण कटाव होती है. इसके चपेट में आकर दर्जनों परिवार विस्थापित हो जाते हैं. वर्तमान समय में गंगा नदी से पार दियारा पंचायत के युसूफ टोला गांव के समीप भीषण कटाव हो रहा है. जिसके चपेट में आकर एक दर्जन परिवार विस्थापित हो चुके हैं. इस गांव के मस्जिद भी कटकर गंगा नदी के गर्भ में समा गयी है.

उधर बबला बन्ना गांव में भीषण कटाव जारी है. कटाव के चपेट में आकर करीब एक दर्जन परिवार विस्थापित हो गये हैं. बबला बन्ना गांव का एक मस्जिद गंगा नदी में कटाव से शुक्रवार को समा गया. स्थानीय ग्रामीणों की माने तो विभाग द्वारा फ्लड फाइटिंग के तहत कटाव निरोधी कार्य के नाम पर बांस पाइलिंग कर खानापूर्ति की जा रही है. कटाव के सामने बांस पाइलिंग नहीं टीक पा रहा है. जिस वजह से स्थानीय ग्रामीणों में काफी आक्रोश है. गंगा नदी के जल स्तर में वृद्धि भी जारी है. जिस वजह से बाढ़ का स्थिति उत्पन्न हो गयी है.

बाढ़ व कटाव कटिहार जिले की एक मुख्य समस्या है. यूं तो जिला बाढ़ की विभीषिका झेलने के लिए हर वर्ष अभिशप्त है. वर्ष 2016 भी जिले का 11 प्रखंड बाढ़ से प्रभावित हुआ था. जबकि वर्ष 2017 में जिले के 15 प्रखंड बाढ़ से प्रभावित हुआ है. पिछले कुछ वर्षों में बाढ़ व कटाव ने भारी तबाही मचायी है. बाढ़ व कटाव की वजह से जानमाल को व्यापक नुकसान हुआ है. वर्ष 2017 की बाढ़ में 85 लोगों की जान चली गयी. जबकि 20 लाख से अधिक की आबादी बाढ़ से प्रभावित हुआ था.

स्थानीय लोगों की मानें तो बाढ़ का मुख्य कारण तटबंध ही है. बाढ़ नदी के तटबंध टूटने की वजह से आती रही है. प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार 2017 में महानंदा तटबंध सात स्थानों पर टूटा है. जिसकी वजह से बाढ़ का पानी कटिहार जिले के अधिकांश क्षेत्रों को प्रभावित किया है. दूसरी तरफ बाढ़ के साथ-साथ कटाव की वजह से ही बड़ी आबादी विस्थापित होते रहे है. हर वर्ष विस्थापित को पुनर्वास करने के लिए संघर्ष होता रहा है. लोग आवाज भी उठाते रहे. पर विस्थापन की समस्या जस की तस बनी हुई है.

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