यूपी: सिया धर्मगुरु मौलाना कल्बे जवाद ने उमर-जहांगीर की गिरफ्तारी को लेकर यूपी ATS पर उठाए सवाल

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लखनऊ. उत्तर प्रदेश में इस समय धर्मांतरण का मुद्दा जोरों पर है. यूपी एटीएस (UP ATS) द्वारा मुफ्ती काजी जहांगीर कासमी और उमर गौतम की गिरफ्तारी के बाद पूरे यूपी में धर्मांतरण की कड़ियां जुड़ रही हैं. जबकि उत्तर प्रदेश ही नहीं अब कई राज्यों में धर्मांतरण का बड़ा रैकेट सामने आ रहा है. एटीएस के मुताबिक, गिरफ्तार किए गए उमर गौतम और जहांगीर ने एक हजार से ज्यादा लोगों का धर्मांतरण कराया है. वहीं, इस मामले पर शिया धर्मगुरु मौलाना कल्बे जवाद (Shia cleric Maulana Kalbe Jawad) ने बड़ा बयान दिया है.

धर्मांतरण मसले पर बोलते हुए मौलाना कल्बे जवाद ने यूपी एटीएस की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं. मौलाना कल्बे जवाद ने न्यूज़ 18 से बातचीत में कहा कि यूपी एटीएस की गिरफ्तारी कई बार सही नहीं होती है और इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए. इसके साथ उन्‍होंने कहा कि किसी भी निर्दोष को सजा नहीं मिलनी चाहिए.

इसके अलावा मौलाना कल्बे जवाद ने कहा कि जिन लोगों का धर्मांतरण हुआ है, उन लोगों का बयान दर्ज होना चाहिए. क्‍या वाकई में उनको जोर जबरदस्ती से इस्लाम में शामिल कराया गया या स्वेच्‍छा से उन्होंने अपना धर्म परिवर्तित किया. इसके अलावा उन्होंने कहा कि अगर कोई व्यक्ति स्वेच्छा से अपना रिलीजन कन्वर्ट कराता है, तो भारतीय संविधान में उसको दोषी नहीं बनाया जा सकता, क्‍योंकि भारतीय संविधान में हर धर्म को अपने धर्म को बढ़ावा देने का अधिकार है. फिर चाहे वह हिंदू धर्म हो, मुस्लिम धर्म हो या फिर क्रिश्चियनिटी, किसी भी धर्म में अपने धर्म के प्रचार प्रसार की पूरी आजादी है. वहीं, उन्‍होंने दावा किया कि इस्लाम में तो जबरदस्ती धर्म परिवर्तन कराया ही नहीं जा सकता. और तो और अगर किसी व्यक्ति का जबरदस्ती धर्म परिवर्तन कराया जाता है, तो उस व्यक्ति को इस्लाम में शामिल नहीं माना जाता है.

विदेशी फंडिंग को लेकर कही ये बात
विदेशों से धर्म परिवर्तन के लिए हो रही फंडिंग पर भी मौलाना कल्बे जवाद ने कहा कि यह तो हमारी एजेंसियों की बड़ी चूक है. अगर एजेंसियां इस बात को कहती हैं कि विदेशों से फंडिंग हो रही थी और इसी से ही धर्म परिवर्तन कराया जा रहा था, तो वह इस बात को साबित करें. उन्हें यह बताना चाहिए कि किन देशों से पैसा आ रहा था और आखिरकार कितने समय तक कैसे पैसा आता रहा और जांच एजेंसियों को इसकी भनक तक नहीं लगी. यह तो सुरक्षा के लिहाज से एक बड़ा एक बड़ी चूक है.

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