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Sunday, April 14, 2024

उत्तरप्रदेश: बुलंदशहर ‘हिंसा’ के लिए ‘योगी सरकार’ ने दी 36 बजरंग दल कार्यकर्ताओं पर ‘देशद्रोह’ का मामला चलाने की अनुमति

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कभी आपने न तो  सुना होगा न ही पढ़ा होगा कि किसी राज्य में भाजपा सरकार हो और बजरंगदल के सदस्यों पर हिंसा मामले में राष्ट्रद्रोह का मुकदमा चलने की अनुमति भाजपा सरकार ने दी हो, लेकिन बुलंदशहर के स्याना हिंसा मामले में 36 आरोपियों के खिलाफ अब राष्ट्रद्रोह का मुकदमा चलेगा। एडीजे कोर्ट ने राष्ट्रद्रोह के तहत मुकदमा चलाने का आदेश दे दिया है। इसमें बजरंग दल के नेता जिला पंचायत सदस्य योगेश राज का नाम भी शामिल है। राष्ट्रद्रोह का मुकदमा चलाने की अनुमत्ति स्याना पुलिस ने शासन से मांगी थी और शासन से राष्ट्रद्रोह की अनुमति मिल गयी है। इनमें से पांच आरोपियों पर इंस्पेक्टर सुबोध कुमार की हत्या का भी मामला विचाराधीन है।

एडीजे कोर्ट ने मुकदमा चलाने का आदेश दे दिया है। हाल ही में बवाल के मुख्य आरोपी और बजरंग दल के नेता जिला पंचायत सदस्य ने उच्चतम न्यायालय  के आदेश के बाद कोर्ट में सरेंडर किया था। बुलंदशहर के स्याना में 3 दिसंबर 2018 को गोकशी के बाद हिंसा और बवाल हुआ था। तत्कालीन स्याना कोतवाली इंस्पेक्टर सुबोध कुमार की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। पुलिस ने इस मामले में 44 लोगों को जेल भेजा था, जबकि 60 अज्ञात के खिलाफ भी मुकदमा दर्ज कराया गया था।

इलाहाबाद  हाईकोर्ट से जिला पंचायत सदस्य बजरंग दल के नेता योगेश राज सहित कई आरोपियों की जमानत भी हो गई थी। जिसके बाद योगेश राज ने जिला पंचायत सदस्य का चुनाव लड़ा और जीत गया। शहीद इंस्पेक्टर सुबोध कुमार की पत्नी ने उच्चतम न्यायालय  में याचिका डाली और योगेश राज पर कार्यवाही की मांग की। उच्चतम न्यायालय  के आदेश के बाद कोर्ट ने 7 दिन के अंदर योगेश राज को सरेंडर करने के निर्देश दिए थे। कोर्ट के आदेश पर योगेश राज ने कोर्ट में सरेंडर किया था।

सुप्रीम कोर्ट से जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस एम एम सुंदरेश की पीठ ने आदेश में कहा था मामला काफी गंभीर है । जहां गोहत्या के बहाने एक पुलिस अधिकारी की पीट-पीट कर हत्या कर दी गई है । प्रथम दृष्टया यह उन लोगों का मामला है जो कानून अपने हाथ में ले रहे हैं । गौरतलब है कि बुलंदशहर में दिसंबर 2018 को कथित गोकशी को लेकर भड़की हिंसा में इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह की हत्या कर दी गई थी । बुलंदशहर के स्याना में इंस्पेक्टर सुबोध सिंह की हत्या के मुख्य आरोपी योगेश राज और तीन अन्य को इलाहाबाद हाईकोर्ट से जमानत मिल गई थी । आरोपियों पर 124 ए राजद्रोह के तहत मामला दर्ज किया गया था। आरोपी बजरंग दल से भी जुड़ा बताया गया ।

इस मामले में एडीजे कोर्ट ने आरोपियों पर राष्ट्रद्रोह की धारा बढ़ाने के आदेश दिए हैं। इनके खिलाफ पहले ही बवाल, हत्या, आगजनी की धाराओं में मुकदमा चल रहा है। राष्ट्रद्रोह का मुकदमा चलाने की अनुमत्ति स्याना पुलिस ने शासन से मांगी थी।शासन से राष्ट्रद्रोह की अनुमति मिल गई, लेकिन न्यायालय के समक्ष याचिका दायर नहीं हो सकी थी। बीते दिनों विशेष लोक अभियोजक यशपाल सिंह राघव द्वारा अपर सत्र न्यायाधीश विनीता सिंघल के समक्ष याचिका दायर कर स्याना हिंसा के आरोपियों के खिलाफ राष्ट्रद्रोह में भी मुकदमा चलाने की अनुमति मांगी गई। मंगलवार को न्यायाधीश विनीता सिंघल द्वारा 36 आरोपियों के खिलाफ राष्ट्रद्रोह का मुकदमा चलाने की अनुमति प्रदान कर दी है। विशेष लोक अभियोजक यशपाल सिंह राघव ने बताया कि 36 आरोपियों ने भीड़ के साथ मिलकर कानून व्यवस्था की स्थिति बिगाड़ी थी और हिंसा के लिए प्रोत्साहित किया था। 36 आरोपियों पर धारा 124 ए के तहत मुकदमा चलेगा।

आरोपियों में प्रशांत नट, राहुल, डेविड, लोकेंद्र, जोनी, योगेशराज, चमन, देवेंद्र, आशीष चौहान, चंद्रपाल सिंह उर्फ चंदर, कुलदीप, रोहित, जितेंद्र उर्फ लाला गुर्जर, सोनू, जितेंद्र उर्फ जीतू उर्फ फौजी, नितिन, मोहित, रमेश जोगी, विशाल त्यागी, हेमू उर्फ हेमराज, अंकुर, अमित उर्फ अंटी, आशीष कुमार पुत्र अशोक कुमार, हरेंद्र, टिंकू उर्फ भूपेश, गुड्डू उर्फ मुकेश, सचिन उर्फ कोबरा, सतेंद्र राजपूत, सतीश, विनीत, राजीव कुमार उर्फ कलवा, सचिन पुत्र वीरेंद्र सिंह, पवन कुमार, शिखर अग्रवाल उर्फ शेखर अग्रवाल, उपेंद्र राघव एवं सौरभ का नाम शामिल है।

दरअसल 3 दिसंबर 2018 को स्याना क्षेत्र के गांव महाव के जंगल में गोकशी की घटना के बाद लोगों का आक्रोश फूट  था। गुस्साएं लोगों ने जाम लगाकर जमकर हंगामा किया। पुलिस से भिड़ंत के दौरान स्याना कोतवाल सुबोध कुमार सिंह और गांव चिंगरावठी के युवक सुमित की गोली लगने से मौत हो गई। स्याना कोतवाली में 27 नामजद और 50-60 अज्ञात आरोपियों के खिलाफ हत्या, हिंसा समेत अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया गया था।स्याना हिंसा के मामले में एसआईटी जांच के बाद पुलिस द्वारा केस में दर्ज एफआईआर में 27 नामजदों और 60 अज्ञात आरोपियों में से कई हिंदूवादी नेताओं समेत 44 आरोपियों को जेल भेजा गया। गोकशी के मामले में 11 आरोपियों को पकड़कर जेल भेजा गया। पुलिस द्वारा 44 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई, जिनमें प्रशांत नट समेत पांच आरोपियों पर स्याना कोतवाल की हत्या करने की धारा लगाई गई हैं। वहीं गोकशी के सभी 11 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई। जेल से जमानत पर रिहा हुए तीन आरोपियों की मौत हो चुकी है। दो आरोपियों का मामला पॉक्सो न्यायालय एवं किशोर न्यायालय में विचाराधीन है।

सुबोध कुमार सिंह ग्रेटर नोएडा के दादरी में हुए अख़लाक हत्‍याकांड मामले में जाँच अधिकारी रह चुके थे। यूपी के तत्कालीन प्रमुख सचिव अरविंद कुमार ने कहा था कि सुबोध कुमार सिंह अख़लाक हत्‍याकांड मामले में 28 सितंबर 2015 से 9 नवंबर 2015 तक जाँच अधिकारी रहे थे। बाद में उनका तबादला बनारस कर दिया गया था। उस समय इस पर काफ़ी सवाल भी उठे थे। अखलाक की हत्या के समाय सुबोध नोएडा में जारचा पुलिस स्टेशन के प्रभारी थे। सुबोध की मौत ऐसे समय में हुई थी जब दादरी मामले में एक बार फिर जाँच शुरू होने वाली थी।

स्याना थाना के प्रभारी सुबोध कुमार सिंह 3 दिसंबर 18 को भीड़ के हाथों कत्ल कर दिए गए। ये सारा मामला कथित गोकशी की अफवाह पर शुरू हुआ।पुलिस की शुरुआती जांच के हिसाब से जो गाय के टुकड़े उस दिन महाव गांव में मिले, वो ताज़ा कटी गाय के नहीं थे, पुराने थे। 3 दिसंबर, 2018 की सुबह तकरीबन 10 बजे का वक्त होगा। बुलंदशहर में एक स्याना नाम का गांव है। यहां थोड़ा जंगल वाला इलाका है। यहीं पर वो दो गांव- महुआ और चिंगरावटी हैं, जहां के लोगों को जंगल में जानवरों का कंकाल दिखा। लोगों को शक हुआ कि शायद गाय मारी गई है। उन्होंने स्याना पुलिस चौकी को खबर की। पुलिस महाब गांव पहुंची। वहां 50-60 से ज्यादा की भीड़ जमा थी। लोग नाराज हो रहे थे। कह रहे थे कि पुलिस कुछ करती नहीं है। पुलिस ने उन्हें आश्वासन दिया कि मामले की जांच की जाएगी।मगर गांववाले चाहते थे कि एकदम मौके पर फैसला हो जाए।वो पुलिस से उसी समय कार्रवाई करने को कह रहे थे। इसी बात को लेकर गांववालों की पुलिस टीम से बाताबाती हो गई। इसके कुछ देर बाद, दोपहर तकरीबन डेढ़ बजे एक भीड़ चिंगरावठी पुलिस चौकी पहुंची। जानवरों के जो हिस्से जंगल में मिले थे, लोग उन्हें ट्रैक्टर पर लादकर चौकी के सामने पहुंचे थे।उन्होंने चौकी का घेराव किया।

स्याना के थाना प्रभारी सुबोध कुमार सिंह अपने साथ कुछ पुलिसवालों को लेकर वहां पहुंचे।उन्होंने ग्रामीणों को कार्रवाई का आश्वासन देते हुए इस मामले में एफ़आईआर  भी दर्ज कर ली।लेकिन  भीड़ वहां से नहीं हटी।लोगों ने चौकी के सामने की सड़क को ब्लॉक कर दिया। ये हाइवे बुलंदशहर की तरफ जाता है। पुलिस ने उन्हें समझा-बुझाकर वहां से हटाने की कोशिश की। मगर भीड़ अड़ी रही।बुलंदशहर में मुस्लिमों का एक तीन दिनों का कार्यक्रम ‘इज्तेमा’ हो रहा था। उसके खत्म होने के बाद उसमें शामिल हुए कई मुसलमान इस रास्ते से भी लौट रहे थे। पुलिसवालों को आशंका थी कि हो सकता है कि गुस्साई भीड़ मुस्लिमों से भिड़ जाए। ऐसा होता, तो सांप्रदायिक हिंसा हो सकती थी।

यही सोचकर पुलिसवालों ने बार-बार भीड़ को समझाकर वहां से हटाने की कोशिश की।. लाउडस्पीकर पर ऐलान करते रहे कि जानवरों के कंकाल मिलने के मामले में कार्रवाई की जाएगी। लेकिन भीड़ कुछ मानने को राजी ही नहीं थी। इसी बीच भीड़ के कुछ लोगों ने पुलिस पर पत्थर फेंकना शुरू कर दिया। पुलिस ने हवा में फायरिंग करके भीड़ को तितर-बितर करने की कोशिश की। इस पर भीड़ पहले से ज्यादा उग्र हो गई।भीड़ के पास लाठी-डंडा तो था ही, साथ में असलहा भी था।उन्होंने पुलिसवालों पर पत्थरबाजी शुरू कर दी। दनादन तमंचे दागे जाने लगे। वो लोग हिंसा की पूरी तैयारी करके आए थे। पुलिस की टीम ने पहले चौकी में घुसकर जान बचाने की कोशिश की। मगर भीड़ ने चौकी पर भी हमला कर दिया।भीड़ ने ‘मारो-मारो’ का शोर मचाते हुए चौकी में आग लगा दी।

पुलिस चौकी में आगजनी के बाद  पुलिस के लोग बाहर की तरफ भागे। भीड़ उनपर ईंट-पत्थर फेंक रही थी। भीड़ की चलाई गोली एसएचओ सुबोध कुमार सिंह को लग चुकी थी। वो घायल हो गए थे। जान बचाने के लिए वो पास के खेतों की तरफ भागे। भीड़ उन्हें खदेड़ रही थी। ये सब देखकर पुलिस के ड्राइवर राम आश्रय गाड़ी लेकर खेतों की तरफ गए।ताकि एसएचओ  को गाड़ी में बिठाकर अस्पताल ले जा सके। एसएचओ सुबोध बेहद जख्मी हालत में जमीन पर पड़े थे। राम आश्रय ने उन्हें गाड़ी में रखा।मगर ‘मारो-मारो’ का नारा लगाते हुए भीड़ ने उस गाड़ी पर भी हमला कर दिया।उन्होंने एसएचओ  को और पीटा। ठोस और धारदार चीजों से उन पर वार किया गया। गोली भी मारी। और इस तरह भीड़ ने सुबोध कुमार सिंह की जान ले ली।

वारदात के कुछ ही देर बाद इस घटना से जुड़ा एक वीडियो वायरल हो गया। वीडियो में एक टाटा सूमो गाड़ी है। इसमें ड्राइविंग सीट से नीचे लटक रहे हैं सुबोध कुमार सिंह। उनका धड़ सीट पर है। सिर नीचे जमीन पर टिका हुआ है। ये वीडियो भीड़ में शामिल लोगों ने ही बनाया।जब ये वीडियो बनाया गया, तब तक उनकी मौत हो चुकी थी।

इस घटना में सुबोध कुमार सिंह के अलावा एक और मौत हुई है। मरने वाले युवक का नाम है सुमित।वो घटना वाली जगह पर मौजूद था। दोनों तरफ से चली गोलियों में एक गोली उसे लग गई।पुलिस के मुताबिक, सुमित उस हत्यारी भीड़ का हिस्सा नहीं था। वो अपने एक दोस्त को छोड़ने उस इलाके में आया था। उसकी गलती बस इतनी ही थी कि वो गलत समय पर गलत जगह मौजूद था । इन दोनों मौतों के अलावा सुबोध कुमार सिंह के साथ गए पुलिसकर्मी भी घायल हुए थे ।

(जेपी सिंह वरिष्ठ पत्रकार हैं और आजकल इलाहाबाद में रहते हैं।)  

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Jamil Khan
Jamil Khanhttps://reportlook.com/
journalist | chief of editor and founder at reportlook media network

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