काबुल. अफगानिस्तान (Afghanistan) पर कब्जे के दो हफ्ते बाद शुक्रवार को तालिबान (Taliban) देश में सरकार बनाने के लिए पूरी तरह तैयार है. सूत्रों ने बताया कि कल जुमे की नमाज के बाद तालिबान सरकार बनाएगा. अफगानिस्तान से अमेरिकी सेना की वापसी के बाद तालिबान ने अपनी जीत में खुशी मनाई थी और दशकों के युद्ध के बाद देश में शांति और सुरक्षा लाने की अपनी प्रतिज्ञा दोहराई.

तालिबान के लिए अफगानिस्तान में सरकार चलाना बहुत बड़ी चुनौती होगी क्योंकि यह देश अंतरराष्ट्रीय सहायता पर बहुत अधिक निर्भर है. अफगानिस्तान को पैसे की सख्त जरूरत है. करीब 10 बिलियन डॉलर की संपत्ति अफगान केंद्रीय बैंक के पास है. इसमें से ज्यादातर संपत्ति विदेशों में जमा है. इसलिए तालिबान की इस संपत्ति तक पहुंच फिलहाल संभव नहीं दिखती.

रेटिंग एजेंसी फिच ग्रुप की रिसर्च फर्म, फिच सॉल्यूशंस की एक रिपोर्ट में विश्लेषकों ने कहा कि अफगानिस्तान के वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में इस वित्तीय वर्ष में 9.7% सिकुड़ सकती है. अगले साल 5.2% की और गिरावट देखी जाएगी. फिच ने कहा कि अधिक आशावादी दृष्टिकोण का समर्थन करने के लिए विदेशी निवेश की आवश्यकता होगी. चीन और रूस इसमें तालिबान की मदद कर सकता है.

वहीं इंडिया के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने कहा की अफगानिस्तान में किस तरह की सरकार बन सकती है इसके बारे में हमें कोई विस्तार से जानकारी नहीं है. वहीं उन्होंने तालिबान के साथ बैठक को लेकर कहा कि उनके पास इस बारे में कोई अपडेट नहीं है. अरिंदम बागची ने कहा, यह हां और ना की बात नहीं है (तालिबान के साथ आगे की बैठकों के रोडमैप पर). हमारा उद्देश्य है कि अफगानिस्तान की जमीन का इस्तेमाल किसी भी तरह की आतंकी गतिविधि के लिए न हो.

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