काबुल: जैसे-जैसे तालिबान अफगानिस्तान पर अपनी पकड़ मजबूत कर रहा है, वैसे-वैसे अमेरिका के साथ मिलकर संगठन को नुकसान पहुंचाने वाले अमेरिकी सहयोगी अफगानि्तान के लोगो को सजा भी दे रहा है हैं. तालिबान ने एक बार फिर अपना पुराना कट्टर कानून जारी रखा है. दरअसल, तालिबान ने अमेरिकी सेना (US Army) के लिए काम करने वाले एक अफगान ट्रांसलेटर (Afghan Translator) सोहेल पारदीस (Sohail Pardis) का सिर कलम (Beheaded) कर दिया.

सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक, पारदीस उन हजारों अफगान ट्रांसलेटर्स में से एक थे जिन्होंने अमेरिकी सेना के लिए काम किया और अब तालिबान द्वारा हत्या किए जाने के खतरे का सामना कर रहे हैं. ऐसा इसलिए क्योंकि तालिबान तेजी से देश पर कब्जा जमा रहा है. बताया गया है कि सोहेल पारदीस 12 मई को ईद के लिए अफगानिस्तान की राजधानी काबुल (Kabul) में अपने घर से पास के खोस्त प्रांत (Khost Province) जा रहे थे. इसी दौरान तालिबान ने उनकी गाड़ी को एक चेक पोस्ट पर रोक लिया.

गाड़ी से खींचकर बाहर निकाला, फिर किया सिर कलम

इस घटना के चश्मदीद ग्रामीणों ने रेड क्रिसेंट (Red Crescent) को बताया कि तालिबान ने पहले उनकी कार पर गोली मारी और फिर उसे रोका. इसके बाद पारदीस को गाड़ी से खींचकर बाहर निकाला गया और फिर उसका सिर कलम कर दिया गया. घटना से कुछ दिन पहले ही पारदीस ने अपने दोस्त से कहा था कि उन्हें तालिबान से जान से मारने की धमकियां मिल रही हैं. उसने कहा था कि तालिबान को पता चल चुका है कि उन्होंने 20 सालों तक चले संघर्ष के दौरान अमेरिका सेना के लिए 16 महीने तक ट्रांसलेटर के रूप में काम किया.

तालिबान ने दी थी जान से मारने की धमकी

सोहेल पारदीस के दोस्त और उनके साथी अब्दुलहक अय्युबी ने सीएनएन को बताया कि वे (तालिबान) उसे कह रहे थे कि तुम अमेरिकियों के लिए एक जासूस हो. तुम अमेरिकियों की आंखें हो और तुम काफिर हो. हम तुम्हें और तुम्हारे परिवार को मार देंगे. जून में जारी एक बयान में तालिबान ने कहा कि वह विदेशी बलों के साथ काम करने वालों को नुकसान नहीं पहुंचाएगा. तालिबान के एक प्रवक्ता ने सीएनएन को बताया कि वे घटना को वेरिफाई करने का प्रयास कर रहे थे. लेकिन कहा कि कुछ घटनाएं वैसी नहीं हैं जैसा उन्हें दिखाया जा रहा है.

अमेरिकी सेना के साथ काम करने वाले अफगानी लोगों को मिल रही धमकियां

वहीं, अमेरिकी सेना के लिए काम करने वाले लगभग 18,000 अफगानों ने एक विशेष अप्रवासी वीजा कार्यक्रम के लिए आवेदन किया है जो उन्हें अमेरिका जाने की अनुमति देगा. इन लोगों का कहना है कि उनकी जिंदगी खतरे में पड़ गई है, क्योंकि तालिबान ने उनसे बदला लेने की धमकी दी है. बता दें कि अफगानिस्तान में युद्ध के चरम पर पहुंचने पर करीब एक लाख अमेरिकी सैनिक तैनात थे. इन सैनिकों की मदद के लिए अफगानों ने ट्रांसलेटर के रूप में सहायता की थी.

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