यूपी के लखीमपुर में हुई हिंसा का मामला देशभर में चर्चा का विषय बन गया है। शिवसेना ने बीजेपी पर हमला करते हुए उसे ‘ईस्ट इंडिया कंपनी’ बताया है और कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी की तारीफ की है।

शिवसेना ने प्रियंका की तुलना पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से करते हुए कहा कि वह वारियर और योद्धा हैं और उनकी आवाज और आंखों में इंदिरा जैसी कुशाग्रता है।

शिवसेना नेता संजय राउत के कांग्रेस नेता राहुल गांधी से दिल्ली में मुलाकात के एक दिन बाद ये बातें सामने आई हैं। शिवसेना के मुखपत्र सामना में ये बातें लिखी गई हैं।

सामना के संपादकीय में पीएम मोदी से ये मांग की गई है कि वे किसानों की बात को सुनें। इसमें ये भी कहा गया है कि अगर सरकार को लगता है कि किसानों को गिरफ्तार करके उनकी आवाज को दबाया जा सकता है, तो ये एक भ्रम है।

‘वह महान इंदिरा गांधी की पोती हैं, जिन्होंने देश के लिए खुद का बलिदान दे दिया’

सामना में कहा गया है कि प्रियंका गांधी पर राजनीतिक हमले किए जा सकते हैं लेकिन जो लोग उन्हें गैरकानूनी तरीके से कैद कर रहे हैं, उन्हें ये बात ध्यान रखना चाहिए कि वह महान इंदिरा गांधी की पोती हैं, जिन्होंने देश के लिए खुद का बलिदान दे दिया और पाकिस्तान को तोड़कर भारत के विभाजन का बदला लिया।

शिवसेना ने कहा कि उत्तर प्रदेश में किसानों के नरसंहार के नतीजे पूरी दुनिया में महसूस किए जा रहे हैं। यह केवल यह साबित करता है कि सरकार किसी पर भी कार्रवाई करेगी, चाहे कुछ भी हो, और अगर विपक्ष ने आवाज उठाई तो उसका गला घोंट दिया जाएगा।

शिवसेना ने यह भी दावा किया कि योगी सरकार गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा टेनी के बेटे आशीष मिश्रा को बचाने की कोशिश कर रही है। अगर यह पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, झारखंड, छत्तीसगढ़ या केरल में हुआ होता तो भाजपा उन राज्यों के मुख्यमंत्रियों के इस्तीफे के लिए देशव्यापी आंदोलन छेड़ देती।

आपातकाल के दौरान भी लोकतंत्र का इस तरह गला नहीं घोंटा गया’

यूपी सरकार द्वारा छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और पंजाब के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी को लखीमपुर खीरी जाने से रोकने पर, शिवसेना ने पूछा कि क्या यह भारत-पाकिस्तान युद्ध चल रहा है?

शिवसेना ने कहा कि आपातकाल के दौरान भी लोकतंत्र का इस तरह गला नहीं घोंटा गया था। बता दें कि पुलिस द्वारा लखनऊ एयरपोर्ट से बाहर निकलने से रोकने के बाद सीएम बघेल ने हवाई अड्डे पर ही धरना दिया था, जबकि चन्नी ने कहा था कि लखीमपुर खीरी में हुई हिंसा उन्हें 1919 के जलियांवाला बाग त्रासदी की याद दिलाती है।

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