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Tuesday, April 16, 2024

जम्मू कश्मीर में शहीद हुए मुदस्सिर अहमद के आखिरी शब्द जो उन्होंने अपने भाई से कहा – अपने लिए नए जूते ले लेना और पैसे की चिंता मत करना, “अल्लाह हाफिज” जाने और क्या कुछ बोले

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उड़ी (बारामुला): ‘…अपने लिए एक अच्छा सा जूता ले लेना, जो चार-पांच महीने चले, बदलकर फिर नया ले लेंगे…और पैसे की चिंता मत करना, वो मुझसे ले लेना।

…अभी मैं एक आपरेशन पर हूं, बच्चे अपना ध्यान रखना और अपनी सेहत का भी, कल मुझे किसी भी समय फोन कर लेना, अच्छा अल्लाह हाफिज… बाबा।’

यह आखिरी वाइस मैसेज जम्मू कश्मीर पुलिस के बलिदानी मुदस्सिर अहमद का है, जिन्होंने 25 मई को श्रीनगर-बारामुला राष्ट्रीय राजमार्ग के पास करीरी (बारामुला) में आतंकियों के साथ मुठभेड़ से पहले अपने छोटे भाई बासित को भेजा था। मुदस्सिर अपने छोटे भाई को बाबा और बच्चा कहकर पुकारते थे।

बता दें कि इस मुठभेड़ में सुरक्षाबलों ने जैश-ए-मोहम्मद के तीन पाकिस्तानी आतंकियों को मार गिराया था, जो सीमा पार से घुसपैठ करने के बाद श्रीनगर में आत्मघाती हमला करने जा रहे थे। इस मुठभेड़ में मुदस्सिर ने अहम भूमिका निभाई थी। सिर्फ यही नहीं, कई आतंकरोधी अभियानों के साथ पिछले दिनों बारामुला में शराब की दुकान पर हुए आतंकी हमले में लिप्त आतंकी माड्यूल को पकड़वाने वाले दल में भी मुदस्सिर शामिल थे।

बारामुला जिले में नियंत्रण रेखा (एसओसी) से सटे उड़ी क्षेत्र के रहने वाले मुदस्सिर अहमद को सभी ‘बिंदास’ और ‘दबंग’ के नाम से जानते थे। मुदस्सिर को जितना प्रेम अपने देश से था, उतनी ही चिंता अपने स्वजन की भी थी। यही वजह थी कि मुठभेड़ पर जाने से पहले वह अक्सर अपने परिवार को वाइस मैसेज या वाट्सएप के जरिये अपना ख्याल रखने का संदेश भेजते थे।

…अगर जिंदगी रही तो जरूर मुलाकात होगी

दैनिक जागरण से बातचीत में मुदस्सिर के छोटे भाई बासित ने बताया कि 25 मई को मुठभेड़ पर जाने से पहले मुदिस्सर ने उसे वाट्एसप मैसेज किया था। उसमें लिखा था-आप सब ठीक अच्छे से हैं। मेरी सुबह ड्यूटी है, वहां फोन आफ रहेगा। अगर जिंदगी रही तो जरूर मुलाकात होगी, इंशाल्लाह। ध्यान रखना अम्मी-अब्बू का और मेरे लिए दिल में कोई शिकवा-गिला नहीं रखना।’ यह मैसेज दिखते हुए बासित की आंखें भर आईं। बासित ने कहा कि यह मैसेज पढ़कर लगता है जैसे भाई को पहले से ही सब पता था। बासित ने बताया कि 25 जून को घर पर हमारी बहन की शादी भी है।

मुझे नाज है अपने बेटे पर : पिता

बलिदानी मुदिस्सर अहमद के पिता मकसूद अहमद शेख ने कहा कि मुझे अपने बेटे पर नाज है। मकसूद भी पुलिस से सेवानिवृत्त हुए हैं। याद होगा जब बारामुला पुलिस लाइन में बलिदानी मुदिस्सर अहमद शेख की पार्थिव देह तिरंगे में लिपटी थी तो मकसूद अहमद ने फख्र से सीना चौड़ा कर पास खड़े जवानों से कहा था कि आंसू न बहाओ, मेरा बेटा बलिदान हुआ है, उसने हजारों जिंदगियां बचाई हैं।

मुदस्सिर के घर पहुंचे उपराज्यपाल

उपराज्यपाल मनोज सिन्हा शनिवार को उड़ी में बलिदानी मुदस्सिर के घर गए और स्वजन के साथ संवेदना प्रकट की। उन्होंने स्वजन को पांच लाख रुपये का चेक सौंपते हुए कहा कि पूरे देश को आपके बेटे पर नाज है। जम्मू कश्मीर सरकार भी हमेशा आपके साथ खड़ी है। इस दौरान बारामुला की जिला उपायुक्त डा. सईद शहरीश असगर ने भी स्वजन को एक लाख का चेक सौंपा।

‘मुदस्सिर को मैं एक लीजेंड मानता हूं। वह बहुत बहादुर था और अपने काम में पूरी तरह माहिर। डर को वह डराता था। साथियों में वह दबंग के नाम से लोकप्रिय था।’

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Ahsan Ali
Ahsan Ali
Journalist, Media Person Editor-in-Chief Of Reportlook full time journalism.

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