इन दिनों जब इतिहास के बारे में सबसे ज्यादा चर्चा होती है तो हर कोई हमारी पहली की पीढ़ी और भारत के पुराने दौर से जुड़े किस्सों के बारे में ज्यादा से ज्यादा जानना चाहता है. सोशल मीडिया पर अक्सर इतिहास से जुड़ी तस्वीरें और दस्तावेज वायरल होते रहते हैं जिसे देखकर हर कोई दंग भी हो जाता है और उससे काफी इंस्पायर भी होता है. इन दिनों सोशल मीडिया पर एक एफआईआर की कॉपी काफी वायरल (Viral FIR copy) हो रही है जो दिल्ली पुलिस द्वारा फाइल की गई पहली एफआईआर (Delhi police first FIR) बतायी जा रही है.

ट्विटर पर इन दिनों एक एफआईआर की कॉपी (Old FIR copy) काफी वायरल हो रही है. ट्विटर यूजर यशोवर्धन आजाद ने इसे पोस्ट किया है. आपको बता दें कि यूजर यूजर एक रिटायर्ड आईपीएस ऑफिसर हैं और इंटेलिजेंस ब्यूरो को पूर्व स्पेशल डायरेक्टर हैं. उन्हें ने ट्वीट में एफआईआर के कॉपी के साथ उसके बारे में जानकारी भी दी. फोटो में दिल्ली पुलिस द्वारा दर्ज की गई पहली एफआईआर की कॉपी नजर आ रही है जो साल 1861 में लिखी गई थी. ये शिकायत उर्दू भाषा (FIR copy in Urdu) में लिखी गई है और जिस अपराध के लिए शिकायत दर्ज करवाई गई है वो काफी हैरान करने वाली है. पोस्ट के अनुसार 18 अक्टूबर 2021 को दर्ज हुई इस रिपोर्ट में शख्स ने अपना हुक्का और अन्य बर्तन के चोरी होने के बारे में शिकायत दर्ज करवायी है.

दिल्ली पुलिस के पास अभी भी है पुरानी एफआईआर की कॉपी
पुलिस एक्ट के तहत 160 साल पहले दर्ज की गई दिल्ली पुलिस की इस पहली एफआईआर को मोहम्मद यार खान के बेटे माइउद्दीन ने लिखवाया था. वो कटरा शीश महल के रहने वाले थे. उन्होंने 45 आने उस वक्त के हिसाब से 2.81 रुपये के सामान की चोरी की शिकायत दर्ज की थी जो उनके निवास से ही चुरा ली गई थी. नॉर्थ दिल्ली (North Delhi) के सब्जी मंडी पुलिस स्टेशन (Sabzi Mandi Police Station) में इस रिपोर्ट को फाइल किया गया था जिसमें हुक्का, खाना पकाने वाले बर्तन और एक कुल्फी के चोरी होने का जिक्र किया गया है. आपको बता दें कि उस वक्त दिल्ली में सिर्फ 5 पुलिस स्टेशन थे. सब्जी मंडी के अलावा मुंडका, मेहरौली, सरदार बाजार और सदर बाजार के पुलिस स्टेशन अहम थे. पुलिस अधिकारियों के अनुसार उस दौर की कई रिपोर्ट्स को आज भी सब्जी मंडी स्टेशन में सुरक्षित रखा गया है. 30 अप्रैल 1895 को एक खच्चर को गुम हो जाने की एफआईआर लिखवाई गयी थी जबकि 16 फरवरी 1891 को 2 आने के 11 संतरे गुम हो जाने की रिपोर्ट भी लिखवायी गई थी. यही नहीं, 5 आने के एक पैजामे की चोरी की शिकायत 15 मार्च 1897 को दर्ज करवायी गई थी.

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