दिल्ली (Delhi) में नवरात्रि के दौरान मीट की दुकानों को बंद करने की खबरों पर दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग (Delhi Minorities Commission ) ने गुरुवार को सज्ञान लिया.

आयोग ने शहर के तीन नगर निगमों के महापौरों और आयुक्तों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है. साथ ही स्पष्टीकरण मांगा है कि किस आधार पर उन्होंने नवरात्रि के दौरान मांस की दुकानों पर प्रतिबंध लगाने या बंद करने का फैसला किया है. दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग ने 24 घंटे के भीतर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है. महापौरों को शुक्रवार को उसके सामने पेश होने को कहा है. नोटिस की एक प्रति तीन नगर निकायों के आयुक्तों को भेजी गई है.

बता दें, बीती 4 अप्रैल को दक्षिण और पूर्वी दिल्ली के महापौरों ने अपने अधिकार क्षेत्र में मीट की दुकानों को नवरात्रि के दौरान बंद रखने के लिए कहा था, इन नौ दिनों के लिए ज्यादातर लोग मांसाहारी भोजन का सेवन नहीं करते हैं. हालांकि नगर निकायों द्वारा कोई आधिकारिक आदेश जारी नहीं किया गया था. उत्तरी दिल्ली नगर निगम की ओर से हालांकि, ऐसा कुछ नहीं कहा गया है. इस नगर निगम में भी अन्य दो की तरह बीजेपी का शासन है. महापौरों के पास ऐसे आदेश जारी करने की शक्ति नहीं है और ऐसा फैसला केवल एक नगर आयुक्त द्वारा ही लिया जा सकता है.

आयोग ने कहा- महापौर का ये फैसला संविधान में बुनियादी मुफ्त गारंटी का उल्लंघन

अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष जाकिर खान ने गुरुवार को जारी कारण बताओ नोटिस में कहा कि इस विषय के बारे में खबरों में देखा गया है कि महापौर अपने आप में एक कानून के रूप में काम कर रहे हैं. वह जो मांग कर रहे हैं, वह संविधान में बुनियादी मुफ्त गारंटी का उल्लंघन करता है. इसमें कहा गया कि इस तरह की घोषणा जमीनी स्तर पर घृणित व्यवहार को भी प्रोत्साहित कर सकती है. वरिष्ठ अधिकारियों और अदालतों को दखल देना चाहिए और इस तरह के व्यवहार को रोकना चाहिए. उन्होंने महापौरों से तत्काल स्पष्टीकरण मांगा है कि किस नियम और विनियम के आधार पर आपने नवरात्रि के दौरान मीट की दुकानों पर प्रतिबंध लगाने या बंद करने का निर्णय लिया है.

‘सभी को संवैधानिक आजादी’

आयोग के अध्यक्ष जाकिर खान ने इस फैसले को असंवैधानिक बताते हुए कहा कि ये देश सभी का है और सभी को संवैधानिक आजादी है. जैसे नवरात्र चल रहा है, वैसे ही रमजान का महीना भी चल रहा है. सभी लोगों को एक दूसरे की धार्मिक भावनाओं का ख्याल रखना चाहिए. उन्होंने कहा कि जहां हिंदू भाइयो के बहुल इलाके हैं, वहां मुस्लिम भाइयों को भी ख्याल रखने की जरूरत है कि उनको कोई परेशानी न हो, इसी तरह जो मुस्लिम बहुल इलाके हैं वहां इस तरह का आदेश देना जरूरी नहीं है.

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journalist | chief of editor and founder at reportlook media network

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