दिल्ली: कुतुब मीनार परिसर में बनी कुव्वत उल इस्लाम मस्जिद (Quwwat ul Islam Mosque) परिसर में रखी हुई देवी देवताओं की मूर्तियों को परिसर में उचित स्थान पर रखने की मांग करते हुए दिल्ली की साकेत कोर्ट में अर्जी दाखिल की गई है.

साकेत कोर्ट इस मामले पर 13 अप्रैल को सुनवाई करेगा. देवी देवताओं की ओर से वकील हरिशंकर जैन ने संकेत कोर्ट में अर्जी दाखिल कर कहा हैं कि क़ुव्वत उल इस्लाम मस्जिद परिसर में भगवान गणेश की दो मूर्तिया नीचे पड़ी हुई है, जिसकी वजह से करोड़ों लोगों की धार्मिक भावनाएं आहत हो रही है. याचिका में मांग की गई है कि भगवान गणेश की मूर्तियों को लेकर नेशनल मोन्यूमेंट ऑथिरिटी द्वारा ASI को दिए गए सुझाव के मुताबिक नेशनल म्यूजियम में रखने के बजाए परिसर में हीं उचित स्थान पर रखा जाना चाहिए.

इस मामले में पहले भी याचिका दाखिल कर जैन तीर्थंकर ऋषभदेव और भगवान विष्णु भगवान गणेश भगवान शिव, देवी गौरी, भगवान सूर्य और हनुमान जी समेत 27 मंदिरों के अन्य देवी देवताओं की मूर्तियां मौजूद है, जिनपर पूजा करने का अधिकार दिया जाना चाहिए. इसके लिए साकेत कोर्ट में याचिका दाखिल की गई है, उस याचिका पर भी कोर्ट सुनवाई कर रहा है.

कुतुब मीनार ‘विष्णु स्तंभ’ नहीं- बीआर मणि

वहीं भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के पूर्व अतिरिक्त महानिदेशक बीआर मणि ने सोमवार को विश्व हिंदू परिषद के इस दावे को कपोल कल्पना करार दिया कि कुतुब मीनार मूल रूप से एक विष्णु स्तंभ था और आगाह किया कि परिसर में संरचनाओं के साथ किसी भी तरह की छेड़छाड़ के परिणामस्वरूप 1993 में यूनेस्को द्वारा मिला विश्व धरोहर का दर्जा रद्द कर दिया जाएगा. हालांकि मणि ने कहा कि ये एक तथ्य है कि 27 हिंदू मंदिरों को उस जगह पर ध्वस्त कर दिया गया था और उनके अवशेषों का इस्तेमाल कुव्वत-उल-इस्लाम मस्जिद और कुतुब मीनार के निर्माण में भी किया गया था, लेकिन इन मंदिरों के पुनर्निर्माण की मांग बेमानी है. स्थल पर इन मंदिरों के स्थान का कोई निशान नहीं है.

विश्व हिंदू परिषद ने शनिवार को मांग की कि सरकार कुतुब मीनार परिसर में सभी 27 हिंदू मंदिरों का पुनर्निर्माण कराए और हिंदू अनुष्ठानों को फिर से शुरू करने की अनुमति दे. विहिप के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने ये भी दावा किया कि 73 मीटर ऊंची कुतुब मीनार मूल रूप से एक हिंदू शासक के समय में निर्मित भगवान विष्णु के मंदिर पर एक विष्णु स्तंभ था.

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