नई दिल्ली. टी20 विश्व कप 2021 (T20 World Cup 2021) में पाकिस्तान की क्रिकेट टीम का प्रदर्शन अब तक शानदार रहा है. पाकिस्तान ने पहले भारत और फिर न्यूजीलैंड को आसानी से हराकर सेमीफाइनल में अपनी जगह लगभग पक्की कर ली है. भारत के खिलाफ मैच में जहां बाएं हाथ के तेज गेंदबाज शाहीन अफरीदी (Shaheen Afridi) चमके, तो वहीं दूसरे मैच में हारिस रऊफ (Haris Rauf) ने अपनी कहर बरपाती गेंदों से न्यूजीलैंड टीम की कब्र ही खोद दी. इस मैच में रऊफ ने 22 रन देकर 4 विकेट लिए थे. इसमें न्यूजीलैंड के ओपनर मार्टिन गुप्टिल (Martin Guptill) का विकेट खास था. क्योंकि रऊफ ने यह विकेट ‘टेप बॉल क्रिकेट’ में सीखी चालाकी के जरिए हासिल की.

हारिस रऊफ रावलपिंडी की एक दुकान पर सेल्समैन का काम करते हुए टेप बॉल क्रिकेट खेलते थे. इसी दौरान एक बार पीएसएल टीम लाहौर कलंदर्स के ट्रायल के लिए गए. उनकी रफ्तार ने सबको हैरान कर दिया. इसके बाद पाकिस्तान के दिग्गज तेज गेंदबाज रहे आकिब जावेद की उन पर नजर पड़ी और फिर हैरिस का करियर ही बदल गया. वो अकेले नहीं हैं जो टेप बॉल क्रिकेट से यहां तक पहुंचे हैं. भारत के मिस्ट्री स्पिनर वरुण चक्रवर्ती ने भी गली क्रिकेट से टीम इंडिया का सफर तय किया है. यह अलग बात है कि पाकिस्तान के खिलाफ मैच में उनका प्रदर्शन फीका रहा था. इसी वजह से टेप बॉल क्रिकेट से निकले इस स्टाऱ खिलाड़ी को आलोचना झेलनी पड़ी थी. उनका यह कहकर मजाक उड़ाया गया कि पाकिस्तान में तो गली-गली में टेप बॉल क्रिकेट खेली जाती है. इसलिए वरुण उनके लिए मिस्ट्री नहीं हैं.

रऊफ के जाल में उलझे मार्टिन गुप्टिल
हारिस रऊफ ने गुप्टिल को पहली गेंद 149 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से यॉर्कर फेंकी थी. रऊफ की यह यॉर्कर सीधे गुप्टिल के पैर के अंगूठे पर लगी और वो दर्द से छटपटाने लगे थे. रऊफ ने अगली गेंद लेंथ बॉल फेंकी. इसकी रफ्तार भी 148 किमी प्रति घंटा थी. गुप्टिल जब तक इस गेंद पर अपना बल्ला लाते. तब तक बॉल थाई पैड से टकराकर विकेट पर चली गई और बेल्स बिखर गए.

आखिर टेप बॉल क्या है ? इससे गेंदबाजी में कैसे मदद मिलती है? अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में गेंदबाजों को इससे क्या फायदा हो रहा है और क्यों पाकिस्तान क्रिकेट को इससे इतना फायदा हो रहा है?.चलिए जानते हैं इससे जुड़े सभी सवालों के जवाब..

टेप बॉल क्या है?
टी20 विश्व कप में पाकिस्तान के गेंदबाजों की सफलता के बाद टेप बॉल क्रिकेट अचानक से सुर्खियों में आ गया है. दरअसल, टेप-बॉल एक टेनिस बॉल है, जिसे बिजली के टेप में लपेटा जाता है. ऐसा गेंद को ज्यादा चिकना बनाने के लिए किया जाता है. टेप लगाने के बाद भी यह गेंद पारंपरिक लेदर बॉल से हल्की होती है.

टेप बॉल से गेंदबाजी में कैसे मदद मिलती है?
जब कोई गेंदबाज भारी गेंद यानी लेदर बॉल से गेंदबाजी करता है, तो उसकी आर्म स्पीड कम होती है. इसका सीधा सा मतलब गेंद की रफ्तार कम होना. लेकिन जब आप टेप बॉल जैसी हल्की गेंद से क्रिकेट खेलते हैं तो आपकी आर्म स्पीड बढ़ जाती है और इससे गेंद की रफ्तार में अच्छा-खासा इजाफा हो जाता है. हारिस रऊफ के मामले में भी ऐसा ही है. वो भी टेप बॉल क्रिकेट खेलकर ही अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचे हैं. सिर्फ वही नहीं, शाहीन अफरीदी, वसीम अकरम और आकिब जावेद सब पाकिस्तान की गलियों में इसी तरह की क्रिकेट खेलकर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट तक पहुंचे थे.

टेप-बॉल और लेदर बॉल की रफ्तार में कितना फर्क होता है ?
टेप बॉल सामान्य क्रिकेट बॉल की तुलना में हवा में 20 फीसदी तेजी से ट्रैवल करती है. इसका मतलब अगर कोई गेंदबाज 135 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से गेंद फेंकता है तो टेप बॉल क्रिकेट में गेंद की रफ्तार बढ़कर 155 किमी प्रति घंटा हो जाएगी. क्योंकि यह लेदर बॉल की तुलना में हल्की और छोटी होती है. यही वजह है कि टेप बॉल क्रिकेट से निकले पाकिस्तानी गेंदबाज अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अपनी रफ्तार से बड़े-बड़े बल्लेबाजों को परेशान कर रहे हैं.

टेप बॉल गेंदबाज क्यों बेहतर यॉर्कर फेंकते हैं ? 
अपने करियर की शुरुआती दौर में टेप बॉल से खेलने वाला गेंदबाज अच्छी यॉर्कर फेंकता है. न्यूजीलैंड के खिलाफ पिछले मैच में मार्टिन गुप्टिल पाकिस्तानी गेंदबाज हारिस रऊफ की जिस यॉर्कर पर चोटिल हुए थे. वो इसका सबूत है. ऐसा इसलिए होता है. क्योंकि टेप बॉल हल्की होती है. इस पर कोई सीम नहीं होती है. ऐसे में गेंदबाज अपनी रफ्तार और यॉर्कर से ही बल्लेबाज को परेशान कर सकता है और यही टेप बॉल गेंदबाज की सबसे बड़ी ताकत होती है.

टेप बॉल क्रिकेट खेलने वाले गेंदबाज क्यों साबित हो रहे असरदार ?
टेप बॉल से खेलने वाले गेंदबाज को गेंद को किस एंगल से रिलीज करना है, उसकी बेहतर समझ हो जाती है. क्रिकेट गेंद की तुलना में टेप बॉल हवा में ज्यादा तेजी से घूमती है. ऐसे में अगर कोई गेंदबाज हल्की गेंद पर नियंत्रण हासिल कर लेता है, तो प्रोफेशनल क्रिकेट में इस्तेमाल होने वाले गेंद को कंट्रोल करना उसके लिए बाएं हाथ का खेल हो जाता है.

टेप बॉल क्रिकेट रिवर्स स्विंग में कितनी मदद करता है 
टेप बॉल क्रिकेट किसी भी गेंदबाज को रिवर्स स्विंग सीखने में काफी मदद करता है. क्योंकि टेप बॉल क्रिकेट गली-मोहल्लों या उबड़-खाबड़ मैदान पर खेला जाता है. ऐसे में गेंद पर लगी टेप जल्दी घिस जाती है. ऐसे में गेंदबाज टेप बॉल की एक साइड को चिकना और दूसरी को खुरदुरा बना देते हैं और यहीं से टेप बॉल भी रिवर्स स्विंग होने लगती है. अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में भी रिवर्स स्विंग का यही सिद्धांत काम करता है.

भारत, पाकिस्तान और श्रीलंका में लोकप्रिय है टेप बॉल क्रिकेट
भारत, पाकिस्तान और श्रीलंका में टेप बॉल क्रिकेट ज्यादा लोकप्रिय है. ऐसा इसलिए क्योंकि यहां हर जगह क्रिकेट मैदान, एकेडमी या ट्रेनिंग से जुड़ी सुविधाएं नहीं हैं. ऐसे में गली-मोहल्ले या आस-पास के छोटे मैदान पर ही बच्चे क्रिकेट खेलते हैं. वसीम अकरम, वकार यूनुस, लसिथ मलिंगा और भारत के मिस्ट्री स्पिनर वरुण चक्रवर्ती, अजंता मेंडिस जैसे गेंदबाज इसके उदाहरण हैं. यही वजह है दुनिया को भारत और पाकिस्तान से ही रिवर्स स्विंग, दूसरा और तीसरा जैसी गेंद फेंकने वाले खिलाड़ी मिले.

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