करीना कपूर एवं सैफ अली खान के बेटे का नाम बताइए ? यह सवाल खंडवा की एक निजी स्कूल द्वारा छठी क्लास के प्रश्न पत्र में पूछा गया. जनरल नॉलेज से सम्बन्धित यह सवाल इन दिनों सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है.पालक शिक्षक संघ ने शिक्षा विभाग से ऐसे स्कूल की मान्यता रद्द करने की मांग की है. 

पूछ लिया करीना कपूर खान एवं सैफ अली खान के बेटे का नाम 

खंडवा की एकेडमिक हाइट्स पब्लिक स्कूल ने GK के पेपर में जनरल नालेज से सम्बन्धित सवालों के कॉलम में एक सवाल यह भी पूछ लिया कि करीना कपूर खान एवं सैफ अली खान के बेटे का नाम बताइए ? 

प्रश्न पर शिक्षक पालक संघ के संरक्षक ने उठाई आपत्ति

इसके बाद यह प्रश्नपत्र तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल होने लगा. इसे लेकर पालक शिक्षक संघ ने आपत्ति जताई और कहा की यदि बच्चों से कुछ पूछना ही था तो देश की वीरांगनाओं के विषय में सवाल पूछते ? अब क्या स्कूली बच्चों को यह भी याद रखना होगा कि फिल्मी दुनिया के किस कलाकार के यहां पैदा हुए बच्चे का नाम क्या है? इस प्रश्न पर शिक्षक पालक संघ के संरक्षक डॉक्टर अनीश अरझरे ने आपत्ति जताते हुए स्कूल प्रबंधन के खिलाफ कार्रवाई की मांग की. 

स्कूल प्रबंधन के खिलाफ नोटिस जारी करने की बात कही

जिला शिक्षा अधिकारी एसके भालेराव ने इसे गंभीरता से लेते हुए स्कूल प्रबंधन के खिलाफ नोटिस जारी करने की बात कही. उन्होंने भी माना कि निजी शिक्षण संस्थानों को भी इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि इस प्रकार के प्रश्न परीक्षाओं में नहीं पूछे जाएं.

एक निजी स्कूल में छठवीं कक्षा के जीके में पूछा करीना और सैफ अली खान के बेटे का नाम

इस मामले में जब जी न्यूज की टीम स्कूल का पक्ष जानने के लिए पहुंची तो इस स्कूल में गेट बंद था. स्कूल में न तो स्कूल संचालक थी और न ही प्रिंसिपल. जब हमने स्कूल की संचालक श्वेता जैन से बात करना चाही तो उन्होंने फोन पर बताया कि वह खंडवा से बाहर हैं. अपनी सफाई में उन्होंने कहा कि यह प्रश्न पत्र उनकी मुख्य संस्था एकेडमिक हाइट्स के हेडक्वार्टर दिल्ली से बनकर आते हैं. उन्होंने बताया कि सामान्य ज्ञान में बच्चों को एंटरटेनिंग तरीके से इतिहास के मुगल बादशाह जहांगीर के नाम को याद कराने के उद्देश्य से यह प्रश्न पूछा गया था. इसी प्रश्न पत्र में अलग-अलग तरीकों से और भी प्रश्न पूछे गए थे. स्कूल की संचालिका श्वेता जैन ने कहा कि उनका उद्देश्य किसी भी धर्म या समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंचाने का नहीं था. 

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