नई दिल्ली. संशोधित नागरिकता कानून और राष्ट्रीय नागरिक पंजीकरण (CAA-NRC) के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के दौरान भड़काऊ भाषण देने के आरोपी JNU के छात्र शरजील इमाम (Sharjeel Imam) ने कड़कड़डूमा कोर्ट में कहा कि उनके भाषण में ऐसा कुछ भी नहीं था जिससे धार्मिक दुश्मनी हो. कोर्ट के जज 2019 में दो विश्वविद्यालयों में इमाम द्वारा दिए गए कथित भाषणों के लिए उनके खिलाफ दायर एक मामले की सुनवाई कर रहे थे, जहां इमाम ने कथित तौर पर भारत से असम और बाकी पूर्वोत्तर को ‘काटने’ की चेतावनी दी थी.

इमाम को UAPA के तहत और आईपीसी के तहत राजद्रोह के कथित अपराध के लिए गिरफ्तार किया गया था और अब उन्होंने मामले में जमानत के साथ-साथ आरोपमुक्त करने का अनुरोध किया है. कोर्ट ने जमानत और आरोप मुक्त करने के इमाम की अर्जियों पर आदेश को 7 दिसंबर के लिए सुरक्षित रखा है. विशेष लोक अभियोजक अमित प्रसाद को राज्य की तरफ से विस्तृत लिखित बयान दाखिल करने का निर्देश दिया है.

वहीं, दिल्ली हाई कोर्ट ने भड़काऊ भाषण मामले में आरोपी शरजील इमाम की जमानत याचिका पर दिल्ली पुलिस से जवाब मांगा है, क्योंकि शरजीम इमाम पर साल 2019 में CAA-NRC विरोध प्रदर्शन के दौरान भड़काऊ भाषण देने और हिसा भड़काने का आरोप है. वहीं, बुधवार को रजनीश भटनागर की पीठ ने अभियोजन पक्ष को नोटिस जारी करते हुए याचिका पर सुनवाई के लिए अगली तारीख 11 फरवरी तय की है.

बता दें कि दिल्ली पुलिस ने शरजील इमाम को सीएए-एनआरसी के विरोध के दौरान कथित भड़काऊ भाषण देने के आरोप में जनवरी 2020 में गिरफ्तार किया था. उसके खिलाफ आरोपपत्र दाखिल हो चुका है. आरोप है कि उसने 2019 में अपने भाषणों में कथित रूप से असम और पूर्वोत्तर के अन्य हिस्सों को देश से अलग करने की धमकी दी थी. ये कथित भाषण उसने जामिया में 13 दिसंबर 2019 और अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में 16 दिसंबर 2019 को दिए थे.

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