कोरोना महामारी के दौरान स्कूली शिक्षा बुरी तरह प्रभावित हुई है.

यही वजह है कि केंद्र सरकार कोविड-19 से संबंधित सभी प्रोटोकॉल का पालन करते हुए ऑफलाइन कक्षाओं के लिए स्कूलों को चरणबद्ध तरीके से खोलने के लिए एक मॉडल पर काम कर रही है.दो साल से स्कूली शिक्षा बाधितगौरतलब है कि पिछले लगभग दो साल से स्कूलों में ऑफलाइन पढ़ाई नहीं हो पा रही है. कोरोना वायरस की दूसरी लहर के बाद नवंबर-दिसंबर 2021 में स्कूल खुले भी लेकिन कोरोना की तीसरी लहर की वजह से अभी स्कूल बंद हैं.माता-पिता स्कूलों को खोलने की कर रहे मांगकोरोना वायरस महामारी के कारण स्कूली बच्चे लगभग दो वर्षों से ज्यादातर ऑनलाइन कक्षाओं में भाग ले रहे हैं. पीटीआई न्यूज एजेंसी ने सूत्रों के हवाले से यह जानकारी दी है कि माता-पिता स्कूलों को खोलने की मांग कर रहे हैं, केंद्र सरकार कोविड से संबंधित सभी प्रोटोकॉल का पालन करते हुए स्कूलों को खोलने के लिए एक मॉडल पर काम कर रही है.मनीष सिसोदिया से मुलाकात कर अभिभावकों ने की मांगमहामारी वैज्ञानिक और सार्वजनिक नीति विशेषज्ञ चंद्रकांत लहरिया और सेंटर फॉर पॉलिसी रिसर्च की अध्यक्ष यामिनी अय्यर के नेतृत्व में माता-पिता के एक प्रतिनिधिमंडल ने बुधवार को दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया से मुलाकात कर 1,600 से अधिक अभिभावकों द्वारा हस्ताक्षरित एक ज्ञापन उन्हें सौंपा था, जिसमें स्कूलों को फिर से खोलने की मांग की गई थी. कई अन्य राज्यों में भी इसी तरह की मांग की गयी है, हालांकि अभिभावकों का एक अन्य वर्ग ऑनलाइन कक्षाओं को जारी रखने के पक्ष में रहा है.रघुराम राजन भी कर चुके हैं स्कूल खोलने की मांगगौरतलब है कि कुछ दिन पहले आरबीआई के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने भी यह कहा था कि बच्चों का स्कूल जाना बहुत जरूरी है क्योंकि अगर बच्चे स्कूल नहीं गये तो हम एक कम समझ वाली पीढ़ी के लिए तैयार रहें. राजन ने कहा कि अगर बच्चे 1.5 साल स्कूल नहीं जाते हैं तो हमें तीन साल का नुकसान होता है. ग्रामीण इलाकों में खासकर गरीब बच्चों के पास पढ़ाई के लिए मोबाइल लैपटॉप नहीं है उनकी स्थिति कैसी है, यह समझा जा सकता है.

Share this article

ब्रेकिंग न्यूज और लाइव न्यूज अपडेट के लिए हमें फेसबुक पर लाइक करें या  ट्विटर पर फॉलो करें.

Leave a comment