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तालिबान के समर्थन में खुलकर उतरा चीन, G20 में चीनी विदेश मंत्री बोले हटाओ प्रतिबंध

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नई दिल्ली: तालिबान के अफगानिस्तान पर कब्जे के बाद से चीन और पाकिस्तान उसके लिए दुनिया के सभी मंचों पर वकालत करने में लगे हुए हैं। अब जी20 की बैठक में चीन के विदेशमंत्री वांय यी ने मांग उठाई कि अफगानिस्तान के खिलाफ आर्थिक प्रतिबंध समाप्त होने चाहिए और देश पर एकतरफा प्रतिबंध जल्द से जल्द हटा दिए जाने चाहिए।

चीन ने पिछले महीने कहा था कि वो तालिबान अफगानिस्तान से मैत्रीपूर्ण रिश्ते चाहता है। अब जी20 की बैठक में चीन ने कहा है कि अमेरिकी बैंकों में पड़े अफगानिस्तान के विदेश विदेशी मुद्रा भंडार उसके अपने है और उसे उसके इस्तेमाल की इजाज़त मिलनी चाहिए।

अफगानिस्तान पर वर्चुअल जी20 विदेश मंत्रियों की बैठक में वीडियो लिंक के माध्यम से वांग यी के भाषण का हवाला देते हुए चीनी विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा, ”प्रतिबंधों को सौदेबाजी के चिप के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।”

वांग यी ने कहा, “अफगानिस्तान के विदेशी मुद्रा भंडार राष्ट्रीय संपत्ति हैं, जो देश के लोगों से संबंधित होनी चाहिए और अपने ही लोगों द्वारा उपयोग की जानी चाहिए। अफगानिस्तान पर राजनीतिक दबाव डालने के लिए सौदेबाजी चिप के रूप में उपयोग नहीं की जानी चाहिए।”

चीनी राजनयिक ने कहा कि अफगानिस्तान का शांतिपूर्ण पुनर्निर्माण, मध्यम और दीर्घकालिक विकास अंतरराष्ट्रीय समुदाय के वित्तीय समर्थन के बिना नहीं हो सकता। वांग यी ने कहा, ”अफगानिस्तान को मौजूदा दबाव को कम करने में मदद करने के लिए जी 20 सदस्यों से सक्रिय रूप से व्यावहारिक उपाय करने का आह्वान किया।”

उन्होंने कहा, “अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों को भी अफगानिस्तान की गरीबी में कमी, सतत विकास, लोगों की आजीविका और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करनी चाहिए।”

वांग यी ने जी20 के समूह (G20) से अफगानिस्तान को मानवीय सहायता प्रदान करने के अपने प्रयासों में तेजी लाने का आह्वान किया। चीनी विदेश मंत्री ने कहा कि अफगान तालिबान ने एक अंतरिम सरकार की स्थापना की घोषणा की है, जिसका अर्थ है कि उनकी घरेलू और विदेशी नीतियों को अभी भी समायोजित किया जा रहा है और अभी तक पूरी तरह से अंतिम रूप नहीं दिया गया है।

उन्होंने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को अफगान लोगों की स्वतंत्र रूप से एक विकास पथ चुनने की इच्छा का समर्थन करना चाहिए, जो उनकी राष्ट्रीय परिस्थितियों के अनुकूल हो।

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