चंडीगढ़: पंजाब सरकार (Punjab Government) में कैबिनेट मंत्री के रूप में पद की शपथ लेने के महज दो दिन बाद मलेरकोटला की विधायक रजिया सुल्ताना (Razia Sultana) ने मंगलवार को “नवजोत सिंह सिद्धू(Navjot Singh Sidhu) के साथ एकजुटता दिखाते हुए” इस्तीफा दे दिया, जिन्होंने दिन में राज्य कांग्रेस अध्यक्ष के पद से इस्तीफा दे दिया था. पंजाब के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी (Charanjit Singh Channi) को भेजे त्यागपत्र में सुल्ताना ने कहा कि वह ‘नवजोत सिंह सिद्धू के साथ एकजुटता दिखाते हुए’ इस्तीफा दे रही हैं.

सुल्ताना को सिद्धू की करीबी माना जाता है. उनके पति मोहम्मद मुस्तफा सिद्धू के प्रधान रणनीतिक सलाहकार हैं जो भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के अधिकारी रह चुके हैं. इससे पहले आज दिन में सुल्ताना को जल आपूर्ति और स्वच्छता, सामाजिक सुरक्षा, महिला और बाल विकास तथा मुद्रण एवं स्टेशनरी विभागों का प्रभार सौंपा गया था. अमरिंदर सिंह नीत सरकार में वह परिवहन मंत्री की जिम्मेदारी संभाल रही थीं.

एएनआई की रिपोर्ट के अनुसार, सुल्ताना ने कहा, “सिद्धू साहब सिद्धांतों के व्यक्ति हैं. वह पंजाब और पंजाबियत के लिए लड़ रहे हैं.” अपने इस्तीफे में उन्होंने कहा, “मैं पंजाब के सर्वोत्तम हित में एक कार्यकर्ता के रूप में पार्टी के लिए काम करना जारी रखूंगी.”

पंजाब में सिद्धू का ‘झटका’ कांग्रेस को पड़ेगा भारी?

सिद्धू के पंजाब कांग्रेस प्रमुख पद से इस्तीफा देने से गांधी परिवार को बड़ा झटका लगा, जिन्होंने उम्मीद की थी कि अगले साल होने वाले राज्य चुनावों से पहले मुख्यमंत्री बदलने से राज्य में पार्टी में जारी संकट खत्म हो जाएगा. क्रिकेटर से नेता बने सिद्धू ने अपना इस्तीफा ट्वीट किया जिससे संकेत मिलता है कि वह पंजाब कैबिनेट में हुए बदलावों पर नाखुश हैं.

कांग्रेस की कार्यकारी अध्यक्ष सोनिया गांधी को भेजे और सोशल मीडिया पर पोस्ट किए इस्तीफे में नवजोत सिंह सिद्धू ने कहा, “मनुष्य का चारित्रिक पतन समझौतों से ही शुरू होता है, और मैं पंजाब के भविष्य और पंजाब के कल्याण के एजेंडे के साथ समझौता नहीं कर सकता हूं… इसलिए, मैं पंजाब प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष पद से इस्तीफा देता हूं… कांग्रेस की सेवा करता रहूंगा…” उन्हें जुलाई में पंजाब कांग्रेस का अध्यक्ष बनाया गया था.

उनका इस्तीफा चरणजीत सिंह चन्नी द्वारा पंजाब के नए मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने के एक हफ्ते बाद आया है – जो राज्य के पहले दलित मुख्यमंत्री हैं. उन्होंने कांग्रेस के दिग्गज नेता कैप्टन अमरिंदर सिंह की जगह ली.

सूत्रों के अनुसार, सिद्धू चन्नी द्वारा किए गए कैबिनेट फेरबदल से नाराज़ थे. हालांकि जब कुछ फैसलों की बात आती है तो सिद्धू को व्यापक रूप से “सुपर सीएम” के रूप में देखा जाता था, लेकिन हाल ही में हुई नियुक्तियों में उन्हें कथित तौर पर नजरअंदाज कर दिया गया था, जिसे विवादास्पद माना गया था.

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