लखनऊ. इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने मंगलवार को संगीन अपराधों के आरोपी खान मुबारक की उस याचिका को भ्रामक करार देकर खारिज कर दिया, जिसमें उसने एसीएस होम अवनीश अवस्थी समेत आला पुलिस अफसरों के खिलाफ गम्भीर आरोप लगाए थे। याची ने खुद की जान का खतरा बताते हुए ललितपुर से लखनऊ जेल ट्रांसफ़र की हाईकोर्ट से गुहार की थी। याची का कहना था कि ये आला अफसर उससे मुख्तार अंसारी जैसे राजनीतिक दुश्मनों को खत्म करने का दबाव डालते हैं और इसी के चलते उसका ललितपुर जेल में ट्रांसफर करवा दिया। याची ने यह भी आशंका जाहिर की थी कि जेल से लाने व ले जाने के दौरान उसका एनकाउंटर किया जा सकता है। वहीं कोर्ट ने सुनवाई के बाद आरोपों को अस्पष्ट कहते हुए याचिका को खारिज कर दिया।

35 संगीन मामले दर्ज

न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा व न्यायमूर्ति राजीव सिंह की खंडपीठ ने यह फैसला, खान मुबारक की याचिका पर शुरुआती सुनवाई के बाद दिया। राज्य सरकार की तरफ से अपर महाधिवक्ता विनोद शाही ने याचिका का विरोध करते हुए याची के आरोपों को आधारहीन बताया।

शाही का कहना था कि आईजी जेल की रिपोर्ट पर याची को अम्बेडकर नगर से ललितपुर जेल भेजा गया है। कहा कि उसके खिलाफ हत्या आदि के 35 संगीन मामले दर्ज हैं ऐसे में उसने यह याचिका महज पेशबन्दी में दायर की है जो खारिज किये जाने लायक है।

मुख्तार अंसारी को खत्म करने का दबाव डालने का लगाया था आरोप

याची ने याचिका में एसीएस होम अवनीश अवस्थी, एडीजी एलओ प्रशान्त कुमार, डीजी जेल आनन्द कुमार, एसटीएफ के एडीजी अमिताभ यश जैसे वरिष्ठ अधिकारियों समेत अम्बेडकर नगर जिले के डीएम और एसपी को नाम से पक्षकार बनाकर उनके खिलाफ गंभीर आरोप लगाये थे। याची का कहना था कि ये आला अफसर उससे मुख्तार अंसारी जैसे राजनीतिक दुश्मनों को खत्म करने का दबाव डालते हैं और इसी के चलते उसका ललितपुर जेल में ट्रांसफर करवा दिया।

याची ने यह भी आशंका जाहिर की थी कि जेल से लाने व ले जाने के दौरान उसका एनकाउंटर किया जा सकता है। कोर्ट ने सुनवाई के बाद आरोपों को अस्पष्ट कहते हुए याचिका को खारिज कर दिया।

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