रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने मंगलवार को नाटो की यूक्रेन में सैनिकों और हथियारों की तैनाती के खिलाफ को चेतावनी देते हुए कहा कि यह रूस के लिए एक रेड लाइन का प्रतिनिधित्व करता है। उन्होंने कहा कि अगर नाटो की ये गतिविधियां जारी रहीं तो उसे सख्त प्रतिक्रिया का सामना करना पड़ेगा। पश्चिमी देशों की ओर से जताई जा रही इस चिंता पर कि रूस कथित तौर पर यूक्रेन पर आक्रमण करना चाहता है, पुतिन ने कहा कि मॉस्को भी सीमा के पास नाटो की गतिविधियों को लेकर भी उतना ही चिंतित है। 

एक ऑनलाइन निवेश फोरम के भागीदारों के साथ बात करते हुए रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने कहा कि पूर्व की ओर नाटो (उत्तर अटलांटिक संधि संगठन) के विस्तार ने मॉस्को को मूल सुरक्षा हितों के सामने खतरा उत्पन्न किया है। उन्होंने चिंता जताई कि धीरे-धीरे ऐसी स्थिति बन सकती है कि नाटो यूक्रेन के क्षेत्र का इस्तेमाल उन मिसाइलों की तैनाती के लिए करे जो महज पांच मिनट में रूप से कमांड सेंटर तक पहुंच सकती हैं। पुतिन ने आगे कहा कि इस तरह के खतरों का उत्पन्न होना हमारे लिए एक ‘रेड लाइन’ की तरह है।

इन्हीं खतरों से निपटने के लिए बनानी पड़ी हाइरपसोनिक मिसाइल: पुतिन 
उन्होंने कहा कि इन्हीं उभरते खतरों से निपटने के लिए मॉस्को को नई हाइपरसोनिक मिसाइलें विकसित करनी पड़ी हैं। पुतिन ने कहा, ‘हमें क्या करना चाहिए? हमें उन लोगों को जवाब देने के लिए कुछ वैसा ही विकसित करना होगा जिसके बल पर वो हमारे लिए खतरा उत्पन्न कर रहे हैं। और हम आज भी ऐसा कर सकते हैं।’ उन्होंने कहा कि एक नई हाइपरसोनिक मिसाइल अगले साल की शुरुआत में नौसेना में शामिल की जाएगी। ये नई हाइपरसोनिक मिसाइल भी पांच मिनट के अंदर ही अपने निशाने तक पहुंच सकती है।

‘सभी पक्षों के हितों का ध्यान रखने वाले समझौतों पर शुरू की जाए वार्ता’ 
पुतिन ने जिस मिसाइल की बात की उसका नाम जिरकॉन हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल है। यह ध्वनि की गति से नौगुना अधिक तेजी से उड़ान भर सकती है और इसकी मारक क्षमता लगभग 1000 किलोमीटर है। परीक्षणों के कई दौर से गुजर चुकी इस हाइपरसोनिक मिसाइल का सोमवार को ही एक सफल परीक्षण किया गया था। पुतिन ने कहा कि किसी भी तरह से अनावश्यक तनाव से बचने के लिए, रूस और पश्चिमी देशों को उन सभी समझौतों पर बातचीत करनी चाहिए जो सभी पक्षों के सुरक्षा हितों का सम्मान करने वाले हैं।

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