फिलीस्‍तीन (Palestine) का नाम जब कभी भी आप सुनते होंगे, आपके दिमाग में उस देश की तस्‍वीर आती होगा जो पिछले 7 दशकों से इजरायल (Israel-Palestine Conflict) के साथ एक विवाद का हिस्‍सा है. मगर आज हम आपको एक ऐसी खबर बताने जा रहे हैं, जो आपको कई मायनों में प्र‍ेरित करेगी.

फिलीस्‍तीन की रहने वाली जिहाद भुट्टो ने अपनी ग्रेजुएशन की डिग्री हासिल की है. अब आपको लगेगा कि आखिर ग्रेजुएशन की डिग्री कौन सी बड़ी बात है. जिहाद भुट्टो की उम्र 85 साल है और इस उम्र में उन्‍होंने अपनी ग्रेजुएशन की डिग्री हासिल की है.

12 साल की उम्र में छोड़ी पढ़ाई

जिहाद भुट्टो ने इजरायल के कफ्र बारा में अपनी डिग्री हासिल की है. इस डिग्री के लिए उन्हें 85 साल तक इंतजार करना पड़ा. जिहाद भुट्टो के बच्चे और पोते-पोतियां, नाते-नातिन उन्हें बधाई देने पहुंचे. आखिर यह दिन लंबे इंतजार के बाद आया था. जाहिर है, भुट्टो बेहद खुश थीं. उन्होंने वो हासिल किया, जिसकी तमन्ना उन्हें ताउम्र रही. वह हमेशा से ग्रेजुएट होना चाहती थीं. जिहाद भुट्टो जब 12 साल की थीं तो उन्हें पढ़ाई छोड़नी पड़ गई थी. साल 1948 में उनका स्‍कूल जरूर छूट गया मगर पढ़ने की इच्छा नहीं छूटी.

पढ़ने की इच्‍छा और ग्रेजुएट होने के इसी सपने के दम पर उन्होंने 81 साल की उम्र में दोबारा पढ़ाई शुरू की. भुट्टो ने इजरायल के कफ्र बारा सेंटर फॉर इस्लामिक स्ट्डीज में दाखिला लिया और भाषा, धर्म और गणित की पढ़ाई शुरू की. चार साल बाद उनकी मेहनत रंग लाई और वह ग्रेजुएट हो गईं. उन्हें डिग्री देते हुए टीचर्स और अधिकारी भी गर्व महसूस कर रहे थे. यह आयोजन भुट्टो के लिए ही नहीं सेंटर के भी विशेष था. उन्होंने इससे पहले कभी इतने विशेष छात्र को डिग्री नहीं दी थी.

पढ़ने के हर मौके को भुट्टो ने लपका

न्‍यूज एजेंसी रॉयटर्स से बात करते हुए भुट्टो ने कहा, ‘मुझे पढ़ने का मौका मिला. जब भी मुझे मुझे शिक्षा पाने का कोई मौका मिलता है, मैं उसे लपक लेती हूं. पिछली बार जब मैंने कफ्र बारा में दाखिला लिया था तो सभी जान गए कि मुझे शिक्षा से कितना लगाव है. लेकिन मैं आम किताबें पढ़ रही थीं, कोर्स की किताबें नहीं.’

तब किसी ने भुट्टो को सेंटर के कोर्स के बारे में बताया और पूछा कि क्या वह यह कोर्स करना चाहेंगी. भुट्टो के लिए ना करने का सवाल ही नहीं था.वह बताती हैं, ‘उन्होंने मुझे सर्टिफिकेट के बारे में बताया और मुझसे पूछा कि दाखिला लेना है. मैंने कहा कि जहां कहीं शिक्षा है, वहां मैं जाऊंगी. तब दो दोस्तों ने मेरा रजिस्ट्रेशन करा दिया और मैंने यहां पढ़ाई की.’

सबके लिए मिसाल सात बच्चों की मां जिहाद भुट्टो अपनी क्लास में भी और छात्रों के लिए मिसाल थीं. वह बताती हैं, ‘ टीचर्स मेरे बारे में बहुत बात करते थे. उन्होंने मुझे दूसरे छात्रों के लिए एक उदाहरण बना दिया था. जब मैं ग्रेजुएट हुई तो लोगों ने स्कूल के डीन से पूछा कि क्या वे लोग मेरी मदद करते थे. डीन ने कहा, नहीं, बल्कि इसके उलट, मैं अलग-अलग विषयों पर दूसरे छात्रों की मदद करती थी.’

शिक्षा के लिए जिहाद भुट्टो का अभियान रुका नहीं है. अब वह अपने समुदाय की महिलाओं को पढ़ा रही हैं. कफ्र बारा इजरायल के सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट में एक काउंसिल है, जहां अरब आबादी की वाले कई लोग रहते हैं.

क्‍या है इजरायल का कफ्र बारा

करीब चार हजार लोगों का यह कस्बा साल 1948 से इजरायल का हिस्सा है. यूं तो यह एक आम कस्बा है, लेकिन इसकी चर्चा शिक्षा के प्रोत्साहन के लिए उठाए गए कदमों को लेकर अक्सर होती है. यहां का हाई स्कूल भी चर्चित रहा है, जहां न सिर्फ पढ़ाई के लिए बेहतरीन सुविधाएं हैं बल्कि ऑटिस्टिक बच्चों के लिए विशेष सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं. मिडिल और हाई स्कूल में छात्रों को ही इन ऑटिस्टिक बच्चों का निर्देशक बनाया गया है और वे बच्चों की सीखने में मदद करते हैं. इस मकसद के लिए काउंसिल ने एक बाल विशेषज्ञ को रखा है, जो यह योजना चलाता है.

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