नई दिल्ली. दिल्ली दंगा (Delhi Riots) मामले को लेकर शुक्रवार को कड़कड़डूमा कोर्ट (Karkardooma Court) में सुनवाई हुई. सुनवाई के दौरान JNU के पूर्व छात्र नेता और दिल्ली दंगा के आरोपी उमर खालिद (Umar Khalid) के वकील ने दिल्ली पुलिस की चार्जशीट पर कोर्ट में अजीबोगरीब दलील पेश की. उमर खालिद के वकील ने कार्ट से कहा कि दिल्ली पुलिस की चार्जशीट अमेजन प्राइम की वेब सीरीज ‘द फैमिली मैन’ की तरह है, क्योंकि दिल्ली पुलिस की चार्जशीट के पीछे कोई सबूत और एविडेंस नहीं है.

उमर खालिद के वकील ने सुनवाई के दौरान कोर्ट में कहा कि एफआईआर 59- 2020 को लेकर  चार्जशीट को पढ़कर ऐसा लगता है जैसे कुछ चैनलों की 9:00 पीएम की स्क्रिप्ट है. चार्जशीट में 2016 के जेएनयू टुकड़े टुकड़े नारे का जिक्र किया गया है. जबकि 2016 में उमर खालिद पर नारे लगाने का आरोप नहीं है. वहीं, अब मामले में 6 तारीख को फिर सुनवाई होगी.

वास्तव में लोगों को एकता का संदेश दिया था
वहीं, पिछले महीने खबर सामने आई थी कि उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों की साजिश के मामले में गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम के तहत गिरफ्तार किए गए जेएनयू के पूर्व छात्र नेता उमर खालिद ने कड़कड़डूमा कोर्ट को बताया कि पुलिस के दावों में कई विरोधाभास है. और इसे बढ़ाचढ़ा कर पेश किया है. खालिद के वकील ने कोर्ट को बताया कि पुलिस द्वारा दर्ज एफआईआर में केवल उमर खालिद को केवल फंसाया गया है.

वकील ने दिल्ली पुलिस के दावों में दो विरोधाभासों की ओर इशारा किया था. सबसे पहले उन्होंने अदालत को महाराष्ट्र में खालिद के भाषण की 21 मिनट की वीडियो क्लिप दिखाई, जिसे अभियोजन पक्ष ने कथित तौर पर भड़काऊ करार दिया था. वीडियो दिखाने के क्रम में वकील ने अदालत को अवगत कराया कि उनके मुवक्किल ने भाषण के माध्यम से हिंसा का कोई आह्वान नहीं किया और वास्तव में लोगों को एकता का संदेश दिया.

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