नई दिल्ली। दुनिया के सबसे गरीब देश नाइजर में कोरोना संक्रमण के मामले शून्य हो चुके हैं। वहीं इससे कम आबादी वाले देशों में कोरोना का कहर देख वैज्ञानिक हैरान हैं। नाइजर में मरीजों के अभाव के कारण अस्पतालों के कोविड वार्ड बीते कई महीनों से खाली पड़े हैं। इस अफ्रीकी देश ने कोरोना वायरस के मामलों को लेकर शोध कर रहे वैज्ञानिकों को ये सोचने पर मजबूर कर दिया है कि आखिर कैसे इस गरीब देश में महामारी काबू में है। आपको बता नाइजर एक मुस्लिम बहुल देश है यहां 93 प्रतिशत लोग इस्लाम धर्म को मानते है.

वैक्सीन का निर्यात 

करीब 2.3 करोड़ की आबादी वाले इस देश में बीते कई दिनों से कोरोना वायरस का एक भी नया मामला सामने नहीं आया है। नाइजर में कोरोना रोधी वैक्सीन की मांग न के बराबर है। इस कारण सरकार अन्य देशों या संस्थाओं से मिले दान के टीके की हजारों खुराकें निर्यात कर रही है।

अब तक केवल 193 मौतें

अच्छी आबादी के बावजूद इस देश में कोरोना संक्रमण से अब तक केवल 5573 मामले सामने आए हैं। महामारी से कुल 193 लोगों की मौत हुई है। यहां पर कोरोना के सक्रिय मामलों की संख्या 109 है। इनमें से दो मरीजों की हालत गंभीर बताई जा रही है। कोरोना संक्रमण न के बराबर होने की वजह से यहां के लोगों को मास्क लगाने की आदत नहीं है।

दुनिया का सबसे गरीब देश

नाइजर मानव विकास सूचकांक के आधार पर दुनिया के सबसे गरीब देशों में गिना जाता है। संयुक्त राष्ट्र की ओर से जारी 189 देशों की सूची लगातार 189वें नंबर हैं। पश्चिमी अफ्रीका के सबसे बड़े देश का 80 फीसदी क्षेत्र सहारा मरुस्थल का भाग है। यहां पर कृषि योग्य उपजाऊ जमीन कम है।

डब्ल्यूएचओ की आशंकाएं गलत निकलीं

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) और संयुक्त राष्ट्र ने ऊंची जन्म दर और गरीबी को देखते हुए नाइजर में बड़े पैमाने पर संक्रमण की आशंका जाहिर की थी। संयुक्त राष्ट्र ने महामारी के कारण लाखों लोगों के मरने की आशंका जताई थी। मगर कोरोना का नाइजर पर बिल्कुल भी असर नहीं देखने को मिला। वहीं कोरोना ने अन्य अफ्रीकी देशों में संक्रमण ने जमकर कहर बरपाया है। नाइजर से कम आबादी वाले देशों में कोरोना के मामले ज्यादा हैं। इजराइल, नार्वे, लाताविया, हंगरी, ग्रीस में नाइजर से ज्यादा मामले सामने आए हैं।

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