नया इस्लामिक देश बनाने को लेकर मुस्लिमों का बड़ा ऐलान, झंडे को लेकर कही बड़ी बात 

मनोरंजननया इस्लामिक देश बनाने को लेकर मुस्लिमों का बड़ा ऐलान, झंडे को लेकर कही बड़ी बात 

यूएई की राजधानी अबू धाबी में हाल ही में वर्ल्ड मुस्लिम कम्युनिटीज काउंसिल की 2 दिवसीय कॉन्फ्रेंस हुई है। इस दौरान यूएई, रूस, तुर्की, सीरिया, मिस्र और अजरबैजान समेत कई देशों के मुस्लिम धार्मिक नेताओं ने हिस्सा लिया।

हालांकि, कॉन्फ्रेंस में मिस्र के मंत्री ने जो भाषण दिया, वो काफी सुर्खियों में है।

मिस्र के मंत्री डॉ़. मोहम्मद मोख्तार गोमा ने इस्लामिक एकता को लेकर कहा कि मुस्लिम समाज को दो तरीकों से एकजुट किया जा सकता है। पहला विवेकशील और तर्कसंगत तरीका है जिसकी मिसाल इस कॉन्फ्रेंस के जरिये दी जा रही है। दूसरा तरीका काल्पनिक और असंभव है जिसका इस्तेमाल चरमपंथी और आतंकवादी संगठन अपने फायदे के लिए कर रहे हैं। ये दुनियाभर के मुस्लिमों को एक राष्ट्र और एक झंडे के तहत लाने का प्रयास कर रहे हैं।

उन्होंने कहा, हमारे आधुनिक समय में किसी नवगठित देश के तहत इस्लामिक एकता लाने की असंभव कोशिश करने के बजाय अपने देश, झंडे और भूमि के प्रति ईमानदारी रखना अधिक जरूरी है। डॉ. गोमा ने कहा कि यह व्यर्थ का प्रयास राष्ट्र को कमजोर करता है और गैर मुस्लिम समुदायों में रह रहे मुस्लिम अल्पसंख्यकों को अलग-थलग करता है।

इस कॉन्फ्रेंस के पहले दिन यूएई के सहिष्णुता मंत्री शेख नाहयान बिन मुबारक ने कहा कि मुस्लिम समाज में एकता का आधार विज्ञान होना चाहिए। कॉन्फ्रेंस के दौरान विशेषज्ञों ने मुस्लिम समुदाय को एकजुट करने के धार्मिक, सामाजिक और राजनीतिक पहलुओं पर चर्चा की। शेख नाहयान ने कहा, मैं कोई विशेषज्ञ नहीं हूं लेकिन इस्लाम, विज्ञान और ज्ञान का धर्म है इसलिए यह जरूरी है कि विज्ञान और रिसर्च मुस्लिम एकता की नींव बने।

शेख नाहयान ने यह भी कहा कि पर्यावरणीय स्थिरता और खाद्य सुरक्षा जैसे अन्य विषयों को एकजुट मुस्लिम समाज का केंद्र होना चाहिए। उन्होंने कहा, यूएई सहिष्णुता, राष्ट्रनिर्माण और विकास का उदाहरण है। मुस्लिम समाज में एकता लाने के लिए इसके भीतर और बाहर की चुनौतियों को समझने की जरूरत है। 

मैरीलैंड यूनिवर्सिटी ने 2016 में दुनियाभर में आतंकवाद को लेकर एक स्टडी की थी जिसमें एक दशक में 70,767 आतंकवादी हमलों पर गौर किया गया था। इस स्टडी से पता चला था कि इनमें से 85 फीसदी हमले आईएसआईएस और अल कायदा समूहों ने मुस्लिम बाहुल्य देशों में किए और इन हमलों के पीड़ितों में अधिकतर मुस्लिम ही थे।

गोमा ने कहा, कुरान की आयतों को उस समय, स्थान और संदर्भ में समझना जरूरी है जिसके लिए वे बने थे, ना कि उस तरीके से जिस तरह से आतंकवादी समूह अपने हितों को साधने के लिए उनका इस्तेमाल कर रहे हैं। वर्ल्ड मुस्लिम कम्युनिटीज काउंसिल के महासचिव मोहम्मद बेचारी ने द नेशनल वेबसाइट से कहा कि ये कॉन्फ्रेंस इस्लामिक एकता की सही समझ की दिशा में पहला कदम है।

उन्होंने कहा, मुस्लिम समाज के भीतर भी फूट है, जिसे दुरुस्त करने की जरुरत है। सुन्नी समुदाय के मुस्लिमों को चुनौतियों का सामना करना पड़ता है जबकि शिया समूह आज इस कार्यक्रम में मौजूद हैं। भविष्य में इस तरह की और बातचीत और करनी होगी।

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