मुख्तार अब्बास नकवी ने दिया मोदी सरकार में केंद्रीय मंत्री पद से इस्तीफा

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केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने इस्तीफा दे दिया है. वे अल्पसंख्यक मामलों का विभाग संभाल रहे थे.नकवी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करने के बाद इस्तीफा दिया. नकवी आज अपनी आखिरी कैबिनेट बैठक में शामिल हुए. इस बैठक में पीएम मोदी ने मंत्री के तौर पर नकवी के योगदान की तारीफ की. स्टील मंत्री आरसीपी सिंह के लिए भी आज कैबिनेट की आखिरी बैठक थी.

इस बैठक में पीएम मोदी ने दोनों केंद्रीय मंत्रियों को विदाई देते हुए कहा था कि दोनों ने मंत्रियों रहते हुए देश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है. इन दोनों ही मंत्रियों का राज्यसभा कार्यकाल सात जुलाई को समाप्त हो रहा है. मुख्तार राज्यसभा के सदस्य थे. उनका कार्यकाल गुरुवार को खत्म होने जा रहा है. नकवी को इस बार बीजेपी ने राज्यसभा नहीं भेजा है. माना जा रहा है कि पार्टी उन्हें बड़ी जिम्मेदारी दे सकती है.

इसके अलावा, मोदी मंत्रिमंडल में जदयू कोटे से मंत्री आरसीपी सिंह का भी गुरुवार को राज्यसभा का कार्यकाल खत्म होने जा रहा है. ये दोनों नेता फिलहाल 6 जुलाई के बाद किसी भी सदन के सदस्य नहीं होंगे. हालांकि बिना सांसद रहे भी छह महीने तक मंत्री रह सकते हैं, लेकिन पीएम मोदी ने कैबिनेट में विदाई दे दी.

मोदी मंत्रिमंडल में 8 साल से थे मुख्तार

नकवी 2010 से 2016 तक यूपी से राज्यसभा सदस्य रहे. 2016 में वे झारखंड से राज्यसभा भेजे गए. नकवी पहली बार 1998 में लोकसभा का चुनाव जीते और अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में सूचना और प्रसारण मंत्रालय में राज्य मंत्री बनाए गए थे. उसके बाद 26 मई 2014 में मोदी सरकार में अल्पसंख्यक मामलों और संसदीय मामलों के राज्य मंत्री बने. 12 जुलाई 2016 को नजमा हेपतुल्ला के इस्तीफे के बाद उन्हें अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय का स्वतंत्र प्रभार मिला. 30 मई 2019 को मोदी कैबिनेट में शामिल हुए और अल्पसंख्यक मामलों का मंत्रालय बना रहा.

अब उपराष्ट्रपति-राज्यपाल के लिए नाम की चर्चा

फिलहाल, दोनों के भविष्य को लेकर कई तरह की अटकलें चल रही हैं. नकवी का नाम उपराष्ट्रपति से लेकर कई अन्य राज्यों के गवर्नर या एलजी के तौर पर चल रहा है. वहीं आरसीपी सिंह के बीजेपी में आने की चर्चा है. एक दिन पहले ही बीजेपी ने स्पष्ट किया कि आरसीपी अभी पार्टी में शामिल नहीं हुए हैं. आरसीपी सिंह अगर बीजेपी में शामिल होते हैं तो यह शायद जेडीयू को रास नहीं आएगा. हालांकि राज्यसभा में राष्ट्रपति की ओर से मनोनयन की सात सीटें खाली हैं. उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए नामांकन शुरू हो चुका है. संभावना है कि एनडीए जल्दी ही अपने उम्मीदवार के नाम का ऐलान करेगा.

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