पहले पत्नी ने बदनाम किया, घरेलू हिंसा के आरोप लगाए। फिर मैच फ़िक्सिंग का हवाला देकर दिल्ली कैपिटल्स ने सैलरी रोक दी, टीम इंडिया से बाहर कर दिए गए, गिद्ध मिडिया ने आतंकवादियों जैसा बर्ताव किया। चोटिल हुए, घुटनों का ऑपरेशन करवाया, इसके बावजूद ना स्पीड घटी, ना स्विंग खराब हुई, ना हौसला टूटा और ना ही भारत के लिए खेलने की प्रतिबद्धता।

नाम शमी है, नाम के पहले मोहम्मद लगा है। हर मैच में बेस्ट देकर खुद को साबित करता है, भारत को कई मुकाबले सिंगल हैंडली जीतवाएं है। लेकिन बावजूद इसके एक सवाल है जो अब भी कायम है।।

वही सवाल जो इस देश का बहुसंख्यक समाज जहिर खान, इरफान पठान, युसुफ पठान, मो• कैफ, मो• अजहरूदीन, वसीम जाफर और मो• सिराज से पूछता है। वही सवाल जो भारत-पाक मैच के दौरान इस देश के मुसलमानों से पूछे जाते है, वही सवाल जो आज शामी से पूछे जा रहे है।

आज शामी को गाली दे दीजिए, पाकिस्तान परस्त घोषित कर दीजिए, देशभक्ति का सर्टिफिकेट भी मांग लीजिए.! लेकिन इतना याद रखिए, कल वो अपने खेल से आपकी निर्लज्जता की चादर को जरूर उधेरेगा.!

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