13.1 C
Delhi
Monday, December 5, 2022
No menu items!

मोदी-योगी शहरों, सड़कों, गलियों के नाम बदल रहे हैं उधर चीन ने अरूनाचल प्रदेश का नाम बदल कर रखा

- Advertisement -
- Advertisement -

2014 में भारत में 1200 वर्षों की मुस्लिम और अंग्रेज़ो की ग़ुलामी के बाद कट्टर राष्ट्रवादियों की सरकार बनी थी, ये सरकार भारत के विश्व गुरु और अखन भारत बनाने का उदेश लेकर आयी थी, भारत में 1200 के बाद चक्रवर्ती प्रधानमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी ने सत्ता संभाली थी, सत्ता में आने के बाद इस सरकार ने देश, देश की जनता के भले के लिए तो काम नहीं किया बल्कि 1200 वर्षों के काल में मुसलमानों ने जो अपराध और अत्याचार भारत के मूल निवासी और मालिक राष्ट्रवादी हिन्दुत्वादियों के ऊपर किये ते उनका बदला लेने के लिए मुसलमानों की शान, पहुंचान से जुड़े राजाओं के नामों पर रखे गए शहरों, सड़को के नाम बदल दिए, इसी तरह उत्तर प्रदेश की सत्ता में आने के बाद प्रदेश के मुख्या मंत्री योगी आदित्यनाथ ने दीवारों, मकानों के रंग गेरुआ रंग में रंग डाले, मुसलमानों के नामों पर मौजूद शहरों के नाम बदल दिए, गली, सड़कों के नाम बदल डाले, सत्ता में बड़ी ताकात होती ये ये राष्ट्रवादी सरकारों ने बताने में कोई कसार छोड़ी,,,आज भी देशभर में बदले लेने का काम जारी है, धर्म सांसदों के आयोजन कर लोगों को मुसलमानों के सामूहिक सफाये के लिए प्रेरित किया जा रहा है, उधर पडोसी देश चीन लद्दाख के बड़े भाग पर कब्ज़ा कर के बैठा है, साथ ही चीन ने अरुणांचल प्रदेश में कई गॉंव बसा लिए हैं अब तो चीन ने अरुणांचल प्रदेश का नाम ही बदल दिया है

साल के अन्त मे चीन ने हम सब देशवासियों के लिए एक दुर्भाग्यपूर्ण खबर दिया है, चीन ने अरूनाचल प्रदेश का नाम-पता बदल कर “ज़ैंगनान” और 14 जगह का चाईनिज़ नामकरण कर दिया है। यह बहुत अफ़सोसनाक और खेदजनक बात है। इस की जितनी भर्त्सना की जाय कम है। 
चीन ने नाम-पता बदलना हम लोगो से सिखा है।

चीन का आक्रामक रुख़ जारी, अरुणाचल प्रदेश के 15 स्थानों के नाम बदले

चीन के नागरिक मामलों के मंत्रालय द्वारा जांगनान (अरुणाचल प्रदेश) के 15 स्थानों के नामों को चीनी, तिब्बती और रोमन में जारी करने का भारत ने कड़ा विरोध करते हुए कहा है कि नामों के बदलने से ज़मीनी हक़ीक़त नहीं बदल सकती।

चीनी सरकार के अंग्रेज़ी अख़बार ग्लोबल टाइम्स ने गुरुवार को अपनी रिपोर्ट में यह ख़ुलासा किया था कि जिन 15 जगहों के आधिकारिक नामों का एलान किया गया है, उनमें से 8 आवासी इलाक़े, 4 पहाड़, दो नदियां और एक पहाड़ी दर्रा है।

ग्लोबल टाइम्स का कहना है कि मंत्रालय की ओर से दूसरी बार जांगनान में स्थानों के नामों का आधिकारिक एलान किया गया है, और आगे भी ऐसा किया जाता रहेगा।

इस बीच, भारतीय विदेश मंत्रालय ने अरुणाचल प्रदेश की कुछ जगहों का नया नाम रखने के चीन के क़दम पर सख़्त आपत्ति जताते हुए कहा है कि अरुणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न अंग है।

भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बाग़ची का कहना था कि हमने इस तरह की रिपोर्टें देखी हैं। ऐसा पहली बार नहीं है जब चीन ने अरुणाचल प्रदेश में स्थानों के नाम बदलने का प्रयास किया है। चीन ने अप्रैल 2017 में भी इस तरह से नाम बदलने की कोशिश की थी।

चीन अरुणाचल प्रदेश को दक्षिण तिब्बत का हिस्सा बताते हुए इस पर अपना दावा करता रहा है।

ग्लोबल टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक़, यह घोषणा इन जगहों के नामों के बारे में एक राष्ट्रीय सर्वेक्षण के बाद की गई है और यह नाम सैकड़ों सालों से चले आ रहे हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है कि इन जगहों आधिकारिक नामों का एलान एक जायज़ क़दम है और आगे चलकर भी इस क्षेत्र में और जगहों के आधिकारिक नामों की घोषणा की जाएगी।

भारत और चीन मामलों के जानकारों का मानना है कि भारत की वर्तमान आंतरिक स्थिति और प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार को चीन अपने लिए एक सुनहरा अवसर मान रहा है। यही वजह है कि चीन ने भारत के सीमा विवाद पर हालिया वर्षों में बेहद आक्रामक रुख़ अपनाया है।

दूसरी ओर मोदी सरकार ने भारतीय जनता के सामने अपनी छवि बचाने के लिए चीन के साथ विवाद के मुद्दे पर पर्दा डालने की कोशिश की है, जिससे चीन का साहस बढ़ता ही चला जा रहा है।

- Advertisement -
Latest news
- Advertisement -
Related news
- Advertisement -spot_img

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here