कई मंत्री भी आएगे जद में, हुकूमत मुखालिफ बयानात देने वालो पर गाज गिरना तय, अगस्त में सर्वे कराने की तैयारी, ईलाके में मकबूलियत और कारगरदगी होगे अहम निकात।

BJP और इसकी नज़रिया साज तंजीम RSS मिशन 2022 पर मंसूबा बंद तरीके से काम कर रही हैं। बरसर एकतेदार जमाअत बाकी रियासतो की तरह यूपी में भी अपना पुराना फार्मूला अपनाएगी। यानी तकरीबन एक तिहाई मौजूदा मेम्बर असैम्बली के टिकट काटे जाएगे। जिनमे कई मंत्री भी होगे।

हालांकि टिकट काटने के इस फैसले पर हथ्थमी मुहर पार्टी व RSS के सर्वे के बाद लगेगी मगर यह माना जा रहा है कि इसी बहाने उन लीडरो को इंतिखाबी दंगल में मुकाबला आराई से दूर कर दिया जाएगा जो हुकूमत व पार्टी के लिए परेशानी का सबब बनते रहे हैं। इनमे उन मंत्रीयो को भी शामिल रखा जायेगा जो प्रफामेंस के पैमाने पर खरे न उतर सके। साथ ही टिकट बटवारे में Age Factor भी एक अहम नुकता होगा।

पार्टी टिकट के ताल्लुक़ से हथ्थमी फैसला से पहले एक सर्वे करायेगी। ऐन मुमकिन है कि यह सर्वे RSS के कार्यकर्ताओ से कराया जाएगा। आम तौर पर RSS का सर्वे ही बीजेपी में टिकट तकसीम का पैमाना होता है। सूत्रों के मुताबिक, अगस्त में यह सर्वे शुरू होगा जो सितम्बर तक हर हाल में मुकम्मल कर लिया जाएगा। आईंदा असैम्बली इलेक्शन अगले साल फरवरी-मार्च में होगा।

पार्टी जिस निकात पर सर्वे करायेगी मेम्बरान असैम्बली की कारगर्दगी, इलाके में इनकी मौजूदगी व छवि, मुकामी पार्टी के कारकिनो के साथ पकड़, आईंदा इलेक्शन में इन्हें उम्मीदवार बनाया जाएगा या नहीं इस पर पार्टी कार्यकर्ताओं की राय अहम होगी।

मौजूदा मेम्बरान असैम्बली में से तकरीबन एक तिहाई का टिकट काटने का फार्मूला नरेंद्र मोदी के बतौरे खास अपने दौरे वजीर ए आला, गुजरात में अपनाया था। उन्होने जब अपने पहले इलेक्शन में इसे हिट पाया तो यह एक लाज़मी जुज हो गया।

दैगर बीजेपी की जेरे एकतेदार रियासतो में भी अपनाया जाने लगा। मध्यप्रदेश और राजस्थान में भी इस फार्मूले के तहत टिकट दिये थे। मगर दोनों ही रियासतो में बीजेपी को कांग्रेस के हाथो शिकस्त मिली थी।

बीजेपी दूसरी पहलूओ पर काम कर रही हैं। योगी कैबिनेट में अगली तौसी भी इसमे से एक है। इंतिखाबी सीजन के सबब किसी भी वजीर की छुट्टी तो नही होगी मगर कई मंत्रीयो के कलमदान में तबदीली यकीनी है।

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journalist | chief of editor and founder at reportlook media network

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