ममता दीदी का ऐलान, पेगासस जासूसी कांड की जांच करेगी बंगाल सरकार

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पश्चिम बंगाल (West Bengal) सरकार ने पेगासस जासूसी मामले (Pegasus Project) की जांच के लिए दो सदस्य की जांच कमेटी की घोषणा की है. सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज, जस्टिस मदन लोकूर इस कमेटी की अध्यक्षता करेंगे. LiveLaw के मुताबिक, कलकत्ता हाईकोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस ज्योतिर्मय भट्टाचार्य इस कमेटी के दूसरे सदस्य होंगे.

जस्टिस लोकुर 2018 में सुप्रीम कोर्ट से रिटायर हुए और जस्टिस भट्टाचार्य उसी साल हाईकोर्ट से रिटायर हुए थे.

ये बताते हुए कि पश्चिम बंगाल इस मामले में जांच शुरू करने वाला पहला राज्य है, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा, “पेगासस के जरिये से, न्यायपालिका और समाज सहित सभी को निगरानी में रखा गया है. हमें उम्मीद थी कि संसद के दौरान, केंद्र सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच करेगा, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया.”

ममता बनर्जी ने कहा कि वो उम्मीद करती हैं कि इस छोटे से कदम से दूसरे भी जागेंगे. उन्होंने कहा, “हम इसे जल्द से जल्द शुरू करना चाहते हैं. बंगाल के कई लोगों को टैप किया गया है.”

मुख्यमंत्री ने ये भी कहा कि कमेटी अवैध रूप से हैकिंग, निगरानी, जासूसी और मोबाइल फोन की रिकॉर्डिंग आदि की जांच करेगा.

क्या है पेगासस जासूसी मामला?

इजरायली कंपनी NSO ग्रुप के पेगासस स्पाइवेयर से दुनियाभर के 10 देशों में करीब 50,000 नंबरों को संभावित सर्विलांस या जासूसी का टारगेट बनाया गया. लीक हुए डेटाबेस में 300 भारतीय फोन नंबर हैं.पेरिस स्थित नॉनप्रॉफिट मीडिया फॉरबिडन स्टोरीज और एमनेस्टी इंटरनेशनल के पास लीक हुए नंबरों की लिस्ट थी, जिसे बाद में उन्होंने द वाशिंगटन पोस्ट, द गार्जियन, ले मोंडे और द वायर समेत दुनियाभर के करीब 16 मीडिया संस्थानों के साथ शेयर किया, जिसके बाद इस मामले की जांच शुरू हुई. इस जांच को ‘पेगासस प्रोजेक्ट’ नाम दिया गया है.

जांच में सामने आया है कि भारत में करीब 40 पत्रकारों पर जासूसी की गई. वहीं, संभावित टारगेट लिस्ट में कांग्रेस नेता राहुल गांधी, चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर, और सबसे हैरान करने वाले दो नाम- मोदी सरकार में कैबिनेट मंत्री अश्विनी वैष्णव और प्रह्लाद सिंह का भी नाम सामने आया है. पूर्व चीफ जस्टिस रंजन गोगोई पर सेक्सुअल हैरेसमेंट का आरोप लगाने वाली महिला और उसके रिश्तेदारों का नंबर भी लिस्ट में शामिल था. वहीं, लेटेस्ट खुलासे के मुताबिक, BSF के दो अधिकारी, RAW के एक पूर्व वरिष्ठ अधिकारी और भारतीय सेना के कम से कम दो अफसरों को संभावित सर्विलांस का टारगेट चुना गया था.

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