एक समुदाय के लिए उसके लीडर का ठीक होना, आत्मनिर्भर होना, बौद्धिक रूप से, शैक्षणिक रूप से सबल होना उतना ही महत्वपूर्ण है जितना एक घर के लिए उसके अभिभावक का सच्चा, अच्छा, आत्मनिर्भर, तथा बौद्धिक व शैक्षणिक रूप से सबल होना।

2 पहलुओं पर चर्चा करता हूँ और आप समझें

◆1. मजबूरी का पहलू – चलने का तो वो घर भी चलता है जिसके अभिभावक हर लिहाज से दुर्बल होते है मगर क्या वो घर सुरक्षित होता है? क्या वो घर सम्पन्नता को प्राप्त करने में सफल रहता है? कदापि नहीं।
ऐसे घर मे पलने वाले सदस्यों को चाहिए कि वो निरंतर अपने मे से बेहतर से बेहतर को अभिभावक बनाते जाएं, साथ ही आने वाले समय में बेहतरीन लीडरशिप कैसे हासिल हो इसकी मेहनत भी जारी रखें। जैसा है ठीक है वाली सोच केवल गिराने का काम करेगी उठाने का नहीं।

यानि हमारा समाज अच्छे से चले इसके लिए अच्छे लीडर्स की ज़रूरत है। अगर हम गलती से भ्रष्ठ समाज का हिस्सा बन भी गए है तो हमें चाहिए कि अच्छे लीडर्स को ही नेतृत्व दें और आइंदा के लिए लांग टर्म प्लान बनाकर बेहतर नेतृत्व तैयार करें। नकली लीडर्ड से बचें क्योंकि ये केवल समाज को हानि पहुंचाते है।

◆2. आदर्श का पहलू – घर का अभिभावक अन्य सदस्यों के लिए आदर्श बनने का कार्य करते है। बाप अगर सख्ती से सच को प्रधानता दे, झूठ से बैर रखे, अनुशासन को तरजीह दे और उसूलपरस्ती से जीना पसंद करे तो इससे बच्चों में जिस भावना का संचार होता है वो भावना उन्हें नैतिक मूल्यों वाला व्यक्ति बनने में मददगार साबित होती है। ये मूल्य ही अगली पीढ़ी में क़ाबिल अभिभावक पैदा करती है।

ठीक यही स्थिति समुदाय के लीडर की है। उनका अच्छा व्यवहार, उनके उसूली फैसले अन्य सदस्यों में उनके प्रति सम्मान में बढ़ोतरी का कारण बनता है तथा वे भी उनका अनुसरण कसरते हुए उन्ही की तरह बनना चाहते है। इससे नई पीढ़ी को अच्छे लीडर्स मिलने की संभावनाओं को बल मिलता है। ऐसे में ये ज़रूरी हो जाता है कि वैचारिक रूप से पंगु तथा उसूल के मामले में बिन पेंदी के लोटे जैसी हरकत करने वालों को कभी भी लीडरशिप ना दी जाए।

अच्छी लीडरशिप के बगैर कामयाबी मुहाल है। इस्लाम मे लीडरशिप का महत इस हद तक है कि हुज़ूर सल्ल० के जिस्मे अतहर को दफन देने में 3 दिन की देरी तो बर्दाश्त कर ली गई मगर क़ौम को बिना लीडर के नहीं छोड़ा गया। पहले लीडर का इंतेखाब हुआ और बाद में तदफीन।

आप सल्ल० ने फरमाया – जब तीन लोग एक साथ सफर का इरादा करें तो उन्हें चाहिए कि अपने में से एक को अमीर मुन्तख़ब कर लें। – (अबु दाऊद)

अगर आप दिल्ली जा रहे हों तो क्या आप किसे अपना लीडर चुनेंगे?

ऐसे को जो अपनी समझ नहीं रखता हो, हमेशा ही दूसरों पर आश्रित रहते हुए फैसले लेता हो तथा किसी अन्य को कॉपी करने के चक्कर मे आपको दिल्ली ले जाने के बजाय पंजाब पहुंचा दे? या ऐसे को जो अपनी समझ रखता हो, आत्मनिर्भर हो तथा विचारिक रूप से मज़बूत हो? जवाब के लिए कमेंट सेक्शन खुला है!
-हिन्दी

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journalist | chief of editor and founder at reportlook media network

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