केरल हाईकोर्ट ने लक्षद्वीप प्रशासक प्रफुल्ल खोड़ा पटेल (Praful Khoda Patel) की तरफ से जारी दो आदेशों पर अंतरिम रोक लगा दी है. कोर्ट ने प्रशासन के डेयरी फार्मों को बंद करने और स्कूलों में मिडडे मील से मांसाहारी भोजन लेने के आदेश पर रोक लगा दी है.

कोर्ट ने कहा कि जब तक जवाबी हलफनामा दाखिल नहीं किया जाता, तब तक इन दोनों पर आगे कोई कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए. कोर्ट ने केंद्र सरकार से जवाबी हलफनामा दाखिल करने को कहा है. अदालत ने निर्देश दिया कि जनहित याचिका पर अगले सप्ताह फिर से विचार किया जाएगा, तब तक आदेशों पर आगे कोई कार्रवाई शुरू नहीं की जानी चाहिए.

याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि यह आदेश द्वीप के निवासियों की खाने की आदतों को बदलने के लिए दुर्भावनापूर्ण इरादे से पारित किया गया था. याचिकाकर्ता के अनुसार, यह प्रस्तावित पशु संरक्षण (विनियमन), 2021 के कार्यान्वयन की एक प्रस्तावना थी, जो गौ हत्या, बीफ और बीफ उत्पादों की खपत पर प्रतिबंध लगाने का प्रयास करता है.

पशुपालन विभाग के निदेशक ने 21 मई को डेयरी फार्मों को बंद करने का आदेश पारित किया था. आदेश में पशुपालन विभाग की तरफ से संचालित सभी डेयरी फार्मों को तत्काल बंद करने का आदेश दिया गया था.

‘गोमांस पर पाबंदी लगाने का निर्णय खुद ले लिया’

वही लक्षद्वीप और केरल की विपक्षी पार्टियों का आरोप है कि पटेल ने पशुओं के संरक्षण का हवाला देते हुए मुस्लिम बहुल द्वीपों पर शराब के सेवन से प्रतिबंध हटाने और गोमांस पर पाबंदी लगाने का निर्णय खुद ही ले लिया. साथ ही उन्होंने तटरक्षक कानून के उल्लंघन का हवाला देकर तटीय इलाकों में बने मछुआरों के शेड तुड़वा दिए.

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