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Sunday, April 14, 2024

कर्नाटक: सिख लड़की को दी स्कूल में पगड़ी पहनने की इजाजत, लेकिन हिजाब पर रोक

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हिजाब विवाद पर कर्नाटक हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश का हवाला राज्य के एक कॉलेज ने अमृतधारी सिख लड़की को पगड़ी हटाने के लिए कहा है। इसके बाद मंगलुरु के एक स्कूल ने एक छात्र को पगड़ी के साथ प्रवेश से वंचित कर दिया। एक एनजीओ के हस्तक्षेप के बाद, मामले को मुख्यमंत्री कार्यालय में ले जाया गया और छात्रा को कक्षाओं में जाने की अनुमति दी गई।

मामला सामने आने के बाद बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) ने चाइल्डलाइन से इस संबंध में एक रिपोर्ट पेश करने को कहा है। बता दें कि कर्नाटक के मंगलुरु में एक निजी स्कूल ने पगड़ी पहनने के कारण 6 साल के एक सिख लड़के को प्रवेश देने से इनकार कर दिया था। 

सीडब्ल्यूसी के अध्यक्ष रेनी डिसूजा ने कहा कि सिख समुदाय के छात्रों को ‘पटका’ और ‘करा’ पहनने की अनुमति थी और फिर भी छात्र को कक्षाओं में जाने से क्यों रोका गया।

इस मामले को उठाने वाले एनजीओ राष्ट्रीय सिख संगत के बलविंदर सिंह ने कहा कि माता-पिता ने घटना के बारे में एनजीओ को सूचित करने के बाद मुख्यमंत्री कार्यालय से संपर्क किया। उन्होंने कहा कि “हम सिख समुदाय के लोगों को भारतीय संविधान द्वारा प्रदान किए गए अधिकारों को उजागर करने के लिए मुख्यमंत्री और प्राथमिक व माध्यमिक शिक्षा मंत्री बीसी नागेश को धन्यवाद देना चाहते हैं। सिख समुदाय के सदस्यों को पगड़ी पहनने और कृपाण ले जाने की अनुमति है।

5 फरवरी को कर्नाटक सरकार ने “ऐसे कपड़े जो कानून और व्यवस्था के खिलाफ थे” पर प्रतिबंध लगा दिया था और 10 फरवरी को हाईकोर्ट ने सभी धार्मिक संगठनों पर अस्थायी रूप से प्रतिबंध लगा दिया था क्योंकि इसने प्रतिबंधों को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई की थी।

वही, शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) के अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी ने कर्नाटक के मैंगलोर में एक छह साल के बच्चे को स्कूल में दाखिले से इनकार करने को सिखों की धार्मिक स्वतंत्रता पर हमला करार दिया है।

उन्होंने कहा कि इससे पहले कर्नाटक में, एक अमृतधारी सिख लड़की से बेंगलुरु के एक कॉलेज ने सवाल किया था कि क्या वह अपनी पगड़ी उतारकर कक्षाओं में भाग ले सकती है? 
एसजीपीसी अध्यक्ष ने शनिवार को कहा कि ये घटनाएं देश के संविधान का उल्लंघन हैं क्योंकि भारतीय संविधान सभी को धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार देता है। उन्होंने कर्नाटक के मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई से दक्षिण भारतीय राज्य में सिखों के खिलाफ इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाने को कहा।

एडवोकेट धामी ने कहा, “कर्नाटक में सिखों की धार्मिक स्वतंत्रता का दमन किया जा रहा है और इसे बर्दाश्त नहीं किया जा सकता है।” उन्होंने कहा कि एसजीपीसी का एक प्रतिनिधिमंडल जल्द ही ऐसे सिख मुद्दों पर चर्चा करने के लिए कर्नाटक के सीएम से मुलाकात करेगा और बैठक के लिए समय तय करने के लिए सीएम बोम्मई को पत्र लिखा गया है।

इस बीच,एसजीपीसी अध्यक्ष ने दिल्ली में छात्रों को धार्मिक पोशाक में स्कूलों में नहीं आने के निर्देश पर भी कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि दक्षिण दिल्ली नगर निगम की शिक्षा समिति के अध्यक्ष द्वारा शक्षिा विभाग को इस तरह के नर्दिेश जारी किए गए। उन्होने कहा, ह्ल छात्रों के बीच मतभेदों और असमानता के नाम पर, धार्मिक चिंताओं और अधिकारों का उल्लंघन किया जा रहा है। भारत सरकार को हर राज्य को यह स्पष्ट करने के लिए सख्त नर्दिेश जारी करना चाहिए कि किसी की धार्मिक भावनाओं और स्वतंत्रता को ठेस न पहुंचे। 

एसजीपीसी अध्यक्ष ने भी केंद्र सरकार द्वारा भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड में पंजाब के सशर्त प्रतिनिधत्वि को समाप्त करने को पंजाब के अधिकारों का उल्लंघन बताया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेदभाव की ऐसी घटनाओं को रोकने में गंभीर भूमिका निभानी चाहिए। 

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Jamil Khan
Jamil Khanhttps://reportlook.com/
journalist | chief of editor and founder at reportlook media network

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