पूर्व विश्व रिकॉर्ड धारक और राष्ट्रीय भाला फेंक कोच उवे हॉन (Uwe Hohn) का अनुबंध टोक्यो ओलिंपिक (Tokyo Olympics 2020) के साथ खत्म हो गया है. अब वह वापस अपने देश लौटेंगे क्योंकि अनुबंध बढ़ाए जाने की संभावना नहीं है. जर्मनी के 59 साल के होन को नवंबर 2017 में एक साल के लिए मुख्य कोच नियुक्त किया गया था और उन्हें ओलिंपिक चैंपियन भाला फेंक खिलाड़ी नीरज चोपड़ा (Neeraj Chopra), टोक्यो ओलंपियन शिवपाल सिंह और अनु रानी को ट्रेनिंग देनी थी. इस मामले की जानकारी रखने वाले एक सूत्र ने पीटीआई को नाम जाहिर नहीं करने की शर्त पर बताया, ‘वह (हॉन) जा रहे हैं. साई (भारतीय खेल प्राधिकरण) के उनका अनुबंध बढ़ाने की संभावना नहीं है.’ पता चला है कि हॉन ने अपने वेतन में 50 प्रतिशत इजाफे और इसे करमुक्त करने के अलावा विमान के प्रथम श्रेणी के टिकटों की मांग की थी.

वर्ष 1984 में हॉन ने 104.80 मीटर भाला फेंका था जिसके बाद 1986 में भाले के डिजाइन में बदलाव किया गया और विश्व रिकॉर्ड दोबारा शुरू किए गए. हॉन का शुरुआती अनुबंध प्रतिवर्ष एक करोड़ नौ लाख रुपये का था. इसके अलावा रहना, खाना, मेडिकल सुविधा और छुट्टियों में यात्रा की सुविधा भी दी जानी थी. अक्टूबर 2020 में अनुबंध पर दोबारा हस्ताक्षर के समय वह चाहते थे कि इसे बढ़ाकर प्रतिवर्ष एक करोड़ 64 लाख रुपये किया जाए. साई के सूत्रों ने कहा, ‘साई ने 2020 में उन्हें सूचित कर दिया था कि उनकी मांग व्यावहारिक और अस्वीकार्य है क्योंकि वे जिन खिलाड़ियों को ट्रेनिंग दे रहे थे उनके प्रदर्शन को देखते हुए 55 लाख रुपये का इजाफा सही नहीं है.’

नीरज चोपड़ा ने एक साल तक ही ली थी ट्रेनिंग

साई ने साथ ही कहा था कि उसने भारतीय एथलेटिक्स महासंघ की सिफारिश में मोटी रकम खर्च करके एक अन्य विदेशी भाला फेंक कोच बायो-मैकेनिक विशेषज्ञ डॉ. क्लॉस बार्टोनीट्ज को भी नियुक्त किया है. हॉन अपनी नियुक्ति के बाद से 2018 एशियाई खेलों तक लगभग एक साल के लिए चोपड़ा के कोच रहे. एएफआई ने स्पष्ट कर दिया था कि हॉन को छोड़कर क्लॉस के साथ ट्रेनिंग करना चोपड़ा का फैसला था. चोपड़ा ने भी कहा था कि वह हॉन का सम्मान करते हैं लेकिन जर्मनी के इस कोच की ट्रेनिंग प्रणाली और तकनीकी रवैया उन्हें पसंद नहीं था.

हॉन ने की थी साई और एएफआई की आलोचना

सूत्रों ने कहा कि अक्टूबर 2020 में होने ने मौजूदा शर्तों पर ही अपना अनुबंध बढ़ाने का फैसला किया और वह शिवपाल को ट्रेनिंग दे रहे थे जो ओलिंपिक में 76.40 मीटर का उम्मीद से खराब प्रदर्शन करते हुए फाइनल में जगह बनाने में नाकाम रहे. टोक्यो ओलिंपिक में फ्लॉप रही रानी ने भी हॉन के साथ ट्रेनिंग से इनकार कर दिया था. ओलिंपिक से एक महीने पहले राष्ट्रीय शिविर में सुविधाओं की कमी को लेकर हॉन की आलोचना भी एएफआई और साई को पसंद नहीं आई.

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