इमामों को वेतन दिलाने में आ रही है मुश्किल, जाने क्या वजह!

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यूपी सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड और यूपी शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड तंग हाली के शिकार हैं। कर्मचारियों को भी वेतन के लाले पड़े हैं। शिया वक्फ बोर्ड ने मस्जिद के इमामों को वेतन देने की तैयारी शुरू कर दी है।

प्रदेश में अधिकृत आंकड़ों के अनुसार, सुन्नी वक्फ मस्जिदों की संख्या 35407 और शिया वक्फ मस्जिदों की संख्या 384 हैं।

पहली बार प्रदेश सरकार ने वक्फ संपत्तियों का लेखा-जोखा तैयार करना शुरू किया है। जीआईएस सर्वे का काम भी जारी है। सुन्नी वक्फ बोर्ड कानपुर में यह काम आईआईटी की मदद से कर रहा है। वक्फ की संपत्तियों की खोज के बाद सफलता भी मिली है। इन बोर्डों को मुतवल्ली धनराशि नहीं दे रहे हैं।

07.5 फीसदी बोर्ड को नहीं दे रहे

शिया व सुन्नी वक्फ बोर्डों को वक्फ संपत्तियों से 07.5 फीसदी धनराशि उनकी आय से मिलनी चाहिए। मुतवल्ली इस धनराशि को बोर्ड में जमा नहीं करते हैं। सीमित संख्या में वक्फ संपत्तियां हैं जिनकी धनराशि जमा होती है। तीन साल पहले तक तो किसी भी बोर्ड के पास यह रिकार्ड ही नहीं था कि उनकी आमदनी कितनी है और कौन धनराशि नहीं दे रहा है।

करोड़ों के स्थान पर लाखों मिल रहे

वक्फ बोर्ड को विकास के नाम पर करोड़ों रुपये मिलना चाहिए। लेकिन इनके हाथ दो साल पहले तक कुछ खास नहीं लग रहा था। ताजा आंकड़ों के अनुसार, सुन्नी वक्फ बोर्ड को मात्र 12 लाख और शिया वक्फ बोर्ड को दावे के अनुसार 32 लाख मिले थे। नवीन सत्र में 64 लाख का दावा है लेकिन आंकड़ों को अधिकृत नहीं किया गया है।

इमामों को कैसे देंगे वेतन

सुन्नी उलमा काउंसिल के महामंत्री हाजी मोहम्मद सलीस का कहना है कि वर्तमान सरकार ने वक्फ को पटरी पर लाने का काम किया है। आगे इसके फायदे मिलेंगे। इमामों को वक्फ से वेतन जरूर मिलना चाहिए। ऑल इंडिया शिया युवा यूनिट के महासचिव नायाब आलम ने कहा कि पहली बार शिया वक्फ बोर्ड मस्जिद के इमामों को वेतन देने का प्रस्ताव लाया है। अगर कामयाबी मिलती है तो यह आदर्श साबित होगा। इस पहल का स्वागत किया जाना चाहिए।

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