13.1 C
Delhi
Sunday, February 5, 2023
No menu items!

इजरायल को मुस्लिम देश में मान्यता दिलाने गए अमेरिकी विदेश मंत्री को सुनाई खरी खोटी

- Advertisement -
- Advertisement -

अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंक इस महीने इंडोनेशिया के दौरे पर गए थे 

आख़िरकार यह बात साबित हो गई है कि बीते सप्ताह इंडोनेशिया के दौरे पर गए अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने इंडोनेशिया को इसराइल के साथ रिश्ते सामान्य करने के लिए कहा था.

- Advertisement -

एशिया निक्केई अख़बार से इंडोनेशिया के विदेश मंत्रालय ने पुष्टि की है कि दोनों देशों के विदेश मंत्रियों के बीच हुई बैठक में इस मुद्दे को उठाया गया था. 

इंडोनेशिया दुनिया की सबसे बड़ी मुस्लिम आबादी वाला देश है और फ़लस्तीनी मुद्दों को समर्थन देने के कारण उसके इसराइल के साथ कोई आधिकारिक राजनयिक संबंध नहीं हैं. 

इंडोनेशिया के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता तेउकू फ़ैज़ास्याह ने अख़बार से कहा कि ब्लिंकन और इंडोनेशिया की विदेश मंत्री रेत्नो मर्सुदी के बीच इस मुद्दे को लेकर चर्चा हुई थी.ब्लिंकन और इंडोनेशिया की विदेश मंत्री रेत्नो मर्सुदी 

ब्लिंकन की इस कोशिश के बारे में सबसे पहले अमेरिका की कुछ न्यूज़ वेबसाइट ने ख़बर प्रकाशित की थी, जिसमें कहा गया था कि अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन का प्रशासन ट्रंप काल के ‘अब्राहम अकॉर्ड्स’ के विस्तार की कोशिशें कर रहा है. 

वो मध्य पूर्व के बाहर उन बड़े देशों की ओर देख रहा है जो इसराइल को मान्यता नहीं देते हैं. 

ट्रंप के राष्ट्रपति कार्यकाल के दौरान इसराइल, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), बहरीन और अमेरिका के बीच एक समझौते पर हस्ताक्षर किए गए थे, जिसमें इसराइल के साथ शांति बहाली और कूटनीतिक रिश्ते कायम करने की दिशा में सहमति दी गई है. इसी समझौते को ‘अब्राहम अकॉर्ड्स’ कहा गया था. 

इंडोनेशिया ने क्या जवाब दिया?

इंडोनेशिया विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता फ़ैज़ास्याह ने बैठक को लेकर कहा है कि उनकी विदेश मंत्री मर्सुदी ने अमेरिकी विदेश मंत्री को दो टूक जवाब दिया है. 

फ़ैज़ास्याह ने बताया कि मर्सुदी ने ‘इंडोनेशिया की फ़लस्तीन और वहाँ के लोगों की न्याय एवं आज़ादी की लड़ाई को लेकर अपनी दृढ़ स्थिति के बारे में बताया. फ़लस्तीन के मामले में इसराइल को लेकर हमारी नीति नहीं बदलेगी.’ इंडोनेशिया का यह रुख़ बाइडन प्रशासन के लिए झटके के रूप में देखा जा रहा है. 

अमेरिकी न्यूज़ वेबसाइट्स का कहना है कि अमेरिकी और इसराइली अधिकारियों ने हाल के महीनों में अब्राहम अकॉर्ड्स को विस्तार देने पर चर्चा की है और इस चर्चा के दौरान इंडोनेशिया का नाम सामने आया.

इस रिपोर्ट में वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से कहा गया था कि जो बाइडन प्रशासन अब्राहम अकॉर्ड्स को विस्तार करने के काम में ‘चुपचाप लेकिन काफ़ी लगन से’ लगा हुआ है और इसमें कुछ समय भी लग सकता है.

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता नेड प्राइस ने कहा था, “चीज़ें सामान्य करने के लिए हम अतिरिक्त मौक़ों को तलाश रहे हैं लेकिन सही मौक़ा आने तक हम उस चर्चा को बंद दरवाज़ों के पीछे ही रखेंगे.”

इससे पहले अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने कथित तौर पर इंडोनेशिया और इसराइल के बीच मध्यस्थता करने की पेशकश की थी. 

यूएस इंटरनेशनल डिवेलपमेंट फ़ाइनैंस कॉर्पोरेशन के सीईओ एडम बोलर ने पिछले साल दिसंबर को ब्लूमबर्ग को दिए अपने इंटरव्यू में कहा था कि इसराइल के साथ आधिकारिक रिश्ते स्थापित करने पर अमेरिका इंडोनेशिया में और पूंजी निवेश कर सकता है.

इंडोनेशियाई फ़लस्तीन को लेकर भावुक?मई में इंडोनेशिया में कई लोग फ़लस्तीन के समर्थन में सड़कों पर उतरे थे 

फ़लस्तीन को लेकर इंडोनेशिया में लोगों की भावनाएं हमेशा से उफ़ान पर रही हैं. 

मई में इसराइल और फ़लस्तीन के बीच हुए संघर्ष के दौरान इंडोनेशिया में कई लोग फ़लस्तीन के समर्थन में सड़कों पर उतरे थे. 

इंडोनेशिया के रक्षा मंत्री प्रबावो सुबियांतो इस साल नवंबर में बहरीन में मनामा डायलॉग कॉन्फ़्रेंस के दौरान इसराइली राजनयिक के साथ एक तस्वीर में दिखे थे, जिसके बाद उनके प्रवक्ता को इसको लेकर सफ़ाई जारी करनी पड़ी थी.बहरीन में इसराइली राजनयिक के साथ इंडोनेशिया के रक्षा मंत्री प्रबावो सुबियांतो 

बयान में कहा गया था कि रक्षा मंत्री फ़लस्तीन के मुद्दे को लेकर प्रतिबद्ध हैं.

हालांकि, इसराइली न्यूज़ वेबसाइट वाल्ला का कहना था कि इसराइल के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार एयाल हुलता ने इसी कॉन्फ़्रेंस के दौरान इंडोनेशिया के रक्षा मंत्री से एक संक्षिप्त मुलाक़ात की थी और दोनों ने एक-दूसरे को अपने बिज़नेस कार्ड्स दिए थे.

‘द टाइम्स ऑफ़ इसराइल’ अख़बार अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से लिखता है कि ट्रंप प्रशासन ने इस साल की शुरुआत में इसराइल के साथ और नए मुस्लिम देशों के रिश्ते सामान्य करने में सफलता पा ली थी लेकिन उनके कार्यकाल का समय पूरा होने के कारण वो यह नहीं कर पाए. 

अधिकारियों के मुताबिक़ इन देशों में इंडोनेशिया और अफ़्रीकी देश मॉरिटानिया शामिल था और अगर ट्रंप अगले एक से दो महीने अपने दफ़्तर में रह जाते तो इंडोनेशिया के साथ सौदा हो सकता था. 

इंडोनेशिया की आबादी 27 करोड़ है, जिसमें दुनिया की सबसे बड़ी मुस्लिम आबादी रहती है. ट्रंप प्रशासन अगर यह सौदा कर लेता तो यह उसके लिए एक सबसे बड़ी सांकेतिक जीत होती. 

हालांकि, इन अटकलों पर इंडोनेशिया के राष्ट्रपति ने ख़ुद लगाम लगा दी थी और फ़लस्तीनी प्राधिकरण के राष्ट्रपति महमूद अब्बास से कहा था कि जब तक फ़लस्तीनी राष्ट्र बन नहीं जाता तब तक उनका देश इसराइल के साथ रिश्ते सामान्य नहीं करेगा.

अब्राहम अकॉर्ड्स और अमेरिकाअब्राहम अकॉर्ड पर हस्ताक्षर के समय सितंबर 2020 में वॉशिंगटन में नेतन्याहू, ट्रंप, बहरीन और यूएई के विदेश मंत्री. 

पिछले साल ट्रंप प्रशासन ने खाड़ी के देशों पर इसराइल से राजनयिक संबंध कायम करने का दबाव डाला था. इसके नतीजे भी सामने आए थे. यूएई और बहरीन ने इसराइल से राजनयिक रिश्ते कायम कर लिए थे. इनके बाद सूडान और मोरक्को ने भी इसराइल से राजनयिक संबंध कायम करने का फ़ैसला किया था. सूडान और मोरक्को भी मुस्लिम बहुल देश हैं.

ऐसा ही दबाव सऊदी अरब पर भी था. लेकिन सऊदी अरब ने ऐसा नहीं किया और कहा कि जब तक फ़लस्तीन 1967 की सीमा के तहत एक स्वतंत्र मुल्क नहीं बन जाता है तब तक इसराइल से औपचारिक रिश्ता कायम नहीं करेगा. सऊदी अरब पूर्वी यरुशलम को फ़लस्तीन की राजधानी बनाने की भी मांग करता है.

यूएई और बहरीन की तुर्की आलोचना कर रहा था कि उन्होंने इसराइल से राजनयिक संबंध क्यों कायम किए. ऐसा तब है जब तुर्की के राजनयिक संबंध इसराइल से हैं. तुर्की और इसराइल में 1949 से ही राजनयिक संबंध हैं. तुर्की इसराइल को मान्यता देने वाला पहला मुस्लिम बहुल देश था.

इंडोनेशिया जैसा दुनिया का सबसे बड़ा मुस्लिम बहुल देश अगर इसराइल के साथ आधिकारिक राजनयिक रिश्ते स्थापित करता तो एक तरह से यह इसराइल की एक बड़ी जीत होती.

- Advertisement -
Jamil Khan
Jamil Khan
Jamil Khan is a journalist,Sub editor at Reportlook.com, he's also one of the founder member Daily Digital newspaper reportlook
Latest news
- Advertisement -
Related news
- Advertisement -spot_img

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here