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क्या मीडिया हकीकत मे आजाद है?

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यह ऐसा दौर है जिसका तसव्वुर भी नहीं किया जा सकता था कि ऐसा भी वक्त आयेगा जब सच लिखना और सच दिखाना इतना मुश्किल हो जाएगा, अगर आप हक की बात करेंगे तो फिर आपके सामने परेशानियाॅ खड़ी की जाने लगेगी।

जैसा कि मौजूदा वक्त में एक मशहूर अख़बार और टीवी चैनल के साथ किया गया। इनके दफ्तरो में छापे मारी की गई क्योंकि वो हुकूमत को अपनी सहाफत से आईना दिखाने की कोशिश कर रहे थे। वैसे तो सच के साथ हमेशा से मुश्किले आती रही है, सच को दिखाने से या लिखने से रोका जाना कोई नयी बात नही हैं लेकिन हिन्दुस्तान जैसे जम्हूरी मुल्क में अगर सच के साथ यह सब होगा तो यह काफी अफ़सोस नाक ही कहा जायेगा।

जम्हूरी मुल्क होने की वजह से हर सियासी पार्टी या जिनकी हुकूमत होती है वह इजहार राय की आजादी की बात करते हैं मुल्क की पहचान भी इजहार राय की आजादी से होती है जिसमें सहाफत ईमानदारी से सहाफत करने वालो को कई तरह से परेशान किया जा रहा है। हाल ही में सामने आया एक मशहूर अख़बार और टीवी चैनल का मामला कोई नया नहीं है बल्कि इससे पहले भी कई सहाफियो के लिए सच लिखने और दिखाने की वजह से परेशानिया खड़ी करने की कोशिश की जा चुकी है। जिसकी वजह से इनको मुश्किलो के दौर से गुजरने के लिए मज़बूर होना पड़ा है।

हमारे मुल्क में काबिले तारीफ जम्हूरी निजाम में इजहार राय की आजादी का हक सबको हासिल है लेकिन एकतेदार में बैठे लोगों को जब सच पसंद नहीं आता तो फिर सचाई और हक की बात करने वालो को परेशान करना शुरू कर दिया जाता है। अजीब बात है कि एक तरफ एकतेदार में बैठे लोग सहाफियो के प्रोग्रामो में जा कर बाते करते हैं, वही दूसरी तरफ सच लिखा या दिखाया जाता है तो फिर सहाफियो को मीडिया अदारो को निशाना बनाया जाने लगता है? सच लिखने और दिखाने वालो को एवार्ड मिलना चाहिए, इनको परेशान किया जाता है और इन मामलो में इजाफा होने लगा है अगर कही पर कुछ गलत होता है सब को अख्तियार हासिल है कि वह जम्हूरी तरीके से इसकी मुखालिफत कर सकता है, कानून का सहारा ले सकता है लेकिन एकतेदार के नशे में कोई भी ऐसा काम नही किया जाना चाहिए कि जिससे यह पैगाम जाये कि अगर हमारे हमारे खिलाफ या हमारे पॉलिसी के खिलाफ दिखाया जाएगा या लिखा जाएगा तो फिर परेशान कर दिया है जाएगा, ऐसा नही किया जाना चाहिए।

जम्हूरियत में मीडिया को जो हक और आजादी हासिल है इसको अहमियत दी जानी चाहिए।

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