भरूच, सात फरवरी एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से कहा कि वह प्रदर्शनकारी किसानों को अपने निवास पर उसी तरह से आमंत्रित करें जिस तरह से उन्होंने अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति बराक ओबामा की मेजबानी की। ओवैसी ने मोदी से कहा कि वह नए कृषि कानूनों को निरस्त करें।

गुजरात में स्थानीय निकाय के आगामी चुनाव के लिए एक रैली को संबोधित करते हुए हैदराबाद से सांसद ओवैसी ने प्रधानमंत्री से यह भी कहा कि वह ‘‘बड़े दिल’’ वाले बनें और उन किसानों का ‘‘दर्द समझें’’ जो कृषि कानूनों को निरस्त करने की मांग को लेकर पिछले दो महीनों से दिल्ली की सीमाओं पर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। 

ओवैसी के नेतृत्व वाली ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) गुजरात में अहमदाबाद और भरूच में भारतीय ट्राइबल पार्टी (बीटीपी) के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ रही है।

ओवैसी ने कहा, ‘‘जिस तरह से किसानों के साथ व्यवहार किया जा रहा है, वह सही नहीं है। यह गलत है। प्रधानमंत्री को किसानों को अपने निवास पर आमंत्रित करना चाहिए, जैसे उन्होंने (तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति) बराक ओबामा को (2015 में) अपने हाथों से चाय पेश की थी, जो कि सही था क्योंकि वह हमारे मेहमान थे। हम उम्मीद करते हैं कि प्रधानमंत्री किसानों को आमंत्रित करेंगे, उन्हें चाय और बिस्कुट देंगे और उनसे कहेंगे कि (कृषि विपणन) कानूनों को निरस्त किया जा रहा है और यह कि उन्हें खुश होना चाहिए।’’

ओवैसी ने कहा कि प्रधानमंत्री को देश को खिलाने वाले किसानों की दुर्दशा समझनी चाहिए, यदि वह दावा करते हैं कि उन्होंने गरीबी देखी है। 

उन्होंने कहा, ‘‘जब एक गरीब व्यक्ति असहाय होकर रोता है, तो प्रकृति हमें गरीबों की मदद करने के लिए कहती है, लेकिन जिनकी गरीबों के प्रति कोई सहानुभूति नहीं है, वे गरीबों के आंसुओं से अप्रभावित रहते हैं। हम किसानों के साथ हैं, वे हमारे अन्नदाता हैं। वे हमें भोजन मुहैया कराने के लिए कड़ी मेहनत करते हैं।’’

ओवैसी ने कटाक्ष करते हुए कहा कि किसानों के भारी विरोध ने प्रधानमंत्री मोदी की ‘‘नींद उड़ा दी है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘वे हजारों की संख्या में बाहर आए, नारे लगाए और दिल्ली में (26 जनवरी को) एक ट्रैक्टर परेड निकाली। 300 सांसदों वाली भाजपा चिंतित है कि वह किसानों से कैसे निपटे।’’

बीटीपी नेता छोटू वसावा ओवैसी के साथ थे। ओवैसी ने गुजरात में आदिवासियों, मुसलमानों, दलितों और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के बीच एकता पर जोर दिया।

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *