IAS Amir Subhani: पहले कभी दोस्त चिढ़ाया करते थे और दादा ने देखा था पोते का कलेक्टर बनने का सपना

राज्यबिहारIAS Amir Subhani: पहले कभी दोस्त चिढ़ाया करते थे और दादा ने देखा था पोते का कलेक्टर बनने का सपना

सिवानः अपने बैच के आईएएस टॉपर आमिर सुबहानी (IAS Amir Subhani) अब बिहार के मुख्य सचिव बन गए हैं. आमिर सुबहानी मुख्य रूप से बिहार के सिवान जिले के बड़हरिया प्रखंड के बहुआरा गांव के रहने वाले हैं. इनकी स्कूली शिक्षा भी यहीं से हुई. उन्होंने जीएम हाई स्कूल बड़हरिया से मैट्रिक तक की पढ़ाई पूरी की. आइए आपको बताते हैं बिहार के नए मुख्य सचिव आमिर सुबहानी की पढ़ाई से लेकर अब तक के सफर के बारे में कि कैसे वे यहां तक पहुंचे.

आईएएस आमिर सुबहानी की कहानी किसी प्रेरणा से कम नहीं है. उनके स्कूल के सहपाठी और डीसी इंटर कॉलेज बड़हरिया के प्राचार्य प्रोफेसर सुरेश प्रसाद यादव से एबीपी न्यूज ने बात की. सुरेश प्रसाद यादव ने बताया कि आमिर बड़े ही शांत एवं सरल स्वभाव के थे. पढ़ाई में वे काफी तेज थे, जब हम सभी स्कूल मैदान में वॉलीबॉल खेलने जाते थे उस समय मैदान में ही बैठकर जनरल नॉलेज की पुस्तक पढ़ा करते थे. सभी छात्र उन्हें चिढ़ाते थे और बोलते थे कि कलेक्टर साहब पढ़ रहे हैं पढ़कर कलेक्टर बन जाएंगे.

प्रो. सुरेश प्रसाद यादव ने बताया कि आमिर सुबहानी कहा करते थे कि मैं जब पांचवी कक्षा में था तब दादाजी बताते थे कि पढ़कर तुमको डीएम बनना है. जब आमिर सुबहानी पूछते थे कि डीएम क्या होता है तो दादा जी बताते थे कि जिले का राजा होता है. डीएम की गाड़ी पर लाल बत्ती लगती है तुम्हें वही बनना है. इस तरह आमिर सुबहानी ने पांचवी कक्षा से ही डीएम बनने का सपना लेकर तैयारी शुरू कर दी.

संपन्न परिवार से ताल्लुक रखते थे सुबहानी

आमिर सुबहानी के क्लास और गांव में उनके बहुत ही कम दोस्त थे. उन पर हमेशा ही पढ़ाई का धुन सवार रहता था. वे काफी संपन्न परिवार से ताल्लुक रखते थे और आगे चलकर आमिर सुबहानी ने अपने सपनों को साकार किया. वे यूपीएससी की परीक्षा में टॉपर बने और कई जिलों के डीएम पद पर भी रहे. 1987 बैच के आईएएस अफसर हैं. नीतीश कुमार की सरकार में गृह सचिव ही रहे और अभी उनके अच्छे कार्यों और अनुभव को देखते हुए मुख्य सचिव नियुक्त किया गया है.

हाई स्कूल के उस समय के शिक्षक स्वर्गीय विक्रमा प्रसाद यादव उनकी काफी सराहना करते थे. अंग्रेजी के अध्यापक जमील बाबू बताते हैं कि वह पढ़ने में बहुत ही मेधावी थे उसी समय हमें लग गया था कि यह लड़का आगे चलकर कुछ जरूर बनेगा. वह हमेशा जनरल नॉलेज की पुस्तक अपने पास रख सकता है जब भी समय मिलता था उसे जरूर पढ़ता था.

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