नई दिल्ली, 27 अक्टूबर: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सरकार के मुखिया के तौर पर दो दशक पूरा होने पर आयोजित एक सम्मेलन में हिस्सा लिया। इस दौरान कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अमित शाह ने अपने उस बयान को भी दोहराया, जिस पर नेताओं से लेकर सोशल मीडिया पर लोगों ने उन पर निशाना साधा था। शाह ने अपने भाषण में कहा ‘मेरे अनपढ़ वाले बयान पर मुझे ट्रोल किया गया था, लेकिन मैं फिर से कहना चाहता हूं कि अनपढ़ों की फौज लेकर कोई भी देश विकास नहीं कर सकता है’।

अपने बयान में गृह मंत्री अमित शाह ने दोहराया, ‘मुझे ट्रोल किया गया था, लेकिन मैं फिर से कहना चाहता हूं कि अनपढ़ों की सेना के साथ कोई राष्ट्र विकसित नहीं हो सकता’। उन्हें शिक्षित करने की सरकार की जिम्मेदारी है। कोई व्यक्ति जो अपने संवैधानिक अधिकारों को नहीं जानता है, वह राष्ट्र के विकास में योगदान नहीं दे सकता है, जितना किया जा सकता है.

दरअसल, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अपने हालिया इंटरव्यू में लोगों को शिक्षित किए जाने पर जोर दिया दिया था। उन्होंने एक इंटरव्यू में सवाल उठाते हुए कहा था कि एक अशिक्षित व्यक्ति एक अच्छा नागरिक कैसे बन सकता है, क्योंकि उसे अपने मौलिक अधिकारों तक की जानकारी नहीं होती, जिसके बाद शाह को उनके इस बयान को लेकर सोशल मीडिया से लेकर हर तरह ट्रोल किया गया था।

वहीं केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अपने संबोधन में कहा कि 1960 के दशक के बाद और 2014 तक लोगों को संदेह था कि क्या बहुदलीय लोकतांत्रिक व्यवस्था सफल हो सकती है। बड़े धैर्य के साथ उन्होंने निर्णय लिया और पूर्ण बहुमत के साथ पीएम मोदी को सत्ता दी। उन्होंने कहा कि 2014 तक देश की जनता में बहुत बड़ा प्रश्न आ गया था कि क्या बहुपक्षीय लोकतांत्रिक संसदीय व्यवस्था सफल हो सकती है? जिसका जवाब उसके बाद सबसे सामने हैं।

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