अपनी खाली पड़ी दुकान में कैसे लगवाएं SBI का एटीएम? और करे कमाई जानिए- बैंक का क्या है नियम

व्यापारअपनी खाली पड़ी दुकान में कैसे लगवाएं SBI का एटीएम? और करे कमाई जानिए- बैंक का क्या है नियम

स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने हर इलाके में अपने एटीएम खोल दिए हैं, जिससे ग्राहकों को कोई मुश्किल नहीं हो. आपने भी देखा होगा कि आपके इलाके में भी एटीएम होगा और अब तो बैंक परिसर के अलावा दुकानों में भी एटीएम लगे हुए हैं. बैंक प्राइवेट प्लेस को किराए पर लेकर भी खोल रहे हैं. अगर आपके पास भी खाली दुकान या जमीन पड़ी है तो आप इसमें एटीएम लगवा सकते हैं और अच्छा पैसा कमा सकते हैं.

अगर आप भी अपनी दुकान या जमीन पर एटीएम लगवाना चाहते हैं तो हम आपको बताते हैं कि किस तरह से एटीएम के लिए अपनी जमीन किराए पर दी जा सकती है. साथ ही जानते हैं कि एटीएम से किस तरह कमाई होती है और एटीएम लगवाने का क्या प्रोसेस है…

कैसे लगवा सकते हैं SBI एटीएम?

अगर आप एसबीआई का एटीएम लगवाना चाहते हैं तो आपको पहले बैंक से संपर्क करना होगा. बैंक की ओर से बताए गए नियम के अनुसार, एटीएम लगवाने के लिए आवेदन आपके क्षेत्र में कार्यरत एसबीआई क्षेत्रीय व्यवसाय कार्यालय (RBO) में देना होगा. बैंक का कहना है, ‘आप अपने क्षेत्र के RBO का पता https://bank.sbi/portal/web/home/branch-locator से प्राप्त कर सकते हैं. पता हमारी नजदीकी शाखा से भी प्राप्त किया जा सकता है. यह उस RBO के अंतर्गत कार्यरत सभी शाखाओं के बैंकिंग हॉल में प्रदर्शित रहता है.’

एटीएम कैसे लगवा सकते हैं?

अगर आप भी एटीएम से कमाई करना चाहते हैं तो आपके पास एक जगह होनी चाहिए. जमीन इतनी होनी चाहिए कि जहां एटीएम का सेटअप लगाया जा सके. यह स्थान एक दुकान की तरह भी हो सकता है, लेकिन दुकान एटीएम के हिसाब से थोड़ी बड़ी होनी चाहिए. सीधे बैंक से संपर्क करने के अलावा कई एजेंसियां भी एटीएम लगवाने का काम करती है, जिनसे आप संपर्क कर सकते हैं. इन एजेंसियों में टाटा इंडीकैश एटीएम, मुथूट एटीएम, इंडिया वन एटीएम जैसे कई नाम हैं.

कैसे होती है कमाई

एटीएम लगवाने पर दो तरीके से कमाई होती है. एक डील में तो यह बात होती है कि आपको हर महीने के हिसाब से किराया दिया जाता है और उसका एक कॉन्ट्रेक्ट होता है. इसके साथ ही कई कंपनियां ट्रांजेक्शन के आधार पर डील करते हैं. उस एटीएम में जितने ज्यादा ट्रांजेक्शन होंगे, उतना ही फायदा मालिक को होगा. यानी ट्रांजेक्शन के आधार पर किराया दिया जाता है. महीने का किराया लॉकेशन, प्रोपर्टी की साइज आदि पर निर्भर करता है.

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