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कैसे खत्म हुआ अमरिंदर सिंह और नवजोत सिद्धू में महीनों से चला आ रहा कोल्ड वॉर? जानिए अंदर की बात

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पंजाब कांग्रेस में महीनों के राजनीतिक झगड़े और अंदरूनी कलह का उस वक्त अंत होता नजर आया, जब शुक्रवार को नवजोत सिंह सिद्धू के बतौर पंजाब प्रदेश कांग्रेस समिति (पीपीसीसी) प्रमुख के शपथ ग्रहण समारोह में मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह भी पहुंचे. दरअसल दोनों नेताओं ने लंबे समय से चले आ रहे वाक् युद्ध और आरोपों की बौछार के बाद चाय पर सुलह करने का फैसला किया.

अमृतसर के 57 वर्षीय विधायक ने गुरुवार को एक पत्र में मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह को ‘पंजाब कांग्रेस परिवार का सबसे बड़ा सदस्य’ बताते हुए उनसे शपथ ग्रहण समारोह में आने का अनुरोध किया था और कहा था कि इसके पीछे उनका ‘कोई व्यक्तिगत एजेंडा नहीं है.’ अपने रुख में नरमी बरतते हुए मुख्यमंत्री ने पार्टी मुख्यालय में स्थापना समारोह से पहले पार्टी विधायकों को पंजाब भवन में चाय पर आमंत्रित किया. लगभग चार महीनों में यह पहली बार है जब सिद्धू और अमरिंदर सिंह एक-दूसरे से मिले हैं.

जैसे ही दोनों नेताओं ने आपसी मतभेद खत्म करने का फैसला किया, सीएम अमरिंदर सिंह ने पार्टी कार्यकर्ताओं से नए प्रदेश अध्यक्ष को पूरा समर्थन देने का आग्रह किया. उन्होंने कहा, ‘हमें पंजाब में कांग्रेस पार्टी को मजबूत करना है. मैं इस मंच से सभी से कह रहा हूं कि हमें सिद्धू का समर्थन करना है और पंजाब के लिए मिलकर काम करना है.’ प्रदेश कांग्रेस की कमान संभालने से पहले सिद्धू ने पंजाब भवन में मुख्यमंत्री से मुलाकात की. सिद्धू द्वारा मुख्यमंत्री का अभिवादन करते हुए एक वायरल वीडियो में उन्हें यह कहते हुए सुना गया, ‘सर, आप कैसे हैं?’ मुख्यमंत्री और अमृतसर (पूर्व) के विधायक को पंजाब भवन और बाद में पार्टी मुख्यालय में एक-दूसरे के बगल में बैठे देखा गया.

कांग्रेस विधायक परगट सिंह के मुताबिक, पंजाब भवन में सिद्धू और मुख्यमंत्री के बीच बैठक ‘सौहार्दपूर्ण’ रही. उन्होंने कहा कि सिद्धू ने कांग्रेस महासचिव हरीश रावत की मौजूदगी में चाय पर मुख्यमंत्री से मुलाकात की. मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार ने दोनों नेताओं के बीच बातचीत की तस्वीरें ट्वीट कीं. सीएम ने स्थापना समारोह से पहले कांग्रेस नेताओं को पंजाब भवन में चाय पर आमंत्रित किया था. सिद्धू पटियाला से आए और सीएम के आने से कुछ देर पहले पंजाब भवन गए.

अमरिंदर सिंह और सिद्धू के बीच अप्रैल में तनाव तब बढ़ गया था जब पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी के बाद कोटकपूरा और अन्य स्थानों पर 2015 में पुलिस गोलीबारी की घटना की जांच रिपोर्ट को खारिज कर दिया था. इसमें दो प्रदर्शनकारियों की मौत हो गई थी. सिद्धू ने पवित्र ग्रंथ की बेअदबी के मामले के लिए मुख्यमंत्री पर निशाना साधा था. सिद्धू ने न्याय सुनिश्चित करने में कथित तौर पर ‘जानबूझकर देरी’ को लेकर सवाल उठाया था और सिंह पर 2015 की बेअदबी मामले में जिम्मेदारी से बचने का आरोप लगाया था

इस बीच, मुख्यमंत्री ने सिद्धू की राज्य कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में नियुक्ति का विरोध किया था और कहा था कि वह उनसे तब तक नहीं मिलेंगे जब तक कि वह उनके खिलाफ अपने ‘अपमानजनक’ ट्वीट के लिए माफी नहीं मांगते. सुनील जाखड़ की जगह प्रदेश अध्यक्ष बनाए गए सिद्धू ने शुक्रवार को कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं से खचाखच भरे पार्टी मुख्यालय में चार कार्यकारी अध्यक्षों के साथ कार्यभार संभाला. अगले साल राज्य विधानसभा चुनाव के मद्देनजर सिद्धू की सहायता के लिए पार्टी आलाकमान ने संगत सिंह गिलजियान, सुखविंदर सिंह डैनी, पवन गोयल और कुलजीत सिंह नागरा को बतौर कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किया है.

दोनों नेताओं के बीच लंबे समय से खराब संबंध रहे हैं और उनके मतभेद तब बढ़ गए जब सिद्धू को पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने अगस्त 2018 में अपने शपथ ग्रहण समारोह के लिए आमंत्रित किया था. मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह के विरोध के बावजूद सिद्धू पाकिस्तान गए और देश के सेना प्रमुख कमर जावेद बाजवा को भी गले लगाया. बाद में उन्होंने सिख तीर्थयात्रियों के लिए करतारपुर साहिब कॉरिडोर खोलने के इस्लामाबाद के इरादे के बारे में बात की.

इसके अलावा 2019 में, सिद्धू ने सिंह को दोषी ठहराया था क्योंकि उनकी पत्नी को चंडीगढ़ से लोकसभा टिकट से वंचित कर दिया गया था. मुख्यमंत्री ने इस आरोप से इनकार किया था. इसके अलावा 2019 में, सिद्धू की पत्नी को चंडीगढ़ से लोकसभा टिकट से वंचित कर दिए जाने का दोषी भी उन्होंने अमरिंदर सिंह को ठहराया था, हालांकि मुख्यमंत्री ने इस आरोप से इनकार किया था.

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