ज्ञानवापी मामले में अदालत के आदेश के बाद जिला प्रशासन कमीशन की कार्यवाही शांतिपूर्ण और निष्पक्ष तरीके से कराने की तैयारी में जुट गया है। जिलाधिकारी कौशल राज शर्मा ने अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी को नोटिस जारी करके निर्देश दिया है कि यदि उनके पास परिसर में बंद तालों की चाबी है तो कमीशन की कार्यवाही के दौरान उसे मुहैया कराया जाए।

इसके साथ ही केंद्रीय रिजर्व पुलिस फोर्स (सीआरपीएफ) को कार्यवाही के दौरान ज्ञानवापी व मस्जिद परिसर को खाली कराने का निर्देश दिया है। अधिवक्ता आयुक्त से भी कमीशन की कार्यवाही के दौरान मौजूद रहने वाले व्यक्तियों की सूची मांगी है।

जिलाधिकारी कौशल राज शर्मा ने बताया कि अधिवक्ता आयुक्त हटाने की मांग के समय से ही शासकीय अधिवक्ता के माध्यम से प्रशासन ने स्पष्ट आदेश का अनुरोध किया था। इसमें हमने मौके की स्थिति, चाबी नहीं मिलने की स्थिति व अंदर लोगों की मौजूदगी पर आदेश मांगा था।

न्यायालय ने स्पष्ट आदेश दे दिया है, मगर सीआरपीएफ को पार्टी नहीं बनाया है। ऐसे में सीआरपीएफ को पत्र भेजकर कमीशन की कार्यवाही की जानकारी व सुरक्षा पुख्ता करने के लिए कहा गया है। जिलाधिकारी ने बताया कि न्यायालय के आदेश का अनुपालन हमारी शीर्ष प्राथमिकता है।

दो दिन की बहस के बाद आया फैसला 
ज्ञानवापी परिसर स्थित शृंगार गौरी व अन्य विग्रह की स्थिति जानने के लिए तहखाने तक सर्वे की मांग को लेकर वादी के आवेदन पर प्रतिवादी पक्ष ने आपत्ति करते हुए अधिवक्ता आयुक्त पर पक्षपातपूर्ण कार्यवाही का आरोप लगाया था। इस मामले में दो दिन तक चली लंबी बहस के बाद न्यायालय ने फैसला सुनाया। शुक्रवार को अधिवक्ता आयुक्त की ओर से दोनों पक्षों को नोटिस जारी किया जाएगा। इसके बाद शनिवार की सुबह आठ बजे से कमीशन की कार्यवाही शुरू होगी। बताया जा रहा है कि आज केवल कागजी कार्यवाही होगी, सर्वे का काम कल से शुरू हो सकता है। 

एक और मस्जिद नहीं खोना चाहता : ओवैसी

एआईएमआईएम चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने अदालत के आदेश के बाद बयान दिया कि यह खुला उल्लंघन है। मसाजिद कमेटी और मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड को सुप्रीम कोर्ट जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि मैंने एक बाबरी मस्जिद खो दी है और दूसरी मस्जिद नहीं खोना चाहता। उन्होंने कहा कि योगी सरकार को उन लोगों के खिलाफ तुरंत केस दर्ज करना चाहिए जो धार्मिक स्थलों की प्रकृति को बदलने की कोशिश करते हैं। अगर अदालत उन्हें दोषी पाती है तो उन्हें तीन साल की जेल हो सकती है।

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journalist | chief of editor and founder at reportlook media network

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