गाजियाबाद (उप्र), 17 जून गाजियाबाद पुलिस ने एक बुजुर्ग मुस्लिम व्यक्ति से संबंधित “सांप्रदायिक वीडियो” को लेकर समाजवादी पार्टी के एक कार्यकर्ता पर मामला दर्ज किया है, जिसमें उन्होंने कुछ युवकों द्वारा उन पर हमला करने का आरोप लगाया है। प्राथमिकी में यह भी उल्लेख किया गया है कि फेसबुक ने “भ्रामक” क्लिप की जांच करने के प्रयास किए बिना उसे प्रसारित होने दिया।

हालाँकि, प्राथमिकी में फेसबुक को एक आरोपी के रूप में उल्लेख नहीं किया गया है। प्राथमिकी में विपक्षी समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ता उम्मेद पहलवान इदरीसी पर सोशल मीडिया पर वीडियो प्रसारित करके और इसे “सांप्रदायिक रंग” देकर घृणा को बढ़ावा देने और शांति भंग करने का आरोप लगाया गया है।

इदरीसी ने अपने फेसबुक अकाउंट पर खुद को समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ता के रूप में उल्लेख किया है और पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव के साथ अपनी कथित तस्वीरें पोस्ट की हैं।

नाम न छापने का अनुरोध करते हुए, सपा के एक पदाधिकारी ने पुष्टि की कि इदरीसी सपा सरकार के दौरान गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (जीडीए) बोर्ड का सदस्य था और अभी भी पार्टी के कार्यकर्ता है।

गाजियाबाद पुलिस द्वारा ट्विटर, एक समाचार वेबसाइट, कुछ पत्रकारों और विपक्षी कांग्रेस के नेताओं पर वीडियो के प्रसार को लेकर एक अलग प्राथमिकी दर्ज किए जाने के एक दिन बाद यह मामला दर्ज किया गया।

अधिकारियों ने बताया कि उम्मेद पहलवान इदरीसी के खिलाफ लोनी बॉर्डर थाने में बुधवार शाम शिकायत दर्ज की गई है। एक स्थानीय पुलिसकर्मी की शिकायत पर दर्ज प्राथमिकी में कहा गया है कि इदरीसी ने ‘‘ अनावश्यक रूप से’’ वीडियो को ‘‘ सामाजिक मतभेद पैदा करने’’ की मंशा से बनाया और उसे अपने फेसबुक अकाउंट से साझा किया।

गौरतलब है कि वीडियो में बुजुर्ग मुसलमान अब्दुल शमाद सैफी ने गाजियाबाद के लोनी इलाके में चार लोगों पर उन्हें मारने, उनकी दाढ़ी काटने और उन्हें ‘‘जय श्री राम’’ बोलने के लिए मजबूर करने का आरोप लगाया है।

प्राथमिकी में कहा गया, ‘‘उन्होंने इस वीडियो को सोशल मीडिया पर बिना सत्यापित किए साझा किया, जिसमें धर्म से जुड़ी बात है। इसने घटना को सांप्रदायिक रंग दे दिया और सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने की कोशिश की।’’

इदरीसी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (भादंसं) की धारा 153ए, 295ए, 504 , 505 और सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) अधिनियम के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है।

इदरीसी के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी में उल्लेख किया गया है कि सोशल मीडिया मंच फेसबुक ने इस पूरे प्रकरण की तथ्य-जांच करने का कोई प्रयास नहीं किया और भ्रामक वीडियो को प्रसारित होने दिया।

पुलिस अधीक्षक (गाजियाबाद ग्रामीण) इराज राजा ने बुधवार को बताया था कि कल्लू गुर्जर, परवेश गुर्जर, आदिल, इंतजार और सद्दाम उर्फ बौना को मामले में गिरफ्तार किया गया है। गाजियाबाद पुलिस ने कहा कि यह घटना इसलिए हुई क्योंकि आरोपी सैफी द्वारा बेचे गए एक ‘तावीज’ से नाखुश थे और मामले में किसी भी सांप्रदायिक कोण से इनकार किया है।

मारपीट व अवैध रूप से बंधक बनाने को लेकर यह प्राथमिकी घटना के दो दिन बाद सात जून को बुलंदशहर जिले से सटे अनूपशहर निवासी सैफी की शिकायत पर दर्ज कराई गई थी।

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